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Tata Trusts row: क्या टाटा ट्रस्ट्स में टूटा 100 साल पुराना नियम? Mehli Mistry का बड़ा आरोप

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मेहली मिस्त्री ने टाटा ट्रस्ट में नियुक्तियों को नियमों के खिलाफ बताते हुए चैरिटी कमिश्नर से जांच की मांग की है।

Last Updated- April 04, 2026 | 1:36 PM IST
Tata Trusts row: Mehli Mistry seeks probe over appointment of non-Parsis
Tata Trusts row

Tata Trusts row: टाटा ट्रस्ट्स से जुड़े एक मामले में पूर्व ट्रस्टी मेहली मिस्त्री ने महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर के सामने हलफनामा दाखिल कर जांच की मांग की है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने ट्रस्ट से जुड़े एक संस्थान में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा उठाया है।

मेहली मिस्त्री ने दो उपाध्यक्षों की नियुक्ति पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह पारसी नहीं हैं, इसलिए ट्रस्ट के नियमों के अनुसार वे इस पद के लिए योग्य नहीं हैं। इस याचिका में टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा और अन्य ट्रस्टियों को भी पक्षकार बनाया गया है।

यह विवाद बाई हीराबाई जमशेदजी टाटा नवसारी चैरिटेबल इंस्टीट्यूशन से जुड़ा है, जो सर रतन टाटा ट्रस्ट से संबद्ध है। मिस्त्री ने 1923 के ट्रस्ट डीड का हवाला देते हुए कहा कि इसमें साफ लिखा है कि सभी ट्रस्टी पारसी यानी जोरोस्ट्रियन होने चाहिए और किसी गैर-पारसी को इस पद पर नहीं रखा जा सकता।

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अपनी याचिका में उन्होंने कहा कि इन नियमों के बावजूद नियुक्तियां की गईं, जो ट्रस्ट के प्रावधानों के खिलाफ हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे लोगों की मौजूदगी में लिए गए फैसले मान्य नहीं माने जाने चाहिए। इसमें अक्टूबर 2025 में उनके पुनर्नियुक्ति से जुड़ा एक प्रस्ताव भी शामिल है, जिस पर उन्होंने सवाल उठाया है।

नियुक्तियों और फैसलों पर उठे सवाल, जांच की मांग

टाटा ट्रस्ट से जुड़े विवाद में अब नए आरोप सामने आए हैं। मिस्‍ट्री की याचिका में कहा गया है कि ट्रस्ट में की गई नियुक्तियां और बाद के फैसले ट्रस्ट डीड के नियमों का खुला उल्लंघन हैं। उन्होंने इसे कुप्रबंधन और गलत जानकारी देने का मामला बताया है और नियामक हस्तक्षेप की मांग की है ताकि जवाबदेही तय हो सके।

यह चैरिटेबल संस्था नवसारी और मुंबई में कई संपत्तियों का संचालन करती है। इनमें एक अग्नि मंदिर, एक स्कूल और पारसी समुदाय की रिहायशी कॉलोनी शामिल हैं। ट्रस्ट के नियमों के अनुसार ट्रस्टी केवल जरथुस्त्र धर्म के लोगों में से ही चुने जा सकते हैं।

विवाद की पृष्ठभूमि

मिस्‍ट्री ने अक्टूबर 2025 में टाटा ट्रस्ट से इस्तीफा दे दिया था, जब उनका कार्यकाल आगे नहीं बढ़ाया गया। उनका कहना है कि अन्य ट्रस्टियों के साथ मतभेद, खासकर टाटा सन्स के बोर्ड में प्रतिनिधित्व और गवर्नेंस के मुद्दों पर, उनके हटने की वजह बने।

विवाद तब और बढ़ गया जब मिस्‍ट्री और कुछ अन्य ट्रस्टियों ने सिंह को टाटा सन्स बोर्ड में ट्रस्ट के प्रतिनिधि पद से हटाने की कोशिश की। उनका आरोप था कि ट्रस्ट के भीतर जरूरी जानकारी साझा नहीं की जा रही थी। मिस्‍ट्री का कहना है कि इसके बाद उनके खिलाफ लिए गए फैसले बदले की भावना से किए गए।

गौरतलब है कि सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट के पास टाटा सन्स में बहुमत हिस्सेदारी है। इसलिए यह मामला कॉरपोरेट गवर्नेंस के लिहाज से भी काफी अहम माना जा रहा है।

अब चैरिटी कमिश्नर यह जांच करेंगे कि ट्रस्ट में की गई नियुक्तियां और फैसले ट्रस्ट डीड और संबंधित नियमों के अनुसार थे या नहीं।

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First Published - April 4, 2026 | 1:35 PM IST

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