India Air Travel: मार्च 2026 में देश के अंदर हवाई सफर की रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ गई। इसकी सबसे बड़ी वजह रही महंगे टिकट और दुनिया भर में चल रही अनिश्चितता। अप्रैल के शुरुआती आंकड़े भी यही बता रहे हैं कि अभी ये कमजोरी बनी रह सकती है। मार्च में घरेलू यात्रियों की संख्या करीब 1.44 करोड़ रही, जो पिछले साल के मुकाबले 1 प्रतिशत कम है। महीने के दूसरे हिस्से में एयरलाइंस ने फ्यूल सरचार्ज लगा दिया, जिससे टिकट महंगे हो गए और लोगों ने कम सफर किया। अप्रैल में भी रोजाना के आंकड़ों में करीब 2 प्रतिशत की गिरावट दिख रही है। पूरे साल 2025-26 में भी यात्री संख्या में सिर्फ हल्की-सी बढ़त यानी करीब 1.3 प्रतिशत ही हुई।
एयरलाइन कंपनियों की बात करें तो IndiGo लगातार आगे निकलती जा रही है। उसका मार्केट शेयर बढ़कर 63.3 प्रतिशत हो गया है। Akasa Air ने भी थोड़ा सुधार दिखाया और उसका हिस्सा 5.4 प्रतिशत तक पहुंच गया। वहीं Air India ग्रुप का हिस्सा घटकर 26.2 प्रतिशत रह गया है। SpiceJet भी थोड़ा पीछे खिसककर 3.8 प्रतिशत पर आ गई है।
मार्च में कम यात्रियों का असर फ्लाइट्स की सीट भरने पर भी पड़ा। SpiceJet की सीट भरने की दर सबसे ज्यादा गिरी और 82.8 प्रतिशत पर आ गई। IndiGo और Air India की भी यही हालत रही, जहां उनका लोड फैक्टर 83-82 प्रतिशत के आसपास रहा। Akasa Air का लोड फैक्टर सबसे ज्यादा 90.5 प्रतिशत रहा, लेकिन उसमें भी गिरावट आई।
अच्छी बात ये रही कि फ्लाइट्स टाइम पर चलने लगीं। IndiGo सबसे आगे रही, उसके करीब 89 प्रतिशत फ्लाइट्स समय पर रहीं। Akasa भी ठीक रही, जबकि Air India ने भी सुधार किया। लेकिन SpiceJet इस मामले में सबसे पीछे रही।
मार्च में फ्लाइट कैंसिलेशन भी बढ़े हैं। IndiGo में कैंसिलेशन बढ़कर 0.27 प्रतिशत हो गया। SpiceJet की हालत सबसे खराब रही- करीब 1.92 प्रतिशत फ्लाइट्स कैंसिल हुईं। Air India में ये 0.41 प्रतिशत रहा, जबकि Akasa Air सबसे बेहतर रही जहां कैंसिलेशन बहुत कम यानी 0.07 प्रतिशत रहा।
एक राहत की बात ये रही कि मई 2026 में घरेलू उड़ानों के लिए एयर टर्बाइन फ्यूल यानी ATF की कीमत नहीं बढ़ाई गई। दिल्ली में यह 104.9 रुपये प्रति लीटर पर ही रखी गई है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए ATF थोड़ा महंगा हुआ है, लेकिन घरेलू कीमत स्थिर रहने से एयरलाइंस को थोड़ी राहत मिली है।
एमके ब्रोकरेज की रिपोर्ट के मुताबिक, असल समस्या अभी भी ईंधन की लागत है। अब एयरलाइंस के कुल खर्च में करीब 55-60 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ ईंधन का हो गया है, जबकि पहले यह 30-40 प्रतिशत होता था। इंडस्ट्री ने चेतावनी दी है कि अगर लागत ऐसे ही बढ़ती रही, तो कुछ फ्लाइट्स बंद भी करनी पड़ सकती हैं। Air India ने भी इशारा किया है कि जून-जुलाई में कुछ उड़ानें कम की जा सकती हैं।