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पश्चिम एशिया संकट की चौतरफा मार: भारतीय कंपनियों की बढ़ी लागत, महंगे होंगे ऑटो, फार्मा और राशन

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पश्चिम एशिया संकट के कारण बढ़ती लागत और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान से निपटने के लिए भारतीय कंपनियां उत्पादों के दाम बढ़ाने के साथ परिचालन मॉडल बदल रही हैं

Last Updated- May 25, 2026 | 11:01 PM IST
crisis impact
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू हुए 80 दिन से अधिक हो चुके हैं और इसका असर अब भारतीय उद्योग जगत की लागत पर भी दिखने लगा है। विनिर्माताओं और फार्मा से लेकर उपभोक्ता सामान और रियल एस्टेट क्षेत्र तक कंपनी जगत माल ढुलाई और कच्चे माल की लागत में वृद्धि, शिपमेंट में देरी, आपूर्ति श्रृंखला की अनिश्चितता और मांग में नरमी के शुरुआती संकेतों से जूझ रहा है। संकट को देखते हुए कच्चे माल के स्रोत बढ़ा रही हैं और बढ़ी लागत का भार ग्राहकों पर डालने के लिए उत्पादों के दाम बढ़ा रही हैं। साथ ही अपने परिचालन मॉडल में भी बदलाव ला रही हैं।

हर क्षेत्र में बढ़ रही लागत

वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही के नतीजों के बाद बिज़नेस स्टैंडर्ड के साथ हालिया बातचीत के दौरान टाटा स्टील के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी टीवी नरेंद्रन ने कहा था कि पहले चूना पत्थर की जरूरत का लगभग 70 से 80 फीसदी की आपूर्ति पश्चिम एशिया से होती थी और स्टील बनाने में इसका फ्लक्स के रूप में उपयोग किया जाता है। लेकिन पश्चिम एशिया में व्यवधान को देखते हुए कंपनी अब इसे वियतनाम तथा अन्य आसियान देशों से मंगा रही है।

कच्चे माल का स्रोत चिंता का एक हिस्सा भर है। माल ढुलाई, बीमा और प्रोपेन की लागत भी बढ़ गई है जिससे टाटा स्टील की कुल लागत में लगभग 10 फीसदी की वृद्धि हुई है। नरेंद्रन ने कहा कि उत्पादन में व्यवधान का जोखिम कम है लेकिन लागत बढ़ती जा रही है। बढ़ती लागत का दबाव अब कंपनियों की बोर्ड बैठक की चर्चा में भी दिख रहा है और कंपनियों को अपने उत्पादों के दाम बढ़ाने पड़ रहे हैं। 

बढ़ने लगे उत्पादों के दाम

आयशर मोटर्स और बजाज ऑटो ने कच्चे माल की बढ़ती लागत के बीच कीमतों में वृद्धि के माध्यम से मार्जिन पर इसके प्रभाव को आंशिक रूप से कम करने का प्रयास किया है।

आयशर मोटर्स के प्रबंध निदेशक बी गोविंदराजन ने कहा, ‘जिसों के दाम बढ़ने से उत्पादन लागत में लगभग 3 से 3.5 फीसदी का इजाफा हुआ है। ऐसे में हमने रॉयल एनफील्ड के दाम में 1.75 फीसदी और वा​णि​ज्यिक वाहनों के दाम में करीब 2 फीसदी की बढ़ोतरी कर इसकी भरपाई की है। दोनों कंपनियां लागत कम करने के अन्य उपाय और वैकल्पिक खरीद रणनीतियों पर भी काम कर रही है ताकि इन बाधाओं को कम किया जा सके।’ बजाज ऑटो ने 1 अप्रैल से अपने उत्पादों के दाम बढ़ाए हैं। 

बजाज ऑटो के कार्यकारी निदेशक राकेश शर्मा ने भी बढ़ती लागत के दबाव पर चिंता जताई। उन्होंने कहा, ‘धातुओं की कीमतें बढ़ने से लागत में पहले ही लगभग 3 से 5 फीसदी का इजाफा हो चुका है।’

