अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी ने सोमवार को कहा कि ऊर्जा और इंटेलिजेंस को अब एक-दूसरे से अलग नहीं किया जा सकता और इन्हें राष्ट्रीय प्राथमिकता माना जाना चाहिए। उनका कहना है कि जो देश शांति के समय अपनी क्षमता का निर्माण नहीं करता, उसे संकट के समय में अपनी कमजोरियों की कीमत चुकानी पड़ती है। पश्चिम एशिया संघर्ष के संदर्भ में अदाणी ने कहा कि ऊर्जा सुरक्षा और डिजिटल सुरक्षा अब अलग-अलग पहलू नहीं रहे बल्कि ये राष्ट्रीय शक्ति के दोहरे आधार हैं।
अरबपति उद्योगपति ने नई दिल्ली में सीआईआई सालाना व्यापार सम्मेलन 2026 को संबोधित किया। अदाणी ने कहा, 21वीं सदी में सच्ची आजादी का मतलब होगा उस ऊर्जा का मालिक होना, जो हमारे घरों को रोशन करती है और उस बुद्धिमत्ता का मालिक होना, जो हमारे मन को राह दिखाती है। यह कोई कोरी कल्पना नहीं है और दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं अमेरिका और चीन ने इस बात को गहराई से समझा है।
बंदरगाह से लेकर बिजली तक के कारोबार वाले इस बड़े समूह के प्रमुख ने बताया कि कैसे अमेरिका ने ऊर्जा के क्षेत्र में प्रचुरता हासिल की और अब कंप्यूटिंग के क्षेत्र में दबदबा कायम करना चाहता है। चीन ने ऊर्जा के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर विस्तार किया और अब आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) के क्षेत्र में अपना दबदबा कायम चाहता है।
उन्होंने कहा कि उभरती दुनिया अब एक जैसी (सपाट) नहीं रही, बल्कि वह कई हिस्सों में बंट गई है। अब सप्लाई चेनों को राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए नए सिरे से तैयार किया जा रहा है। सुरक्षा से जुड़ी चर्चाओं में ऊर्जा का मुद्दा एक बार फिर से केंद्र में आ गया है। सेमीकंडक्टर अब राज्य की नीति के अहम हथियार बन गए हैं।
भारत के बारे में अदाणी ने कहा कि इस देश में कुछ ऐसा है, जो अपने आप में बहुत शक्तिशाली है क्योंकि हम किसी काल्पनिक भविष्य के लिए निर्माण नहीं कर रहे हैं। हम एक जीवंत, आगे बढ़ते और अपनी ज़रूरत वाले भारत के लिए निर्माण कर रहे हैं। उन्होंने कहा, भारत का फायदा सीधा सा है। हम जो कुछ भी बनाएंगे, उसके लिए मांग पहले से ही मौजूद होगी। मार्च 2026 तक भारत ने 500 गीगावॉट की स्थापित बिजली क्षमता का आंकड़ा पार कर लिया है। अगले दो दशकों में इसकी क्षमता को 4 गुना और बढ़ाने का काम चल रहा है, ताकि 2047 तक भारत 2,000 गीगावॉट के लक्ष्य तक पहुंच सके।
अदाणी ने कहा कि भारत अब सिर्फ धीरे-धीरे आगे नहीं बढ़ रहा है बल्कि इसकी वृद्धि तेज हो रही है। इस रफ्तार से भारत हर दशक में अपने जीडीपी में एक नई यूरोपीय अर्थव्यवस्था के बराबर बढ़ोतरी करेगा। यह कोई सीधी रेखा वाली बढ़ोतरी नहीं है। यह तेजी से बढ़ने वाली वृद्धि है। यह राष्ट्रीय ताक़त है। भारत में मोबाइल डेटा के तेजी से बढ़ने का उदाहरण देते हुए अदाणी ने कहा कि एआई भी इसी तरह की तेजी लाएगा, लेकिन इस तेज़ी के लिए कहीं ज्यादा बिजली की ज़रूरत होगी।