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क्रिसिल और इक्रा ने वित्त वर्ष 24 के लिए जताया अनुमान, कंपनी जगत की क्रेडिट गुणवत्ता का आउटलुक पॉजिटिव

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Last Updated- April 03, 2023 | 9:36 PM IST

घरेलू मांग, कम लिवरेज, बैंकों की बेहतर स्थिति और पूंजीगत व्यय में तेजी के कारण वित्त वर्ष 24 में भारतीय कंपनियों की क्रेडिट गुणवत्ता पर दृष्टिकोण सकारात्मक रहेगा। दो एजेंसियों – क्रिसिल और इक्रा ने यह उम्मीद जताई है।

हालांकि इसमें सतर्कता का भाव भी है क्योंकि घरेलू मांग पर ब्याज दरों में बढ़ोतरी का पूरा असर अभी देखा जाना बाकी है और उम्मीद से ज्यादा वैश्विक मंदी निर्यात को और प्रभावित कर सकती है।

एजेंसियों ने कहा कि इसके अलावा वैश्विक मौद्रिक परिस्थितियों की सख्ती और रुपये के मूल्य में गिरावट से पुनर्वित्त का जोखिम बढ़ सकता है, खास तौर पर उन कंपनियों के लिए जिनका विदेशी ऋण अच्छा-खासा बढ़ रहा है।

वैश्विक मंदी और अधिक मुद्रास्फीति के बीच क्रिसिल का क्रेडिट अनुपात (अपग्रेड-डाउनग्रेड रेटिंग) वित्त वर्ष 23 की दूसरी छमाही में सीमित होकर 2.19 गुना रह गया। वित्त वर्ष 2023 की पहली छमाही में यह अनुपात 5.52 गुना था। कुल मिलाकर वित्त वर्ष 23 की दूसरी छमाही में सभी क्षेत्रों में 460 अपग्रेड और 210 डाउनग्रेड हुए।

क्रिसिल रेटिंग्स के प्रबंध निदेशक गुरप्रीत चटवाल के अनुसार भारतीय कंपनी जगत की बैलेंस शीट काफी मजबूत हुई है और गियरिंग लेवल दशक के निचले स्तर पर बना हुआ है।

वित्त वर्ष 2024 के अंत तक इसके रेटेड पोर्टफोलियो की औसत गियरिंग तकरीबन 0.45 गुना होने की उम्मीद है। स्थिर घरेलू मांग और सरकार द्वारा बुनियादी ढांचे के खर्च पर निरंतर ध्यान दिए जाने से अपग्रेड दर को ऊंचा रखा गया है।

रेटिंग एजेंसी इक्रा ने कहा कि वित्त वर्ष 23 में क्रेडिट गुणवत्ता ने अपना दमदार सुधार जारी रखा है। इसने वित्त वर्ष 22 में शुरू की गई सकारात्मक रफ्तार कायम रखी। इक्रा के मुख्य रेटिंग अधिकारी के रविचंद्रन ने कहा कि उपभोक्ता धारणा में सुधार और देश में वित्तीय क्षेत्र की अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति से निकट से मध्यम अवधि के दौरान आर्थिक गतिविधियों को समर्थन मिलने की संभावना है।

बाहरी कारक, खास तौर पर भू-राजनीतिक दांव-पेच और आपूर्ति श्रृंखला की गड़बड़ी से जुड़े जोखिम, मुद्रास्फीति तथा अस्थिर पूंजी प्रवाह से क्रेडिट गुणवत्ता के लाभ को चुनौती मिल सकती है।

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First Published - April 3, 2023 | 9:36 PM IST

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