मुंबई की न्यू एरा क्लीनटेक को उम्मीद है कि वह अपनी 20,000 करोड़ रुपये वाली बड़ी कोयला गैसीकरण परियोजना के पहले चरण का वित्तीय समापन दिसंबर 2026 तक कर लेगी तथा इंजीनियरिंग, खरीद और निर्माण (ईपीसी) ऑर्डर दे देगी। यह परियोजना महाराष्ट्र में चंद्रपुर के भद्रावती में स्थापित की जा रही है। नागपुर के पास स्थित यह इकाई भारत में नियोजित सबसे बड़े कोयला गैसीकरण और कार्बन कैप्चर संयंत्रों में से एक होगी। यह सालाना 50 लाख टन कोयले को गैस में तब्दील करके उर्वरक, खनन, वस्त्र और पैकेजिंग जैसे क्षेत्रों में उपयोग किए जाने वाले अहम औद्योगिक रसायनों और ईंधन का उत्पादन करेगी।
यह परियोजना दो चरणों में विकसित की जा रही है। इसके लिए तीन वर्षों में कुल 3 अरब डॉलर का निवेश आवश्यक है। कंपनी संस्थापक और प्रबंध निदेशक बालासाहेब डाराडे ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि पहले चरण में कंपनी लगभग 1 अरब डॉलर का निवेश करेगी। इसके बाद दूसरे चरण में अतिरिक्त 2 अरब डॉलर का निवेश होगा।
उन्होंने कहा, ‘वर्तमान में हम पहले चरण में लगभग 12 से 16 लाख टन टन कोयले को गैस में तब्दील करने के लिए 1 अरब डॉलर के निवेश की बात कर रहे हैं। दूसरे चरण में यह दोगुना हो जाएगा। कुल मिलाकर जब संयंत्र पूरी तरह से चालू हो जाएगा, तो हम प्रति वर्ष लगभग 50 लाख टर कोयले को गैस में तब्दील करने की क्षमता देख रहे हैं।’