इस बीच मांग में नरमी के संकेत भी दिखने लगे हैं। शर्मा ने कहा कि अनिश्चितता का असर  मोटरसाइकिल की मांग पर दिखने लगा है। वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में उद्योग की वृद्धि 20 फीसदी से ज्यादा घटकर अप्रैल में अपेक्षित 7 से 9 फीसदी रह गई। हालांकि उन्होंने कहा कि प्रीमियम मोटरसाइकल सेगमेंट लचीला बना हुआ है। 

टाटा मोटर्स के प्रबंध निदेशक और सीईओ गिरीश वाघ ने कहा कि कंपनी ने मांग की गति को बनाए रखने के लिए ग्राहकों पर बढ़ी लागत का बोझ पूरी तरह नहीं डाला है। कंपनी ने वित्त वर्ष 2027 की शुरुआत में 2 फीसदी मूल्य वृद्धि की थी और आंतरिक स्तर पर लागत घटाने के उपाय कर रही है।

हालांकि कुछ विनिर्माताओं ने कहा कि संकट से पहले उनके पास कच्चे माल का भरपूर स्टॉक था जिसकी वजह से वे फिलहाल सुरक्षित हैं।

जॉनसन लिफ्ट्स के निदेशक योहन के जॉन ने कहा, ‘कच्चे माल की कीमतें बढ़ रही हैं, आपूर्तिकर्ता हमें उच्च कीमतों पर आपूर्ति लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं। कुछ आपूर्तिकर्ता उच्च दरों पर पुन: बातचीत के लिए आपूर्ति रोक भी रहे हैं।’ उन्होंने कहा, ‘तांबा और स्टील के बढ़ते दाम चिंता का सबब है।’फार्मा उद्योग के अधिकारियों ने कहा कि पश्चिम एशिया और होर्मुज व्यवधान से निकट भविष्य में दवा क्षेत्र पर पड़ने की आशंका नहीं है। दवा बनाने में इस्तेमाल होने वाले महत्त्वपूर्ण सॉल्वेंट और अन्य कच्चे माल की आपूर्ति लगातार बनी है। मगर चीन से आने वाले एपीआई की कीमतों में वृद्धि हुई है।

संकट शुरू होने के बाद से चीन से आने वाले पैरासिटामॉल सहित प्रमुख एपीआई की कीमतें  बढ़ी हैं। उदाहरण के लिए पैरासिटामॉल की कीमतें हाल के महीनों में लगभग दोगुनी हो गई हैं जबकि एजिथ्रोमाइसिन एपीआई की कीमतें भी बढ़ी हैं। उद्योग के एक दिग्गज ने कहा कि कुछ श्रेणियों में 30 से 40 फीसदी की मूल्य वृद्धि देखी गई है। भारत के पास लगभग दो महीने का एपीआई स्टॉक है।

उद्योग प्रतिनिधियों ने सॉल्वेंट आपूर्ति को लेकर सरकार के साथ चिंता भी जताई है। तिमाही नतीजों के बाद आईटीसी ने खाद्य तेल, साबुन, नूडल्स जैसे उत्पादों के दाम बढ़ाई हैं।  रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने आगाह किया है कि अगगर यह संघर्ष लंबे समय तक चला तो सभी क्षेत्रों की कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ सकता है।

कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, माल ढुलाई लागत, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और कमजोर रुपये जैसी चुनौतियों से जूझ रही भारतीय कंपनियों के परिचालन मुनाफे में इस वित्त वर्ष में लगभग 200 आधार अंक की गिरावट आ सकती है। क्रिसिल ने 34 क्षेत्रों को कवर करते हुए दबाव परीक्षण (स्ट्रेस टेस्ट) में कहा 22 क्षेत्रों में परिचालन लाभप्रदता में 10 फीसदी से अधिक की गिरावट देखी जा सकती है। हालांकि मजबूत बैलेंस शीट, स्थिर घरेलू मांग और सरकार के नेतृत्व वाले पूंजीगत व्यय से व्यापक क्रेडिट-गुणवत्ता जोखिमों को नियंत्रित करने में मदद मिलनी चाहिए। 

