पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच कच्चे माल की महंगाई फिर से बढ़ने लगी है। इस कारण दोपहिया वाहन कंपनियों ने कीमतें बढ़ानी शुरू कर दी हैं। कमोडिटी, लॉजिस्टिक्स और सप्लाई-चेन की ऊंची लागत का असर अब उनके मुनाफे और मांग परिदृश्य पर पड़ने लगा है।
पश्चिम एशिया संकट के कारण भारत की वाहन आपूर्ति श्रृंखला में बाधाएं आने लगी हैं। तिमाही परिणामों की हाल की घोषणाओं के दौरान वाहन कंपनियों ने कमोडिटी की बढ़ती कीमतों, लॉजिस्टिक्स की बाधाओं, माल की कमी और उपभोक्ता मांग पर दबाव को लेकर चिंता जताई है।
दोपहिया बाजार की कंपनियों ने बताया कि इसका असर अब कच्चे तेल की कीमतों के अलावा धातुओं, इलेक्ट्रॉनिक कलपुर्जों, बैटरी मैटेरियल और निर्यात लॉजिस्टिक्स पर भी पड़ रहा है।
बजाज ऑटो ने कहा कि इस संघर्ष की वजह से कामकाज के माहौल में ‘बड़ा बदलाव’ आया है, खासकर निर्यात और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े काम प्रभावित हुए हैं। कंपनी ने बताया कि महंगाई का दबाव और विदेश में लॉजिस्टिक्स में दिक्कतों की वजह से गाड़ियों की डिलिवरी और बाजार की मांग पर असर पड़ना शुरू हो गया है। यह असर खासकर उन सेगमेंट में है, जहां कीमतें बहुत मायने रखती हैं।
बजाज ऑटो के कार्यकारी निदेशक राकेश शर्मा ने कंपनी की अर्निंग कॉल के दौरान कहा, ‘अप्रैल में आम महंगाई, हमारे वाहनों की बढ़ी हुई कीमतों, तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) की किल्लत, मजदूरों के पलायन जैसे कारणों से ग्राहकों के मूड पर असर पड़ा जिससे मांग परिदृश्य नरम पड़ गया।’
बजाज ऑटो ने यह भी चेतावनी दी कि मांग में नरमी के अलावा कमोडिटी की बढ़ती कीमतें भी आने वाली तिमाहियों में मार्जिन पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती हैं।
इसी तरह, हीरो मोटोकॉर्प ने भी पश्चिम एशिया की घटनाओं के कारण बढ़ती व्यापक आर्थिक अनिश्चितता पर चिंता जताई है। कंपनी ने कहा कि कमोडिटी और ऊर्जा की बढ़ती कीमतें पूरे वाहन क्षेत्र में उत्पादन लागत को प्रभावित करने लगी हैं।