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हिंदुस्तान जिंक के OFS को मिली आधी से कम बोलियां, अगली नीलामी में Vedanta जुटा सकेगी सिर्फ 650 करोड़ रुपये

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अनिल अग्रवाल की अगुआई वाली फर्म की हिंदुस्तान जिंक में हिस्सेदारी वेदांत और ब्रिटिश मूल कंपनी वेदांत रिसोर्सेज की तरफ से अपना कर्ज घटाने के लिए हो रही है।

Last Updated- August 16, 2024 | 11:21 PM IST
Hindustan Zinc

जिंस क्षेत्र की दिग्गज हिंदुस्तान जिंक के ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) को संस्थागत निवेशकों से सिर्फ 6.36 करोड़ शेयरों के लिए बोली मिली जबकि कुल 13.37 करोड़ शेयरों की पेशकश की गई है। सांकेतिक कीमत 495 रुपये पर इस पेशकश को 3,150 करोड़ रुपये की बोली मिली। प्रवर्तक वेदांत अपनी 3.17 फीसदी हिस्सेदारी बेचकर करीब 6,500 करोड़ रुपये जुटाना चाह रही है।

बाजार के विशेषज्ञों ने कहा कि द्वितीयक बाजार (सेकंडरी मार्केट) में हिंदुस्तान जिंक के शेयरों में तेज गिरावट और राज्यों को खनन कंपनियों से पिछली तारीख से कर वसूलने की सर्वोच्च न्यायालय की इजाजत का भी शेयरों की मांग पर असर पड़ा है। सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का हालांकि हिंदुस्तान जिंक पर बहुत ज्यादा असर पड़ता नहीं दिख रहा है।

ओएफएस का मूल आकार 5.14 करोड़ शेयरों का था और इसके साथ और 8.23 करोड़ शेयरों के लिए आवेदन स्वीकार करने का विकल्प रखा गया था। वेदांत अपने अतिरिक्त आवेदन के विकल्प का आंशिक ही इस्तेमाल कर सकती है। खुदरा शेयरों के लिए 1.34 करोड़ शेयर रखे गए हैं, जिसकी नीलामी सोमवार को होगी। अगर खुदरा श्रेणी को पूरे आवेदन मिलते हैं तो वेदांत 650 करोड़ रुपये और जुटा पाएगी।

ओएफएस की आधार कीमत 486 रुपये तय की गई है। हिंदुस्तान जिंक का शेयर एनएसई पर 9.4 फीसदी गिरकर 518 रुपये पर बंद हुआ जहां करीब 600 करोड़ रुपये के शेयरों का कारोबार हुआ। आधार कीमत आखिरी बंद भाव से करीब 6.2 फीसदी नीचे है।

आम तौर पर मौजूदा शेयरधारक द्वितीयक बाजार में अपने शेयर बेच देते हैं और ओएफएस में आवेदन करते हैं ताकि कीमतों में अंतर का लाभ उठा सकें। सिटीबैंक और जेएम फाइनैंशियल इस शेयर बिक्री के लिए निवेश बैंकर हैं। जून 2024 के आखिर में वेदांत के पास हिंदुस्तान जिंक की 64.92 फीसदी हिस्सेदारी थी, वहीं भारत सरकार के पास 29.54 फीसदी।

अगर खुदरा श्रेणी को पूरे आवेदन मिलते हैं तो वेदांत की हिंदुस्तान जिंक में हिस्सेदारी 1.82 फीसदी घट जाएगी। देश में जस्ते की सबसे बड़ी उत्पादक हिंदुस्तान जिंक का मूल्यांकन अभी 2.2 लाख करोड़ रुपये है। वेदांत का शेयर 2 फीसदी चढ़कर 429 रुपये पर पहुंच गया।

अनिल अग्रवाल की अगुआई वाली फर्म की हिंदुस्तान जिंक में हिस्सेदारी वेदांत और ब्रिटिश मूल कंपनी वेदांत रिसोर्सेज की तरफ से अपना कर्ज घटाने के लिए हो रही है।

जून में वेदांत रिसोर्सेस की इकाई फिनसाइडर इंटरनैशनल ने देश में सूचीबद्ध वेदांत की 2.6 फीसदी हिस्सेदारी बेचकर 4,184 करोड़ रुपये जुटाए थे, जिनका इस्तेमाल कर्ज घटाने में किया गया। जून के आखिर में वेदांत का शुद्ध कर्ज 61,324 करोड़ रुपये था जबकि सकल कर्ज था 78,016 करोड़ रुपये। 31 मार्च को वेदांत रिसोर्सेस का कर्ज करीब 6 अरब डॉलर था।

जुलाई में वेदांत ने पात्र संस्थागत नियोजन (QIB) के जरिये 400 रुपये के भाव पर 19.31 करोड़ नए शेयर जारी कर 8,500 करोड़ रुपये (करीब 1 अरब डॉलर) जुटाए थे। जुलाई के आखिर में ग्लोबल रेटिंग एजेंसी एसऐंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने वेदांत रिसोर्सेस की रेटिंग बढ़ाकर बी कर दी थी जो पहले सीसीसी प्लस थी और इसके लिए एजेंसी ने पूंजी ढांचे व नकदी में सुधार का हवाला दिया था।

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First Published - August 16, 2024 | 10:00 PM IST

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