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ऑटो सेक्टर पर संकट के बादल: एक्मा ने भारी उद्योग मंत्रालय से मांगी मदद, लाल सागर विवाद ने बढ़ाई टेंशन

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लाल सागर संकट और गैस की कमी से ऑटो पुर्जा उद्योग संकट में है। एक्मा ने लॉजिस्टिक लागत और ईंधन आपूर्ति के लिए सरकार से मदद मांगी है

Last Updated- March 10, 2026 | 10:49 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

देश के वाहन पुर्जा उद्योग ने भारी उद्योग मंत्रालय से मदद की गुहार की है। उद्योग ने चेताया है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष और लाल सागर में जहाजों के मार्ग में बाधाओं के कारण निर्यात की लॉजिस्टिक लागत बढ़ रही है, खेप भेजने में में देरी हो रही है तथा महत्त्वपूर्ण कच्चे माल का आयात बाधित हो रहा है। इसके साथ ही विनिर्माण के लिए जरूरी तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) और पाइप्ड नैचुरल गैस (पीएनजी) की उपलब्धता को लेकर भी चिंताएं बढ़ रही हैं।

9 मार्च को भारी उद्योग मंत्रालय के सचिव कामरान रिजवी को लिखे पत्र में ऑटोमोटिव कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एक्मा) के अध्यक्ष विक्रमपति सिंघानिया ने कहा कि कई सदस्य कंपनियों ने बढ़ते परिचालन और लागत के दबावों की सूचना दी है, जिससे निर्यात के उत्पादन से जुड़े प्रमुख इनपुट का निर्यात और आयात दोनों ही प्रभावित हो रहे हैं।

सिंघानिया ने कहा कि लाल सागर में जहाजों के मार्ग में बाधाओं के कारण जहाजों के मार्ग परिवर्तन, बंदरगाहों पर भीड़भाड़ और माल ढुलाई की बढ़ती लागत की वजह से यूरोप, अमेरिका और पश्चिम एशिया के कुछ हिस्सों के प्रमुख बाजारों में खेपें पहले से ही प्रभावित हो रहीं हैं।

उद्योग ने बताया है कि सबसे ज्यादा तात्कालिक चुनौतियों में से एक लॉजिस्टिक लागत में तेज वृद्धि की है। सिंघानिया के अनुसार केप ऑफ गुड होप के आसपास जहाजों के मार्ग परिवर्तन, माल ढुलाई की अधिक दरों, कंटेनरों की कमी और बढ़े हुए बीमा प्रीमियम के कारण निर्यात के लॉजिस्टिक खर्च में 20 से 40 प्रतिशत तक का इजाफा हो चुका है।

उद्योग खेपों के आवागमन में खासी देरी दर्ज कर रहा है। उन्होंने कहा, ‘निर्यात का समय दो से चार सप्ताह या उससे अधिक बढ़ चुका है। इससे डिलिवरी में देरी हो रही है, ऑर्डर स्थगित हो रहे हैं तथा गोदामों और बंदरगाहों पर स्टॉक जमा हो रहा है।’

देश से वाहन पुर्जों का निर्यात पिछले साल के मुकाबले 9.3 प्रतिशत बढ़कर वित्त वर्ष 26 की पहली छमाही के दौरान लगभग 1.05 लाख करोड़ रुपये हो गया। अलबत्ता आयात इसी अवधि के दौरान पिछले साल के मुकाबले लगभग 12.5 प्रतिशत की तेज गति से बढ़कर करीब 1.07 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया।

पश्चिम एशिया में जारी लड़ाई के कारण लॉजिस्टिक संबंधी चुनौतियों के अलावा सिंघानिया ने एलपीजी और पीएनजी जैसे औद्योगिक ईंधन की उपलब्धता के बारे में भी चिंता जताई। इनका इस्तेमाल वाहन आपूर्ति श्रृंखला में फाउंड्री, फोर्जिंग और मशीनिंग के कार्यों में व्यापक रूप से किया जाता है। एक्मा की सदस्य कंपनियों ने औद्योगिक उपयोग के लिए एलपीजी और पीएनजी की उपलब्धता की चिंताओं पर प्रकाश डाला है।

सिंघानिया ने चेताया, ‘एलपीजी/पीएनजी की उपलब्धता में किसी भी तरह की बाधा या अनिश्चितता से वाहनों के अहम पुर्जों के उत्पादन के निर्धारित समय पर असर पड़ सकता है। खास तौर पर उन एमएसएमई इकाइयों के मामले में, जिनके पास कम समय में वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत पर काम करने की गुंजाइश सीमित है।’ उन्होंने यह भी कहा कि अलग-अलग राज्य इन गैसों की आपूर्ति के लिए अलग-अलग नियामकीय मानदंड लागू कर रहे हैं।

सिंघानिया ने यह भी कहा कि रसायनों, सिंथेटिक रबर, एल्युमीनियम स्क्रैप और पेट्रोकेमिकल आधारित कच्चे माल जैसे पॉलिप्रोपाइलीन के अलावा प्रमुख कच्चे माल के आयात में भी शिपिंग की बाधाएं आ रही हैं जिससे ‘देरी और लागत में वृद्धि हो रही है। इस स्थिति के मद्देनजर एक्मा ने सरकार से ‘असाधारण’ वैश्विक हालात के दौरान उद्योग की मदद के लिए उपायों पर तत्काल विचार करने का आग्रह किया है।

प्रमुख सुझावों के तहत एसोसिएशन ने औद्योगिक उपयोगकर्ताओं, विशेष रूप से एमएसएमई फाउंड्री और फोर्जिंग इकाइयों के लिए एलपीजी और पीएनजी की निरंतर उपलब्धता अथवा कंपनियों को वैकल्पिक ईंधन की दिशा में जाने में सक्षम बनाने के लिए ‘बदलाव की उचित अवधि’ के संबंध में आश्वासन मांगा है।

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First Published - March 10, 2026 | 10:44 PM IST

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