ई-कॉमर्स और क्विक कॉमर्स (क्यू-कॉम) कंपनियों द्वारा अपने परिचालन नेटवर्क में डार्क स्टोर अथवा गोदामों को शामिल करने की प्रक्रिया आसान होने वाली है। वित्त मंत्रालय इस संबंध में माल एवं सेवा कर (जीएसटी) पंजीकरण को अपडेट करने की आवश्यकता संबंधी नियमों को आसान बनाने के लिए राज्य सरकारों के साथ चर्चा कर रहा है। यह पहल ऐसे समय में की जा रही है जब डार्क स्टोरों और गोदामों का छोटे शहरों में तेजी से विस्तार हो रहा है।
उद्योग से जुड़े पक्षों ने सरकार को बताया है कि शहरों में क्यू-कॉम के परिचालन में तेजी से विस्तार होने के कारण हजारों डार्क स्टोर और गोदाम स्थापित किए गए हैं। ऐसे में हर गोदाम या डार्क स्टोर के लिए जीएसटी पंजीकरण को अपडेट करने की प्रक्रिया काफी बोझिल हो गई है और इसमें काफी समय लगता है।
जीएसटी कानून के तहत जहां माल का भंडारण किया जाता है अथवा जहां से माल की आपूर्ति की जाती है, उन जगहों को ‘कारोबार का स्थान’ माना जाता है । इसमें गोदाम और डार्क स्टोर शामिल हैं। इन जगहों को उचित तरीके से राज्यवार जीएसटी पहचान संख्या (जीएसटीआईएन) के तहत अवश्य घोषित किया जाना चाहिए। किसी कारोबार के लिए प्रति राज्य/ केंद्रशासित प्रदश केवल एक ही जीएसटीआईएन की आवश्यकता होती है।
एक ही राज्य के भीतर कई डार्क स्टोर या गोदामों को एक साधारण संशोधन के जरिये मौजूदा जीएसटीआईएन में ‘कारोबार के अतिरिक्त स्थान’ (एपीओबी) के रूप में जोड़ा जाता है। मगर स्थानों को बार-बार जोड़ने या हटाने के लिए जीएसटी पोर्टल पर बार-बार संशोधन करना पड़ता है। यह प्रक्रिया उन प्लेटफॉर्म विक्रेताओं के लिए समय खपाने वाला और बोझिल हो जाती है जिन्हें खुद विवरण अपडेट करना पड़ता है।
एक अधिकारी ने कहा, ‘यह केंद्र और राज्य दोनों द्वारा संयुक्त रूप से प्रशासित मामला है। इसलिए इन चिंताओं को प्रभावी तौर पर निपटाने के लिए केंद्र एवं राज्यों को सहमति बनाई होगी।’ उन्होंने कहा, ‘कई राज्यों ने आशंका जताई है कि डार्क स्टोर और गोदामों के लिए पंजीकरण मानदंडों को बेहद सरल किए जाने से आपूर्ति पर नजर रखने, राजस्व की संभावित चोरी और प्रवर्तन में कठिनाई जैसी चुनौतियां पैदा हो सकती हैं।’
वित्त मंत्रालय ने इस संबंध में भेजे गए सवालों का खबर लिखे जाने तक कोई जवाब नहीं दिया।
प्राइस वाटरहाउस कूपर्स प्राइवेट लिमिटेड के पार्टनर प्रशांत अग्रवाल ने कहा कि ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिये कारोबार करने वाले विक्रेताओं को गोदामों को जोड़े या हटाए जाने पर राज्यवार जीएसटी पंजीकरण को अपडेट करने में फिलहाल कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा, ‘ई-कॉम कंपनियों द्वारा अपने नेटवर्क का आक्रामक तरीके से विस्तार किए जाने के साथ ही जीएसटी को अपडेट करना जरूरी है। पंजीकरण में देरी होने से किसी खास राज्य में होने वाली बिक्री सीधे तौर पर प्रभावित हो सकती है जिससे उस राज्य का जीएसटी राजस्व भी प्रभावित होता है।’
इकनॉमिक लॉ प्रैक्टिस के पार्टनर विवेक बाज ने सुझाव दिया कि सरकार को पर्याप्त सुरक्षा उपायों के साथ किसी राज्य के भीतर एक केंद्रीकृत गोदाम या डार्क स्टोर पंजीकरण मॉडल तैयार करना चाहिए।