एजेंसी का अनुमान है कि 8 क्षेत्रों में व्यापक ऋण संकट देखने को मिलेगा, जिनमें से सिरेमिक, विमानन , वाहन कलपुर्जा, विशेषीकृत रसायन, पॉलिएस्टर टेक्सटाइल और फ्लेक्सिबल पैकेजिंग प्रमुख हैं क्योंकि इनकी कच्चे मल की लागत अधिक है और मूल्य निर्धारण में लचीलापन सीमित है।

परिचालन मॉडल पर पुनः विचार

पैराडाइम रियल्टी की सह-संस्थापक और मुख्य सलाहकार सृष्टि एस आनंद ने कहा कि लागत में अप्रत्याशित वृद्धि से खुद को बचाने के लिए कंपनी ने अपनी खरीद रणनीति में रणनीतिक बदलाव किया है। आनंद ने कहा, ‘हमने कल तक अपने सभी तैयार ऑर्डर लॉक कर दिए हैं ताकि ​स्थिति बिगड़ने पर आपूर्ति श्रृंखला में संभावित बाधाओं से खुद को बचाया जा सके। कीमतों में अतार्किक वृद्धि देखी जा सकती है और इसलिए इस स्तर पर निश्चितता के साथ ऑर्डर सुरक्षित करना समय और लागत दोनों की सुरक्षा के लिए महत्त्वपूर्ण कदम है।’ 

वृद्धि के मोर्चे पर पैराडाइम लॉन्च कैलेंडर में लचीलापन बनाए हुए है और बदलते वृ​हद आर्थिक परि​स्थितियों के साथ तालमेल बिठाने के लिए कुछ अधिग्रहणों एवं अन्य सौदों के लिए नए सिरे से बातचीत कर रही है। सेठ रियल्टी भी लागत और सोर्सिंग रणनीतियों पर नए सिरे से काम कर रही है। कंपनी के चेयरमैन एवं एमडी चिंतन सेठ ने कहा कि ईंधन और एलपीजी की बढ़ती कीमतों के अलावा स्टील, एल्युमीनियम और टाइल्स की लागत बढ़ने से परियोजना की कुल लागत में 10 से 15 फीसदी तक की बढ़ोतरी हो सकती है।

सेठ ने कहा, ‘हम लागत के प्रभाव को मुनाफा मार्जिन बढ़ाकर कम करने और उसे उचित स्तर पर लाने के लिए काम कर रहे हैं।’ कंपनी डिजाइन भी बदल रही है और अधिक आसानी से उपलब्ध एवं स्थानीय सोर्सिंग वाली सामग्रियों के इस्तेमाल की योजना बना रही है।

पेट्रोस स्टोन एलएलपी के निदेशक (अंतरराष्ट्रीय कारोबार) ऋषभ जैन ने कहा कि उठाए गए प्रमुख कदमों में से एक समय के हिसाब से इन्वेंट्री मॉडल को अपनाना था। ऐसा खास तौर पर प्रीफैब्रिकेटेड काउंटरटॉप्स और क्वार्ट्ज स्लैब के लिए किया गया जिससे पूंजी व्यवधान को कम करने और लचीलेपन को बेहतर करने में मदद मिली।

कंपनी ने समुद्री मालवहन दरों में तेज वृद्धि से निपटने के लिए लॉजिस्टिक में विविधता लाई है और क्षेत्रीय शिपिंग साझेदारी को मजबूत किया है। कंपनी ने अनुबंध की शर्तों को भी संशोधित किया है और माल ढुलाई जोखिम को कम करने और डिलिवरी की स्थिरता में सुधार के लिए कुवैत और कतर जैसे बाजारों में निर्माण साझेदारी विकसित की है।

ईंधन लागत में कटौती

फार्मा कंपनी स्टार बायो फार्मा ने दैनिक आवागमन के लिए व्यक्तिगत वाहनों के उपयोग को हतोत्साहित करने के लिए अपने कारखाने के कर्मचारियों के लिए बस सुविधा शुरू की है।

स्टार बायो फार्मा के निदेशक प्रमोद चंद्रा ने कहा, ‘यह पहल हमें कार्बन उत्सर्जन कम करने, ईंधन बचाने और अधिक टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल कार्यस्थल को बढ़ावा देने में मदद कर रही है।’

