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डॉ. रेड्डीज को निर्यात के लिए सेमाग्लुटाइड बनाने की इजाजत, दिल्ली उच्च न्यायालय ने नोवो नॉर्डिस्क की अपील खारिज की

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सिंगल बेंच ने सिर्फ निर्यात के लिए दवा के निर्माण की अनुमति दी गई थी। पीठ ने कहा कि उसे पहले के फैसले में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं दिखता

Last Updated- March 10, 2026 | 12:21 AM IST
Delhi High Court

दिल्ली उच्च न्यायालय के पीठ ने सोमवार को एकल पीठ के उस आदेश की पुष्टि कर दी, जिसमें दवा कंपनी डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज को भारत में मधुमेह और वजन प्रबंधन की दवा सेमाग्लुटाइड का बनाने और उसका उन देशों में निर्यात करने की अनुमति दी गई थी, जहां डेनिश दवा निर्माता नोवो नॉर्डिस्क के पास पेटेंट संरक्षण नहीं है।

न्यायमूर्ति सी हरि शंकर और ओम प्रकाश शुक्ल के दो सदस्यीय पीठ ने नोवो नॉर्डिस्क की उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें उसने एकल न्यायाधीश के फैसले को चुनौती दी थी। सिंगल बेंच ने सिर्फ निर्यात के लिए दवा के निर्माण की अनुमति दी गई थी। पीठ ने कहा कि उसे पहले के फैसले में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं दिखता।

न्यायालय ने गौर किया कि एकल न्यायाधीश ने नोवो नॉर्डिस्क के पेटेंट को लेकर डॉ. रेड्डीज की चुनौती में प्रथम दृष्टया पात्रता दिखी थी और राय जताई थी कि सेमाग्लुटाइड जिस पेटेंट में आती है, वह स्पष्टता के आधार पर निरस्त किए जाने योग्य लग रहा है।

पीठ ने स्पष्ट किया, भले ही पहले के विश्लेषण में कुछ वैधानिक प्रावधानों को एक साथ शामिल किया गया हो, लेकिन स्पष्टता को लेकर निष्कर्ष ही प्रारंभिक आदेश को बरकरार रखने के लिए पर्याप्त था। साथ ही पीठ ने इस पर जोर दिया कि उसकी टिप्पणियां केवल अस्थायी थीं और मुकदमे का गुण-दोष के आधार पर निर्णय होने पर पेटेंट विवाद के अंतिम फैसले को प्रभावित नहीं करेंगी। आदेश की विस्तृत प्रति की प्रतीक्षा है।

नोवो नॉर्डिस्क कंपनी सेमाग्लुटाइड को ओजेम्पिक, वेगोवी और राइबेल्सस जैसे ब्रांडों के तहत बेचती है। कंपनी के पास इस कंपाउंड का स्पेसीज पेटेंट है, जो उसे 2014 में मिला था। नोवो नॉर्डिस्क ने पिछले साल उच्च न्यायालय में पेटेंट उल्लंघन का आरोप लगाते हुए डॉ. रेड्डीज़ को भारत में इस दवा के उत्पादन से रोकने की मांग की थी। डॉ. रेड्डीज़ ने दावे का खंडन करते हुए तर्क दिया कि नोवो नॉर्डिस्क के पहले के जीनस पेटेंट (जो 2024 में समाप्त हो गया था) को देखते हुए इस पेटेंट में नवीनता और आविष्कार का अभाव है।

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First Published - March 10, 2026 | 12:21 AM IST

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