देश के बैंकों में वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान धोखाधड़ी (फ्रॉड) के मामलों की संख्या तो घट गई, लेकिन इन मामलों में शामिल रकम पिछले तीन साल के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई। इसकी मुख्य वजह कर्ज और एडवांस से जुड़े बड़े धोखाधड़ी मामले रहे, जिनका सबसे ज्यादा असर सरकारी बैंकों पर पड़ा।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में बैंकों ने ₹48,021 करोड़ की धोखाधड़ी दर्ज की, जो एक साल पहले के ₹32,803 करोड़ की तुलना में 46.4 फीसदी अधिक है। यह रकम वित्त वर्ष 2023-24 में दर्ज ₹11,013 करोड़ की तुलना में चार गुना से भी ज्यादा है।
हालांकि, धोखाधड़ी के मामलों की संख्या में बड़ी गिरावट आई। वित्त वर्ष 2025-26 में 10,114 मामले दर्ज हुए, जबकि पिछले वर्ष यह संख्या 23,722 थी। यानी मामलों की संख्या में करीब 57 फीसदी की कमी आई। वित्त वर्ष 2023-24 के 35,800 मामलों की तुलना में यह गिरावट 72 फीसदी के करीब है।
तीन साल के आंकड़े दिखाते हैं कि जहां धोखाधड़ी के मामलों की संख्या लगातार घटी है, वहीं इनमें शामिल रकम तेजी से बढ़ी है। वित्त वर्ष 2023-24 से 2025-26 के बीच मामलों की संख्या दो-तिहाई से ज्यादा घटी, लेकिन रकम 336 फीसदी बढ़ गई।
आरबीआई ने कहा कि सरकारी और निजी दोनों बैंकों में धोखाधड़ी के मामलों की संख्या घटी है, लेकिन इनसे जुड़ी रकम बढ़ती गई है। पहले जहां कार्ड, इंटरनेट बैंकिंग और डिजिटल भुगतान से जुड़े मामले सबसे ज्यादा होते थे, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में कर्ज और एडवांस से जुड़े मामले सबसे बड़ी कैटेगरी बनकर उभरे। कुल धोखाधड़ी राशि में इनकी हिस्सेदारी 85.5 फीसदी रही।
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वित्त वर्ष 2025-26 में सरकारी बैंकों को धोखाधड़ी के कारण ₹35,709 करोड़ का नुकसान हुआ। यह पिछले साल के ₹23,617 करोड़ की तुलना में 51 फीसदी अधिक है। कुल धोखाधड़ी राशि में सरकारी बैंकों की हिस्सेदारी बढ़कर 74.5 फीसदी हो गई। हालांकि, सरकारी बैंकों में दर्ज मामलों की संख्या घटकर 5,418 रह गई, जो एक साल पहले 6,916 थी।
निजी बैंकों में धोखाधड़ी की रकम बढ़कर ₹11,399 करोड़ हो गई, जो पिछले साल के ₹8,927 करोड़ से 27.7 फीसदी ज्यादा है। हालांकि कुल धोखाधड़ी राशि में उनकी हिस्सेदारी 23.7 फीसदी रही, जबकि कुल मामलों में उनका हिस्सा 39.1 फीसदी था।
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कर्ज और एडवांस से जुड़े धोखाधड़ी मामलों की रकम बढ़कर ₹40,774 करोड़ पहुंच गई। यह पिछले साल की तुलना में 34 फीसदी और वित्त वर्ष 2023-24 की तुलना में 357 फीसदी अधिक है। कुल धोखाधड़ी राशि में इनकी हिस्सेदारी करीब 85 फीसदी रही।
ऐसे मामलों की संख्या भी बढ़कर 8,640 हो गई, जो पिछले साल 7,924 थी।
कार्ड, इंटरनेट बैंकिंग और डिजिटल भुगतान से जुड़े धोखाधड़ी मामलों में बड़ी कमी दर्ज की गई। ऐसे मामलों की संख्या घटकर 293 रह गई, जो पिछले साल 13,332 और वित्त वर्ष 2023-24 में 28,836 थी। इन मामलों में शामिल रकम भी घटकर ₹29 करोड़ रह गई, जबकि पिछले साल यह ₹517 करोड़ थी। वित्त वर्ष 2023-24 में डिजिटल भुगतान धोखाधड़ी कुल मामलों का 80 फीसदी से ज्यादा हिस्सा थी, जो अब घटकर केवल 2.9 फीसदी रह गई है।
जमा (डिपॉजिट) से जुड़े धोखाधड़ी मामलों की रकम घटकर ₹377 करोड़ रह गई, जबकि “अन्य” कैटेगरी में धोखाधड़ी की रकम बढ़कर ₹6,063 करोड़ पहुंच गई। एक साल पहले यह केवल ₹971 करोड़ थी। आरबीआई के आंकड़े बताते हैं कि बैंकों में छोटे और डिजिटल फ्रॉड के मामलों में कमी आई है, लेकिन बड़े कर्ज से जुड़े धोखाधड़ी मामले अब भी बैंकिंग क्षेत्र के लिए सबसे बड़ी चुनौती बने हुए हैं।