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2 साल में हीरो की सभी बाइक होंगी फ्लेक्स-फ्यूल तैयार, एथनॉल ईंधन पर बड़ा दांव

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फ्लेक्स फ्यूल में पेट्रोल के साथ कम से कम 85 प्रतिशत एथनॉल मिश्रित होता है। ऐसे मिश्रण के लिए बनाए गए वाहनों को फ्लेक्स-फ्यूल वाहन (एफएफवी) के रूप में जाना जाता है

Last Updated- June 04, 2026 | 12:04 AM IST
Harshvardhan Chitale
हीरो मोटोकॉर्प के मुख्य कार्य अधिकारी हर्षवर्धन चितले

हीरो मोटोकॉर्प अगले दो वर्षों के भीतर अपने सभी 12 मोटरसाइकल मॉडलों में फ्लेक्स-फ्यूल संस्करण पेश कर सकती है। कंपनी के मुख्य कार्य अधिकारी हर्षवर्धन चितले ने बिजनेस स्टैंडर्ड बातचीत के दौरान आज बताया कि इन मॉडलों को बाजार में लाने की रफ्तार ई85-ई100 ईंधन की उपलब्धता और मूल्य निर्धारण पर निर्भर करेगी। फ्लेक्स फ्यूल में पेट्रोल के साथ कम से कम 85 प्रतिशत एथनॉल मिश्रित होता है। ऐसे मिश्रण के लिए बनाए गए वाहनों को फ्लेक्स-फ्यूल वाहन (एफएफवी) के रूप में जाना जाता है।

चितले ने कहा कि फ्लेक्स-फ्यूल वाहन से प्रदर्शन का लाभ मिलता है और ये भारत के ऊर्जा सुरक्षा लक्ष्यों का भी समर्थन करते हैं। उनके अनुसार फ्लेक्स फ्यूल मोटरसाइकल ‘3 प्रतिशत अधिक टॉर्क और 7 प्रतिशत अधिक पीक पावर’ प्रदान कर सकती हैं। लेकिन उन्होंने फ्लेक्स-फ्यूल वाहन अपनाने में तीन प्रमुख बाधाएं बताईः फ्लेक्स फ्यूल की उपलब्धता, ऐसे कीमत और उपभोक्ता जागरूकता।

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में इजाफा हुआ है। इसलिए केंद्र सरकार वाहन विनिर्माताओं को फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए प्रोत्साहित कर रही है। क्योंकि एथनॉल का उत्पादन देश में ही गन्ने जैसे कच्चे माल से होता है, जिससे आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने में मदद मिलती है।

देश की सबसे बड़ी दोपहिया वाहन विनिर्माता कंपनी ने बुधवार को सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी तथा पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप पुरी की मौजूदगी में अपनी पहली दो फ्लेक्स फ्यूल मोटरसाइकल – स्प्लेंडर प्लस और एचएफ डीलक्स का अनावरण किया।

चितले ने बताया कि ईंधन का अर्थशास्त्र इस तरह के वाहनों के विस्तार में अहम होगा, क्योंकि पेट्रोल की तुलना में एथनॉल में ऊर्जा कम होती है। लिहाजा, प्रति लीटर माइलेज कम मिलता है। इस कमी की भरपाई के लिए अ​​धिक एथनॉल-मिश्रण वाले ईंधन को उचित छूट पर बेचा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘बतौर उपभोक्ता अगर मुझे प्रति किलोमीटर अधिक खर्च नहीं करना पड़े, तो अ​​धिक एथनॉल-मिश्रित ईंधन ई20 से सस्ता होना चाहिए।’

चितले के अनुसार इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स सोसायटी (सायम) ने सरकार को सुझाव दिया है कि ई85 ईंधन की कीमत देश भर के पंपों पर बिकने वाले मानक ई20 पेट्रोल की तुलना में 25 से 30 प्रतिशत कम होनी चाहिए। उन्होंने कहा, ‘अगर आप इसे 30 प्रतिशत कम रखते हैं, तो इससे उपभोक्ता के लिए ई85 पर हमारा फ्लेक्स फ्यूल वाहन चलाना थोड़ा सस्ता हो जाता है।’ दूसरी ओर सामान्य मोटरसाइकल की तुलना में फ्लेक्स-फ्यूल मोटरसाइकल खरीदने की अतिरिक्त लागत अपेक्षाकृत कम होती है। उन्होंने कहा, ‘यह काफी कम है, 4 से 5 प्रतिशत। यह ज्यादा नहीं है।’

चितले ने कहा कि उपभोक्ता शिक्षा अहम होगी क्योंकि कई खरीदार अब भी इस तकनीक से अनजान हैं। उन्होंने नई पेश की गई मोटरसाइकलों को भविष्य के लिहाज से तैयार वाहन बताया जो बिना किसी संशोधन के कई ईंधन मिश्रण पर चल सकती हैं। उन्होंने बताया, ‘ये ऐसी एफएफवी हैं, जो ई85 पर चल सकती हैं, लेकिन अगर यह उपलब्ध नहीं है, तो भी यह ई20 पर चल सकती है।’

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First Published - June 4, 2026 | 12:04 AM IST

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