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हवाई रास्तों पर ‘युद्ध’ का साया: भारतीय विमानन कंपनियों ने अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में की 25% की भारी कटौती

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सिरियम के आंकड़ों के अनुसार भारतीय कंपनियों ने पिछले साल की तुलना में इस मई में अपनी साप्ताहिक अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में 1,034 की कमी की है। यह कटौती लगभग 24.59 प्रतिशत है

Last Updated- May 03, 2026 | 9:10 PM IST
ATF Price Stabilisation Fund
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

भारतीय विमानन कंपनियों ने मई में अपनी साप्ताहिक अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में 25 प्रतिशत की कटौती की है। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण हवाई क्षेत्र पर पाबंदियों और पाकिस्तान के  क्षेत्र में प्रतिबंधों के परिणामस्वरूप ऐसा किया गया है। इन पाबंदियों के कारण लागत बढ़ गई है और उड़ानों को लंबे रास्तों से जाना पड़ रहा है। भारत में परिचालन करने वाली विदेशी विमानन कंपनियां की ​निरंतरता बरकरार है और वे विस्तार भी कर रही हैं।

विमानन क्षेत्र का विश्लेषण करने वाली फर्म सिरियम के आंकड़ों के अनुसार भारतीय कंपनियों ने पिछले साल की तुलना में इस मई में अपनी साप्ताहिक अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में 1,034 की कमी की है। यह कटौती लगभग 24.59 प्रतिशत है। दूसरी तरफ, सिरियम के आंकड़ों के मुताबिक विदेशी विमानन कंपनियां के साप्ताहिक परिचालन में केवल 1.2 प्रतिशत की मामूली गिरावट आई है। इससे जाहिर होता है कि बाजार में उनकी स्थिति कहीं अधिक स्थिर है।

28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका ने ईरान पर सैन्य हमले किए, जिससे पश्चिम एशिया के कई हिस्सों में हवाई क्षेत्र व्यापक रूप से बंद हो गया। इस जंग ने भारतीय एयरलाइनों की मौजूदा चुनौती को और बढ़ा दिया है। पिछले साल मई में ऑपरेशन सिंदूर के बाद से पाकिस्तान का हवाई क्षेत्र भारतीय विमानन कंपनियों के लिए बंद पड़ा है। इससे वे दो प्रतिबंधित गलियारों के बीच फंस गई हैं। 

हवाई क्षेत्र बंद होने से विमानन कंपनियों को सबसे छोटे मार्ग के बजाय लंबे और अप्रत्यक्ष मार्गों का इस्तेमाल करने के लिए मजबूर होना पड़ता है। इससे उड़ान का समय और ईंधन की खपत बढ़ जाती है। यह असर अहम है क्योंकि भारत में किसी विमानन कंपनी की परिचालन लागत में सामान्य दिनों में विमान ईंधन (एटीएफ) की हिस्सेदारी लगभग 40 प्रतिशत रहती है।

भारतीय विमानन कंपनियों को अब अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए लंबे रास्ते अपनाने पड़ रहे हैं। पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण ईंधन की वै​श्विक कीमतों (और इसके परिणामस्वरूप एटीएफ के दामों) में खासा इजाफा हुआ है। ऐसे में भारतीय विमानन कंपनियों की कुल परिचालन लागत में एटीएफ की हिस्सेदारी बढ़कर 50 से 60 प्रतिशत हो गई है।

सिरियम के आंकड़ों के अनुसार जहां भारतीय विमानन कंपनियां अंतरराष्ट्रीय परिचालन से पीछे हट गई हैं, वहीं कई विदेशी विमानन कंपनियों ने भारत में अपने परिचालन का विस्तार किया है। चाइना ईस्टर्न ने 22 साप्ताहिक उड़ानें जोड़ी हैं, जबकि कैथे पैसिफिक ने पिछले साल मई की तुलना में इस साल मई में अपनी तय उड़ानों में 14 की वृद्धि की है।

अजरबैजान एयरलाइंस और स्विस ने भी 14-14 उड़ानें जोड़ी हैं। एएनए और बुद्धा एयर जैसी अन्य विमानन कंपनियों ने 8-8 उड़ानें, भूटान एयरलाइंस ने 7, इथियोपियन एयरलाइंस ने 6 और जापान एयरलाइंस ने पिछले साल मई की तुलना में चार उड़ानों का इजाफा किया है।

भारतीय विमानन कंपनियों में एयर इंडिया समूह उड़ानों में कमी करने में सबसे आगे रहा है। एयर इंडिया एक्सप्रेस के अंतरराष्ट्रीय परिचालन में साप्ताहिक उड़ानें घटकर 451 रह गई हैं, जबकि पहले ये 959 थीं। इस तरह इनमें 53 प्रतिशत की कमी आई है। एयर इंडिया ने अपनी साप्ताहिक उड़ानों में 288 उड़ानों को घटाकर उन्हें 881 कर दिया है।

स्पाइसजेट ने अपने अंतरराष्ट्रीय परिचालन में 60 प्रतिशत से अधिक की कटौती की है, जो पिछले साल 176 उड़ानों की तुलना में 70 साप्ताहिक उड़ानें संचालित कर रही है। बाजार की अग्रणी इंडिगो ने भी अपनी अंतरराष्ट्रीय अवाजाही में 150 उड़ानों की कटौती करके इन्हें प्रति सप्ताह 1,687 कर दिया है।

सिरियम के आंकड़ों के अनुसार अकासा एयर ही एकमात्र ऐसी देसी विमानन कंपनी है, जिसने अंतरराष्ट्रीय परिचालन में वृद्धि दर्ज की है। उसने साप्ताहिक उड़ानों को 64 से बढ़ाकर 82 कर दिया है, जो 28 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि है, क्योंकि वह छोटी दूरी वाले विदेशी मार्गों पर विस्तार कर रही है।

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First Published - May 3, 2026 | 9:10 PM IST

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