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फेम-2 के बकाये अटके, ऑटो कंपनियां अब भी भुगतान के इंतजार में

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फेम-2 योजना के तहत वाहन विनिर्माताओं ने इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) के ग्राहकों को खरीद के समय सब्सिडी दी थी। तब यह माना गया था कि सरकार बाद में कंपनियों को इसका भुगतान कर देगी।

Last Updated- March 27, 2026 | 10:10 AM IST
Electric Vehicle (EV)

टीवीएस मोटर, एथर एनर्जी और टाटा मोटर्स जैसी कई प्रमुख वाहन विनिर्माता कंपनियां अब भी सरकार से फेम-2 योजना के तहत अपने बकाया भुगतान का इंतजार कर रही हैं। हालांकि यह योजना दो साल पहले समाप्त हो चुकी है। बिजनेस स्टैंडर्ड को यह जानकारी मिली है।

फेम-2 योजना के तहत वाहन विनिर्माताओं ने इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) के ग्राहकों को खरीद के समय सब्सिडी दी थी। तब यह माना गया था कि सरकार बाद में कंपनियों को इसका भुगतान कर देगी। हाल ही में सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सायम) के पदाधिकारियों ने भारी उद्योग मंत्रालय के अधिकारियों से मुलाकात की और लंबित बकाये का मामला फिर से उठाया, खास तौर पर इसलिए कि वित्त वर्ष समाप्त होने जा रहा है।

उद्योग के एक अधिकारी ने बताया, ‘टाटा मोटर्स, टीवीएस मोटर, एथर एनर्जी और ओपीजी मोबिलिटी (जिसका नाम पहले ओकाया ईवी था) भारी उद्योग मंत्रालय से भुगतान की प्रतीक्षा करने वालों में शामिल हैं। लंबित बकाया करोड़ों रुपये में है।’

अधिकारी ने इस बात पर भी चिंता जताई की कि फेम-2 बकाया भुगतान के लिए आवंटित धन 31 मार्च से पहले उपयोग नहीं होने पर लैप्स हो सकता है, क्योंकि इस्तेमाल न होने पर आवंटित राशि आम तौर पर वित्त वर्ष के अंत में मंत्रालयों द्वारा वित्त मंत्रालय को वापस कर दी जाती है। इससे यह अनिश्चितता पैदा हो गई है कि 31 मार्च के बाद मंजूरी आने पर इस धन का दोबारा आवंटन किया जाएगा या नहीं। कार्यकारी ने कहा कि आदर्श रूप से मौजूदा वित्त वर्ष के भीतर ही लंबित बकाया निपटाने के लिए निर्धारित राशि का उपयोग किया जाना चाहिए।

उद्योग के एक अन्य अधिकारी ने कहा कि भुगतान की समय-सीमा के संबंध में भारी उद्योग मंत्रालय की स्पष्टता अहम है, खास तौर पर इसलिए कि प्रभावित मूल उपकरण विनिर्माताओं (ओईएम) में से कई सूचीबद्ध कंपनियां हैं तथा सटीक बैलेंस शीट तैयार करने और वित्तीय रिपोर्टिंग के लिए प्राप्तियों पर स्पष्टता की जरूरत है।

अधिकारी ने बताया, ‘लेखांकन मानदंडों के अनुसार अगर वसूली पर अनिश्चितता होती है, तो ऑडिटर कंपनियों से बकाये के लिए प्रावधान करने के लिए कह सकते हैं। इन प्रावधानों को व्यय के रूप में माना जाता है और इनसे शुद्ध लाभ में कमी आ सकती है, हालांकि यह केवल बकाया लंबित होने की अवधि पर निर्भर नहीं करता है, बल्कि वसूली की संभावना पर अधिक निर्भर करता है।’

अधिकारी ने यह भी कहा कि यह देरी विशेष रूप से उन दोपहिया और तिपहिया वाहन विनिर्माताओं के लिए मायने रखती है, जो इस योजना के सबसे बड़े लाभार्थियों में थे।

अलबत्ता यह मसला नया नहीं है। पिछले साल 30 अप्रैल को लिखे पत्र में सायम ने भारी उद्योग मंत्रालय को फेम-2 का बकाया जारी कराने के लिए हस्तक्षेप की मांग की थी। पत्र में सायम ने बताया था कि कई सदस्य कंपनियों को उनके दावों के लिए ‘प्री-रिसिप्ट’ प्राप्त नहीं हुई थीं। ये सरकार द्वारा जारी की जाने वाली ऐसी स्वीकृति होती है, जो विनिर्माताओं को अंतिम सब्सिडी भुगतान जारी होने से पहले मिलती है। सायम ने इस बात पर भी ध्यान दिया कि कुछ कंपनियों ने पहले अस्वीकृत दावों के लिए स्पष्टीकरण प्रस्तुत किए थे, लेकिन वे मामले अभी भी लंबित हैं।

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First Published - March 27, 2026 | 10:10 AM IST

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