स्टाफिंग फर्म एडको इंडिया में मानव संसाधन की उपाध्यक्ष, करिश्मा पारीख ने कहा कि कंपनी कम लागत वाले विकल्पों पर ध्यान केंद्रित करते हुए केवल आवश्यक व्यावसायिक यात्रा को प्रोत्साहित कर रही है। कंपनी ने महामारी के दौरान शुरू किए गए अपने हाइब्रिड कार्य मॉडल को भी जारी रखा है। इसमें तीन दिन कार्यालय में और दो दिन घर से काम करने की सुविधा शामिल है।

एआई प्लेटफॉर्म वेरलूडॉटआईओ के मुख्य वित्तीय अधिकारी अंकित सरावगी ने कहा कि कंपनी निकट भविष्य में पूरी तरह से घर से काम करने (वर्क फ्रॉम होम) की व्यवस्था की ओर बढ़ रही है। कंपनी ने जून से कार्यालय के जरिये काम करने की अपनी पिछली योजनाओं को स्थगित कर दिया है।

सज्जन जिंदल के नेतृत्व वाली कंपनी जेएसडब्ल्यू स्टील ने हाल में कहा था कि वह यात्रा को नियंत्रित करने के लिए वर्चुअल तरीके से बैठकें करने की दिशा में काम कर रही है।

ट्रैवल के सह-संस्थापक और जिंदल समूह के एमडी, साहिल जिंदल ने कहा कि ईंधन की बढ़ती कीमतों ने यात्रा उद्योग में परिवहन लागत बढ़ा दी है। इससे कंपनियों को परिचालन दक्षता बनाए रखने के लिए उपाय करने पड़ रहे हैं।

दीर्घकालिक योजना

वैश्विक उथल-पुथल के गहराने के साथ ही कंपनियां ​स्थिति से निपटने के लिए दीर्घकालिक मजबूती के लिए योजनाएं बनाने लगी हैं।

महिंद्रा समूह के प्रबंध निदेशक और सीईओ अनीश शाह ने कहा कि वै​श्विक स्तर पर बार-बार भू-राजनीतिक उथल-पुथल के मद्देनजर कंपनी ने अपनी आपूर्ति श्रृंखला में जो​खिम को पहचानने के लिए पहल की है।

शाह ने कहा कि एमऐंडएम ने 1 लाख कलपुर्जे और 40 जिंसों का विश्लेषण किया, भू-राजनीतिक, कच्चे माल, लॉजिस्टिक और एक आपूर्तिकर्ता पर निर्भरता में उच्च-जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान की।

दूरसंचार कंपनियां और टावर ऑपरेटर भी ईंधन के प्रति जोखिम को कम करने के लिए संचालन पर फिर से काम कर रहे हैं। कंपनियां डीजल पर निर्भरता कम करने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा और बैटरी से चलने वाली प्रणालियों के उपयोग को बढ़ा रही हैं।

भारती एंटरप्राइजेज के मुख्य वित्तीय अधिकारी (सीएफओ) सोमेन रॉय ने कहा कि समूह लागत दक्षता में सुधार के लिए उच्च क्षमता वाली बैटरियों और नवीकरणीय ऊर्जा की ओर बढ़ रहा है।

वोडाफोन आइडिया के मुख्य वित्त अ​धिकारी तेजस मेहता ने कहा कि कंपनी अपने नेटवर्क के विद्युतीकरण में तेजी ला रही है और डीजल पर निर्भरता कम कर रही है। मई में दूरसंचार ऑपरेटर ने एमटीके क्वांटम ग्रीन एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड में 26 फीसदी हिस्सेदारी का अधिग्रहण किया जो तमिलनाडु में एक कैप्टिव सौर ऊर्जा संयंत्र विकसित कर रहा है।

इस बीच, इंडस टावर्स ने मार्च 2026 तक सौर-ऊर्जा पहुंच वाली साइटों की संख्या को 42,400 तक बढ़ा दिया जो पिछली तिमाही से लगभग 2,500 अधिक है। कंपनी के तिमाही नतीजों के दौरान इंंडस टावर्स के प्रबंध निदेशक और सीईओ प्रचुर साह ने कहा, ‘वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में हमारे साइटों पर डीजल की खपत साल-दर-साल लगभग 7 फीसदी कम हो गई।’

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First Published - May 25, 2026 | 11:01 PM IST

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