फ्लिपकार्ट देश के छोटे शहरों के विक्रेताओं को देशभर में विस्तार में मदद करने के लिए आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) टूल्स का उपयोग कर रही है। वॉलमार्ट के स्वामित्व वाला यह ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म अपने 14 लाख विक्रेताओं को सशक्त बनाकर अपनी बाजार स्थिति को मजबूत करने के लिए प्रयासरत है। कंपनी अपनी आरंभिक सार्वजनिक पेशकश (आईपीओ) से पहले ऐसा कर रही है।
कंपनी ने एआई-संचालित ऐसे डैशबोर्ड बनाए हैं, जो हिंदी और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में तत्काल सहायता देते हैं। इससे छोटे शहरों के विक्रेताओं को मांग का पूर्वानुमान, मूल्य निर्धारण संबंधी जानकारी और रुझानों के विश्लेषण तक पहुंच मिलती है। यह पहले उनके कारोबार के लिए उपलब्ध नहीं थे। अब विक्रेता वॉयस-एनेबल्ड प्रणाली से पूछ सकते हैं कि क्या बनाना है, कब स्टॉक तैयार करना है और उत्पादों का मूल्य निर्धारण कैसे करना है। फ्लिपकार्ट के मार्केटप्लेस और किराना प्रमुख के अनुसार इस मार्गदर्शन से कुछ कारोबारियों को हफ्तों के भीतर ही अपना स्तर बढ़ाने में मदद मिली है।
यह प्रयास भारतीय ई-कॉमर्स में व्यापक संरचनात्मक बदलाव दर्शाता है। गूगल और डेलॉयट की रिपोर्ट के अनुसार यह उद्योग मौजूदा 90 अरब डॉलर से बढ़कर साल 2030 तक 250 अरब डॉलर के अनुमानित बाजार की ओर बढ़ रहा है। यह वृद्धि महानगरों से नहीं, बल्कि उन मझोले और छोटे शहरों की तेजी की बदौलत है, जहां पहली बार के उद्यमी और कारीगर देशव्यापी पहुंच के साथ डिजिटल-फर्स्ट ब्रांड बना रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि एआई इस यात्रा में अहम कारक होगा, क्योंकि एल्गोरिदम संचालन को सुव्यवस्थित करके और खरीदारों के निर्णय लेने को सरल बनाकर खरीदारों की मांग को अत्यधिक व्यक्तिगत बना देता है, जिससे लाभ में 30 से 35 प्रतिशत की वृद्धि होती है।