facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

IATA summit: एतिहाद सीईओ नेव्स बोले- ‘द्विपक्षीय विमानन अधिकार तभी बढ़ें जब पॉइंट-टु-पॉइंट मांग हो, ट्रांसफर ट्रैफिक पर बहस बेतुकी

Advertisement

नेव्स ने कहा कि भारत और अबू धाबी के बीच अतिरिक्त अधिकारों के लिए बातचीत अभी शुरू नहीं हुई है, लेकिन जल्द ही शुरू होनी चाहिए।

Last Updated- June 02, 2025 | 10:16 PM IST
Antonoaldo Neves
एतिहाद एविएशन ग्रुप के सीईओ एंटोनोआल्डो नेव्स

भारत और खाड़ी देशों के बीच द्विपक्षीय विमानन अधिकारों के बढ़ाए जाने पर जारी चर्चा के बीच एतिहाद एविएशन ग्रुप के मुख्य कार्य अधिकारी एंटोनोआल्डो नेव्स ने बिज़नेस स्टैंडर्ड से खास बातचीत में कहा कि द्विपक्षीय अधिकारों में तब ही वृद्धि होनी चाहिए जब पॉइंट-टु-पॉइंट ट्रैफिक पर्याप्त हो। उन्होंने कहा कि आज जिस तरह का ट्रांसफर ट्रैफिक दिखता है, वह बेतुका है, क्योंकि हर विमानन कंपनी की लागत और मूल्य निर्धारण का मॉडल अलग-अलग उपभोक्ता वर्गों पर केंद्रित होता है।

ALSO READ: IATA summit: एमिरेट्स के बयान पर इंडिगो सीईओ पीटर एल्बर्स की दो टूक, बोले- ज्यादा शोर मचाने से आप सही नहीं हो जाते

उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब एक दिन पहले एयर इंडिया के मुख्य कार्य अधिकारी और प्रबंध निदेशक कैंपबेल विल्सन ने बिज़नेस स्टैंडर्ड से कहा था कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय विमानन अधिकार तब ही बढ़ने चाहिए जब पर्याप्त पॉइंट-टु-पॉइंट मांग हो।

बहस का मूल कारण है कि भारतीय विमानन कंपनियों को इस बात की चिंता है कि अमीरात और एतिहाद जैसी खाड़ी विमानन कंपनियां भारत और पश्चिम एशिया के बीच सीमित पॉइंट-टु-पॉइंट ट्रैफिक ले जाती है। इसके बजाय वे दुबई और अबू धाबी में अपने केंद्र का उपयोग मुख्य तौर पर यात्रियों को यूरोप और उत्तरी अमेरिका ले जाने के लिए करती हैं।

भारतीय विमानन कंपनियां खास तौर पर एयर इंडिया का तर्क है कि इससे यूरोप और उत्तरी अमेरिका के लिए लंबी दूरी की सीधी उड़ानों को लाभप्रद तौर पर परिचालन की उनकी क्षमता कमजोर होती है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया है कि खाड़ी देशों के साथ द्विपक्षीय विमानन अधिकारों का विस्तार तब ही किया जाना चाहिए, जब इसके लिए पर्याप्त मांग हो।

नेव्स ने बिज़नेस स्टैंडर्ड से कहा, ‘पॉइंट-टु-पॉइंट के मुकाबले ट्रांसफर को लेकर बहस सिर्फ बेतुका विमर्श है क्योंकि अंततः हम उस तरह से कीमत तय नहीं करते हैं। हम मांग के अनुरूप कीमतें तय करते हैं।’

उन्होंने कहा कि इंडिगो जैसी भारतीय विमानन कंपनियां की दुनिया में सबसे कम यूनिट लागत है और वे अबू धाबी के लिए सस्ते किराये की पेशकश करने में भी सक्षम हैं, जबकि एतिहाद का लक्षित यात्री समूह अलग है। उन्होंने कहा, ‘दोनों विमानन कंपनियां अपने-अपने ग्राहक वर्ग को सेवा प्रदान करती हैं।’

नेव्स ने कहा कि भारत और अबू धाबी के बीच अतिरिक्त अधिकारों के लिए बातचीत अभी शुरू नहीं हुई है, लेकिन जल्द ही शुरू होनी चाहिए। उन्होंने कहा, ‘चर्चा शुरू करने का यह सही समय है।’

Advertisement
First Published - June 2, 2025 | 9:52 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement