प्राइवेट सेक्टर के चर्चित बैंक IDFC First Bank ने अपने चौथी तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं। बैंक के लिए यह तिमाही बेहतर रहा है क्योंकि इसके नेट प्रॉफिट में 4.9% की बढ़त देखी गई है। बैंक ने इस तिमाही में 319 करोड़ रुपये का लाभ कमाया है, जबकि पिछले साल इसी दौरान यह आंकड़ा 304 करोड़ रुपये था।
दिलचस्प बात यह है कि बैंक का कहना है कि अगर कुछ एकमुश्त घटनाओं (जैसे धोखाधड़ी का मामला, ट्रेजरी लॉस और टैक्स रिफंड) को अलग रख दिया जाए, तो बैंक का असली मुनाफा (Normalised PAT) 746 करोड़ रुपये के करीब बैठता है।
बैंक की कमाई का सबसे मुख्य जरिया ‘ब्याज’ होता है और इस मोर्चे पर बैंक ने बाजी मारी है। बैंक की शुद्ध ब्याज आय (NII) करीब 15.7% बढ़कर 5,677 करोड़ रुपये पर पहुंच गई है। पिछले साल यह आंकड़ा 4,907 करोड़ रुपये था। इसका मतलब है कि बैंक ने लोन बांटने और उस पर ब्याज वसूलने के मामले में काफी अच्छा प्रदर्शन किया है। हालांकि, बैंक का मार्जिन (NIM) पिछले साल के 5.95% के मुकाबले मामूली सा गिरकर 5.93% रह गया है, जिसे लगभग स्थिर माना जा सकता है।
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किसी भी बैंक के लिए सबसे बड़ी सिरदर्दी उसका फंसा हुआ कर्ज यानी NPA होता है। IDFC First Bank के लिए अच्छी खबर यह है कि उसका फंसा हुआ कर्ज कम हो गया है। बैंक का ग्रॉस NPA (कुल फंसा कर्ज) 1.69% से घटकर 1.61% पर आ गया है। वहीं, नेट NPA (जिसकी वसूली की उम्मीद बहुत कम है) भी 0.53% से घटकर 0.48% रह गया है।
मुनाफे में सुधार की एक बड़ी वजह यह भी रही कि बैंक को इस बार ‘प्रोविजनिंग’ (भविष्य के घाटे के लिए अलग रखा जाने वाला पैसा) पर कम खर्च करना पड़ा। यह खर्चा पिछली तिमाही के 1,398 करोड़ रुपये से घटकर 869 करोड़ रुपये रह गया है। इसके अलावा, बैंक को इस बार 130 करोड़ रुपये का टैक्स रिफंड भी मिला है, जिसने बैंक की बैलेंस शीट को और मजबूती दी है।