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सभी विमानों में बदले जाएंगे ऑल्टीमीटर, हवाई अड्डों के पास स्थापित होगा 5G बेस स्टेशन: DGCA

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रेडियो ऑल्टीमीटर विमान और जमीन के बीच की दूरी को मापता है ताकि विमानों को सुरक्षित टेकऑफ, उड़ान और लैंडिंग कराया जा सके।

Last Updated- December 27, 2023 | 11:25 PM IST
air passenger

नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) सभी विमानन कंपनियों के लिए रेडियो ऑल्टीमीटर (आरए) अनिवार्य तौर पर बदलने का निर्देश जारी करने जा रहा है। विभिन्न सरकारी अधिकारियों ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया कि ऐसा इसलिए कहा जाएगा ताकि देश में हवाई अड्डों के समीप 5जी बेस स्टेशन स्थापित किए जा सकें।

नवंबर 2022 में दूरसंचार विभाग ने प्रमुख दूरसंचार ऑपरेटरों- भारती एयरटेल, रिलायंस जियो और वोडाफोन आइडिया- को निर्देश दिया था कि भारतीय हवाई अड्डों के समीप विशेष क्षेत्रों में सी-बैंड यानी 3,300 मेगाहर्ट्ज से 3,670 मेगाहर्ट्ज बैंड की रेडियो तरंग वाले इलाके में 5जी बेस स्टेशन स्थापित न करें। इन विशेष क्षेत्रों को रनवे के दोनों छोड़ से 2,100 मीटर और रनवे के मध्य से 910 मीटर के दायरे में रखा गया था।

ऐसा इसलिए किया गया है ताकि 5जी रेडियो तरंगों के कारण विमानों के रेडियो ऑल्टीमीटर के सिग्नल प्रभावित न होने पाए। रेडियो ऑल्टीमीटर विमान और जमीन के बीच की दूरी को मापता है ताकि विमानों को सुरक्षित टेकऑफ, उड़ान और लैंडिंग कराया जा सके।

नवंबर 2022 में दूरसंचार विभाग ने आदेश दिया कि उपरोक्त क्षेत्र के 540 मीटर परिधि में भी 5जी बेस स्टेशनों को भी 3,300 से 3,670 मेगाहर्ट्ज के दायरे में अपनी शक्ति को 58 डेसिबल मिलीवॉट (डीबीएम) तक सीमित रखना होगा। सरकारी अधिकारियों ने कहा कि दूरसंचार विभाग ने ऑपरेटरों से कहा था कि यह प्रतिबंध सभी विमानों में रेडियो ऑल्टीमीटर को बदले जाने तक लागू रहेगा।

अधिकारियों ने बताया, एक महीने बाद यानी दिसंबर 2022 में डीजीसीए ने सभी विमानन कंपनियों को निर्देश दिया कि वे रेडियो ऑल्टीमीटर बदलने के लिए विनिर्माताओं के साथ सहयोग करें। उसके बाद विमान बनाने वाली प्रमुख कंपनियों बोइंग और एयरबस के साथ कई दौर की बैठकें हुईं। इस बाबत जानकारी के लिए बोइंग, एयरबस, थेल्स, दूरसंचार विभाग और नागरिक उड्डयन मंत्रालय को भेजे गए ईमेल का कोई जवाब नहीं आया।

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First Published - December 27, 2023 | 11:25 PM IST

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