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फ्लिपकार्ट में हिस्सेदारी बेचने के बाद टाइगर ग्लोबल के लिए मुश्किल, सरकार करेगी टैक्स वसूली

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सुप्रीम कोर्ट ने टाइगर ग्लोबल की फ्लिपकार्ट हिस्सेदारी बिक्री पर पूंजीगत लाभ कर लागू करने का आदेश दिया।

Last Updated- January 17, 2026 | 12:30 PM IST
Representative Image

भारत की सर्वोच्च न्यायालय ने अमेरिकी निवेश कंपनी टाइगर ग्लोबल मैनेजमेंट के 2018 में फ्लिपकार्ट में अपनी हिस्सेदारी वॉलमार्ट को बेचने पर पूंजीगत लाभ कर (Capital Gains Tax) लागू करने का आदेश दिया है। इस फैसले के बाद आयकर विभाग कंपनी के खिलाफ टैक्स वसूली की कार्रवाई करेगा।

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला विदेशी निवेशकों के लिए अहम माना जा रहा है और भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम पर इसका प्रभाव पड़ सकता है।

टैक्स वसूली और रिफंड की स्थिति

सूत्रों ने बताया कि टाइगर ग्लोबल ने फ्लिपकार्ट में अपनी हिस्सेदारी बेचकर लगभग ₹14,500 करोड़ (लगभग $1.6 अरब) अर्जित किए थे। अब इस बिक्री से उत्पन्न पूंजीगत लाभ पर टैक्स देय होगा। इसके अलावा, कंपनी द्वारा पहले दायर ₹970 करोड़ की रिफंड क्लेम भी अब नोटिस में शामिल होगी।

एक वित्त मंत्रालय के अधिकारी ने कहा, “टैक्स डिमांड नोटिस जारी कर दी जाएगी और रिफंड राशि को भी इसमें जोड़ा जाएगा।”

सुप्रीम कोर्ट ने DTAA का लाभ नहीं दिया

टाइगर ग्लोबल ने अपने मॉरिशस स्थित कंपनियों के माध्यम से यह निवेश किया था। कंपनी का तर्क था कि भारत-मॉरिशस डबल टैक्स अवॉइडेंस एग्रीमेंट (DTAA) और “ग्रैंडफादरिंग” क्लॉज के तहत उनके पूंजीगत लाभ पर टैक्स नहीं लगेगा, क्योंकि शेयर 1 अप्रैल 2017 से पहले खरीदे गए थे।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि DTAA केवल उन मामलों में लागू होता है जहां मॉरिशस कंपनी की भारत में स्थायी इकाई सीधे संपत्ति रखती है। केवल शेयर बिक्री वाले सौदे DTAA के दायरे में नहीं आते।

इस फैसले से दिल्ली हाई कोर्ट का अगस्त 2024 का फैसला भी पलट गया, जिसमें हाई कोर्ट ने पहले टाइगर ग्लोबल के पक्ष में फैसला सुनाया था।

पिछले फैसलों का क्रम

  • 2018: टाइगर ग्लोबल की मॉरिशस स्थित कंपनियों ने फ्लिपकार्ट में हिस्सेदारी वॉलमार्ट को बेची।

  • 2019-2020: कंपनी ने “निल” विथहोल्डिंग टैक्स सर्टिफिकेट के लिए आवेदन किया। उनका दावा था कि उनके लाभ DTAA के तहत टैक्स से मुक्त हैं।

  • 2020: प्राधिकरण फॉर एडवांस रूलिंग (AAR) ने इस दावा को खारिज कर दिया। AAR ने कहा कि निवेश DTAA लाभ पाने के उद्देश्य से संरचित किया गया था और असली नियंत्रण अमेरिका में था।

  • 2024: दिल्ली हाई कोर्ट ने AAR का निर्णय पलट दिया और टाइगर ग्लोबल के पक्ष में फैसला सुनाया।

  • 2026: सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट का निर्णय उलटते हुए कहा कि DTAA का लाभ इस सौदे पर लागू नहीं होता।

फैसले का असर

विशेषज्ञों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला विदेशी निवेशकों के लिए संकेतक है कि भारत में क्रॉस-बॉर्डर निवेश पर नियम सख्त हो सकते हैं। यह स्टार्टअप फंडिंग और विदेशी निवेश रणनीतियों पर असर डाल सकता है।

विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि भविष्य में ऐसे सौदों में कर नियोजन और निवेश संरचना को और अधिक सावधानीपूर्वक योजना बनानी होगी।

(-पीटीआई इनपुट के साथ)

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First Published - January 17, 2026 | 12:30 PM IST

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