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ग्रामीण मांग के चलते FMCG सेक्टर में सुधार संभव, तिमाही नतीजों में दिखेगा GST राहत का असर

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अक्टूबर-दिसंबर तिमाही के एफएमसीजी नतीजों में जीएसटी दरों में कमी का प्रभाव दिखने की उम्मीद जताई गई है और ग्रामीण मांग के शहरी क्षेत्रों से बेहतर रहने का अनुमान लगाया गया है

Last Updated- January 05, 2026 | 10:06 PM IST
FMCG
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

ब्रोकरेज फर्मों का कहना है कि एफएमसीजी पर माल और सेवा कर (जीएसटी) की नई दरों का परिवर्तनशील प्रभाव अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में दिखने की उम्मीद है। उनका कहना है कि तिमाही आधार पर बिक्री में सुधार का अनुमान है। कंपनियों ने बताया कि आपूर्ति श्रृंखला ने ऊंची कीमत वाले सामान को खपाने पर ध्यान दिया है।

तिमाही परिणाम से पहले अपने अपडेट में डाबर इंडिया ने कहा, ‘तिमाही के दौरान मांग में सुधार के शुरुआती संकेत देखे गए जो जीएसटी दरों में संशोधन से संभव हुआ। अक्टूबर के महीने में वितरकों और खुदरा विक्रेताओं ने चैनल में मौजूदा ऊंची कीमत वाले माल को खत्म करने पर ध्यान केंद्रित किया। व्यापार में स्थिरता के बाद शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में उपभोक्ता धारणा में सुधार आया। ग्रामीण मांग इस तिमाही में भी शहरी मांग के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन करती नजर आई।’

मैरिको ने अपने तिमाही अपडेट में कहा कि इस दौरान सेक्टर में मंथर मांग का रुझान देखा गया। पैराशूट नारियल तेल की निर्माता ने अपने अपडेट में कहा, ‘हम आने वाली तिमाहियों में खपत में सुधार को लेकर आशावादी बने हुए हैं, जिसे मंहगाई में कमी, जीएसटी की घटी दरों के कारण खरीद क्षमता बढ़ने, एमएसपी में बढ़ोतरी और मजबूत फसल बोआई से मदद मिली है।’

नोमूरा ने इस सेक्टर पर तिमाही से पहले अपनी रिपोर्ट में कहा कि उसे उम्मीद है कि अक्टूबर-दिसंबर तिमाही दो-हिस्सों की कहानी होगी। पहली तिमाही का आधा हिस्सा (अक्टूबर से मध्य नवंबर) में जीएसटी में बदलाव का असर जारी रहा, क्योंकि डीलरों और खुदरा विक्रेताओं के पास पुरानी कीमत का स्टॉक बना रहा। ब्रोकरेज फर्मों को यह भी उम्मीद है कि सर्दी के मौसम में तापमान कम होने से सर्दी वाले उत्पादों की मांग बढ़ेगी।

नोमूरा ने कहा, ‘हमें उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में कंज्यूमर स्टैपल की बिक्री 7.8 प्रतिशत बढ़ेगी जो आठवीं तिमाही के औसत 6.1 प्रतिशत से अधिक है।’ ब्रोकरेज ने ग्रामीण मांग में भी लगातार सुधार का अनुमान जताया है। शहरी मांग के बारे में उसका कहना है, ‘2025 के बजट में आय कर कटौती, कम ब्याज दरों और श्रम सुधारों से आय/बचत में इजाफा हुआ है और इससे शहरी इलाकों में खपत बढ़ने का अनुमान है।’

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First Published - January 5, 2026 | 10:06 PM IST

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