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IIFL फाइनेंस: गोल्ड लोन पर रोक के बाद नकदी की कमी, बैंक लोन देने से हिचकिचा रहे

बैंक गोल्ड बिजनेस पर लगी रोक के बाद IIFL को लोन देने में सतर्कता बरत रहे हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी और दो बैंकरों ने रॉयटर्स को यह जानकारी दी।

Last Updated- May 06, 2024 | 6:11 PM IST
RBI lifts ban on gold loan business; IIFL Finance shares hit high, rose more than 7% RBI ने गोल्ड लोन बिजनेस से हटाया बैन; IIFL Finance के शेयरों ने भरा फरार्टा, 7% से ज्यादा चढ़े

भारत की गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी IIFL फाइनेंस को नकदी की कमी का सामना करना पड़ रहा है। बैंक गोल्ड बिजनेस पर लगी रोक के बाद IIFL को लोन देने में सतर्कता बरत रहे हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी और दो बैंकरों ने रॉयटर्स को यह जानकारी दी।

IIFL फाइनेंस के एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, “बैंक न तो नई लोन लिमिट मंजूर कर रहे हैं और न ही पहले से मंजूर लिमिट से पैसा दे रहे हैं।” अधिकारी ने कहा कि बैंकों ने IIFL फाइनेंस के गोल्ड और अन्य बिजनेस को लोन देना बंद कर दिया है। उन्होंने अनुमान लगाया कि कुल कारोबार पर प्रतिबंधों का असर लगभग 500 करोड़ रुपये ($60 मिलियन) होने की संभावना है।

मार्च 2024 में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने IIFL फाइनेंस को उनके गोल्ड लोन कारोबार में कुछ गड़बड़ियों को लेकर सख्त आदेश दिया था। RBI ने पाया कि कंपनी के गोल्ड लोन पोर्टफोलियो में “कुछ महत्वपूर्ण पर्यवेक्षी चिंताएं” हैं, जिसके चलते उन्होंने IIFL को तुरंत नए गोल्ड लोन देने, उन्हें वितरित करने और बेचने पर रोक लगा दी। इस रोक की वजह से IIFL को 400 मिलियन डॉलर का बॉन्ड फंड जुटाने की योजना भी रद्द करनी पड़ी।

पेश आ रही दिक्कतों को कम करने के लिए, कंपनी के सबसे बड़े शेयरधारक फेयरफैक्स इंडिया ने 200 मिलियन डॉलर तक की मदद की पेशकश की। साथ ही IIFL ने खुद भी 500 करोड़ का बॉन्ड इश्यू किया और 1272 करोड़ रुपये जुटाने के लिए राइट्स इश्यू लाने की योजना बनाई है।

IIFL फाइनेंस पर लगी रोक का असर अब बैंकों के रुख पर भी पड़ने लगा है। सरकारी बैंकों के अधिकारियों का कहना है कि वो फिलहाल इंतजार की स्थिति में हैं। RBI की रोक हटने का इंतजार करने के साथ ही वो कोई नया जोखिम नहीं लेना चाहते। उनका कहना है कि रोक हटते ही सह-उधार वाली व्यवस्था फिर से शुरू हो जाएगी, लेकिन अभी वो IIFL को कोई टर्म लोन देने से बच रहे हैं। बता दें कि बैंक आपस में मिलकर सह-उधार की व्यवस्था करते हैं ताकि कर्ज का जोखिम कम हो सके।

31 दिसंबर तक IIFL फाइनेंस की कुल उधारी में से 57% बैंकों से ही थी। गौर करने वाली बात ये है कि 5 मार्च को कंपनी के पास करीब 4,035 करोड़ रुपये की नकदी और बाकी तरल संपत्ति थी।

कंपनी के सूत्रों का कहना है कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि कैश की कमी इतनी तेजी से बढ़ेगी। साथ ही कंपनी के दूसरे कारोबारों को भी चलाना है, जिसके लिए पैसों की जरूरत है। वहीं दूसरी तरफ बैंकर भी IIFL को लोन देने में हिचकिचा रहे हैं। उनका कहना है कि वो किसी ऐसी कंपनी को लोन नहीं देना चाहते जो इस वक्त रिजर्व बैंक की निगरानी में है। साथ ही बैंकों पर भी रेगुलेटरी जांच का डर है। इसलिए उनका मानना है कि फिलहाल के लिए लोन देना बंद रखना ही बेहतर है।

First Published - May 6, 2024 | 6:11 PM IST

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