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LPG संकट का असर: कैंटीन में बायोगैस अपना रही कंपनियां, कैपजेमिनाई और इन्फोसिस ने शुरू की पहल

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आईटी सेवा प्रदाता कंपनी कैपजेमिनाई ने भारत में अपने सभी कार्यालयों की कैंटीन रसोई को (एलपीजी) से प्राकृतिक ऊर्जा पर आधारित बायो-सीएनजी (बायोगैस) में परिवर्तित कर दिया है

Last Updated- March 22, 2026 | 10:20 PM IST
Biogas
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) की कमी से कैंटीन सेवाओं पर असर के बीच कई कंपनियों के पर्यावरण, सामाजिक और संचालन (ईएसजी) प्रयासों के तहत शुरू की गई पहल अब मौजूदा संकट से उबरने में मदद पहुंचा रही हैं। पेरिस की सूचना-प्रौद्योगिकी (आईटी) सेवा प्रदाता कंपनी कैपजेमिनाई ने भारत में अपने सभी कार्यालयों की कैंटीन रसोई को (एलपीजी) से प्राकृतिक ऊर्जा पर आधारित बायो-सीएनजी (बायोगैस) में परिवर्तित कर दिया है। यह कदम 2024 में सतत संचालन को बढ़ावा देने के लिए लागू की गई एक पहल का हिस्सा है।

बायो-सीएनजी एक नवीकरणीय ईंधन है जो जैविक कचरे से अवायवीय पाचन के माध्यम से उत्पादित होता है। इसमें जैव-अपघटनीय कचरे को मीथेन युक्त गैस में परिवर्तित किया जाता है जिसे शुद्ध कर संपीड़ित किया जाता है और व्यावसायिक रसोई में उपयोग किया जाता है।

कंपनी के प्रवक्ता ने कहा, ‘कैपजेमिनाई अपने स्वामित्व वाले बेंगलुरु ईपीआईपी परिसर में 100 प्रतिशत सतत रूप से प्राप्त बायोगैस का उपयोग करती है जहां सभी कैंटीन पूरी तरह बायोगैस पर चलती हैं और किसी अन्य ईंधन का उपयोग नहीं किया जाता है।’

भारत के 13 शहरों में स्थित कैपजेमिनाई के कार्यालयों में मुख्य रूप से बिजली आधारित खाना पकाने की व्यवस्था है जिसके लिए आवश्यक रसोई अवसंरचना उपलब्ध है। यह पूरी तरह 100 प्रतिशत नवीकरणीय ऊर्जा से संचालित होता है। कंपनी के आठ स्वामित्व वाले कार्यालयों में लगे 11.7 मेगावॉट क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्रों से इसे और मदद मिलती है।

भारत की दूसरी सबसे बड़ी आईटी सेवा कंपनी इन्फोसिस भी अपने परिसरों में बायोगैस संयंत्रों और जैविक अपशिष्ट परिवर्तकों के माध्यम से 100 प्रतिशत जैविक अपशिष्ट के उपचार की क्षमता विकसित कर रही है। कंपनी की वित्त वर्ष 2025 की ईएसजी रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया गया है। समाचार लिखे जाने तक कंपनी को भेजे गए ईमेल का कोई जवाब नहीं मिला।

इस मामले से वाकिफ सूत्रों ने बताया कि प्रमुख परिसरों में बायोगैस के उपयोग से एलपीजी की खपत का लगभग 12 से 15 प्रतिशत हिस्सा पूरा किया जा रहा है।

इन्फोसिस में बेंगलूरु, हैदराबाद, पुणे और मैसूरु सहित आठ परिसरों में 9 टन से अधिक खाद्य अपशिष्ट को बायोगैस में परिवर्तित किया जाता है। चेन्नई में खाद्य अपशिष्ट को महिंद्रा वर्ल्ड सिटी स्थित एक साझा बायोगैस संयंत्र में भेजा जाता है जिससे बड़े पैमाने पर कुशल अपशिष्ट प्रबंधन संभव हो पाता है। भारत में बायोगैस को पिछले साल तब बड़ा बढ़ावा मिला, जब हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (एचपीसीएल) ने 23.1 करोड़ डॉलर के निवेश से अगले 2-3 वर्षों में 24 संपीड़ित बायोगैस संयंत्र विकसित करने की घोषणा की। एचपीसीएल के प्रत्येक नियोजित संयंत्र से प्रतिदिन 10 से 15 टन संपीड़ित बायोगैस का उत्पादन होने की उम्मीद है।

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First Published - March 22, 2026 | 10:20 PM IST

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