BS CEO Survey 2026: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण पैदा हुई भू-राजनीतिक अनिश्चितता वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारतीय कंपनी जगत के नजरिये पर भारी पड़ रही है।
विभिन्न क्षेत्रों के 34 मुख्य कार्याधिकारियों (सीईओ) के बीच बिज़नेस स्टैंडर्ड द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण से पता चलता है कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के प्रभाव में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि की रफ्तार सुस्त पड़ सकती है, महंगाई में तेजी दिख सकती है और रोजगार सृजन पर असर पड़ सकता है। लेकिन अधिकतर कंपनियों ने बताया कि पूंजीगत व्यय योजनाओं में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।
पश्चिम एशिया संघर्ष का एक महीना पूरा होने पर किए गए इस सर्वेक्षण में शामिल 61.8 फीसदी सीईओ का मानना है कि उभरती चुनौतियां भारत की वृद्धि को 6.8 से 7.2 फीसदी के दायरे में निचले स्तर की ओर धकेल सकती हैं।
मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी अनंत नागेश्वरन ने शनिवार को जारी मासिक आर्थिक रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2027 के लिए भारत के 7 से 7.4 फीसदी के वृद्धि अनुमान के लिए महत्त्वपूर्ण नकारात्मक जोखिमों को उजागर किया।
रिपोर्ट में बताया गया है कि पश्चिम एशिया संघर्ष का असर भारत में मुख्य तौर पर चार मोर्चों पर महसूस किया जाएगा। इनमें तेल, गैस एवं उर्वरकों की आपूर्ति में व्यवधान के अलावा सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि निर्यात पर भी इसका असर पड़ेगा। साथ ही आयात की कीमत बढ़ेगी, लॉजिस्टिक्स (जैसे माल ढुलाई एवं बीमा) लागत में वृद्धि होगी और खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों द्वारा धन प्रेषण में गिरावट आएगी।
मुख्य आर्थिक सलाहकार ने कहा कि इन चारों मोर्चों का संयुक्त प्रभाव आर्थिक वृद्धि, मुद्रास्फीति, राजकोषीय संतुलन और बाह्य संतुलन पर पड़ने की आशंका है।
हालांकि सर्वेक्षण में शामिल 67.6 फीसदी सीईओ ने कहा कि भू-राजनीतिक अनिश्चितता और पश्चिम एशिया संकट के बावजूद वित्त वर्ष 2027 के लिए पूंजीगत व्यय संबंधी उनकी योजनाओं में फिलहाल कोई बदलाव नहीं होगा। इसे मुख्य तौर पर जबरदस्त आय की उम्मीद से बल मिलेगा। सर्वेक्षण में शामिल करीब 55.9 फीसदी सीईओ का मानना है कि आय में वृद्धि 10 फीसदी से अधिक वृद्धि होगी। करीब 44.1 फीसदी सीईओ का मानना है कि भू-राजनीतिक अनिश्चितता से रोजगार सृजन की संभावनाएं प्रभावित हो सकती है। वहीं आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) भी निकट भविष्य में चुनौती बन सकती है। करीब 55.9 फीसदी सीईओ का कहना है कि एआई का असर उनकी कंपनियों और पूरे उद्योग में रोजगार पर पड़ सकता है।
इसी बीच, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, डॉलर की मजबूती और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण विदेशी पोर्टफोलियो निवेश के बाहर जाने से रुपया दबाव में है। सोमवार को रुपया गिरकर 95.24 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। वित्त वर्ष 2027 के अंत तक रुपये को लेकर सीईओ का अनुमान 83 से 100 रुपये प्रति डॉलर के बीच है।
कमजोर रुपया आयात से जुड़े महंगाई के दबाव को और बढ़ा सकता है, जिससे ईंधन और अन्य वस्तुओं की कीमतें बढ़ सकती हैं। लगभग 94.1 फीसदी सीईओ का मानना है कि युद्ध का असर महंगाई के रूप में दिखेगा। अधिकांश सीईओ का यह भी मानना है कि युद्ध के कारण भारत में आने वाला प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) प्रभावित हो सकता है, क्योंकि इससे वैश्विक अनिश्चितता और वित्तीय बाजारों में उतार-चढ़ाव बढ़ता है।
पिछले एक महीने में सेंसेक्स 10 फीसदी से अधिक गिर चुका है, जिस पर भू-राजनीतिक तनाव और विदेशी निवेशकों द्वारा पूंजी निकासी का असर दिख रहा है। हालांकि आगे के रुख के बारे में सीईओ की राय बंटी हुई है। करीब 44.1 फीसदी सीईओ का मानना है कि सेंसेक्स 70,000 से 75,000 के बीच रहेगा जबकि उतने ही लोग मानते हैं कि यह 75,000 के ऊपर के स्तर पर बना रहेगा।
सीईओ ने वित्त वर्ष 2027 में वैश्विक व्यवस्था में बिखराव, पश्चिम एशिया संघर्ष का लंबा असर और आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं को अपनी सबसे बड़ी चिंताओं में शामिल किया है। एक सीईओ ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच दीर्घकालिक निवेश को बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती है जबकि दूसरे सीईओ ने वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता के महंगाई और आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ने वाले प्रभाव को एक महत्वपूर्ण जोखिम बताया है।
(साथ में ईशिता आयान दत्त, शिवानी शिंदे, शार्लीन डिसूजा, आतिरा वारियर, प्राची पिसाल, अभिषेक कुमार, रुचिका चित्रवंशी, गुलवीन औलख, पीरजादा अबरार, आशिष आर्यन, उदिशा श्रीवास्तव, शाइन जेकब, सुंदर सेतुरामन और हेमंत कुमार राउत)
हां: 61.8%
नहीं: 23.5%
कुछ नहीं कहा: 14.7%
10% से अधिक: 55.9%
10% से कम: 20.6%
कोई बदलाव नहीं / गिरावट: 23.5%
का प्रभाव
वृद्धि: 14.7%
कमी: 17.6%
अपरिवर्तित: 67.6%
हां: 94.1%
नहीं: 5.9%
कुछ नहीं कहा: 0.0%
कोई जवाब नहीं
70,000 से नीचे: 8.8%
70,000-75,000: 44.1%
75,000 से ऊपर: 44.1%
कुछ नहीं कहा: 2.9%
हां: 47.1%
नहीं: 32.4%
कुछ नहीं कहा: 20.6%
हां: 44.1%
नहीं: 38.2%
कुछ नहीं कहा: 17.6%
कोई जवाब नहीं
हां: 55.9%
नहीं: 38.2%
कुछ नहीं कहा: 5.9%
कुल नमूना: 34 सीईओ, स्रोत: बीएस सीओ सर्वेक्षण, संकलन: बीएस रिसर्च ब्यूरो