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‘आत्मनिर्भर भारत के लिए विनिर्माण में चाहिए रणनीतिक स्वायत्तता’, CII अध्यक्ष राजीव मेमानी की सरकार से अपील

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CII अध्यक्ष राजीव मेमानी ने साक्षात्कार में पश्चिम एशिया संकट, विनिर्माण क्षमता बढ़ाने और निजी निवेश की गति पर चर्चा करते हुए नई सरकारों से सक्रिय समर्थन मांगा है

Last Updated- May 06, 2026 | 1:31 AM IST
Rajiv Memani
भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के अध्यक्ष और ईवाई अफ्रीका इंडिया क्षेत्र के रीजनल मैनेजिंग पार्टनर राजीव मेमानी | फाइल फोटो

पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों के नतीजों के एक दिन बाद भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के अध्यक्ष और ईवाई अफ्रीका इंडिया क्षेत्र के रीजनल मैनेजिंग पार्टनर राजीव मेमानी ने उद्योग जगत की आने वाली चुनौतियों और अवसरों पर असित रंजन मिश्र से बातचीत की। प्रमुख अंश:

पश्चिम एशिया संकट भारतीय कंपनियों के लागत ढांचे पर किस तरह असर डाल रहा है?

खुदरा स्तर पर कुछ हद तक लागत का प्रबंधन किया गया है। गैस, एलपीजी और डेरिवेटिव प्रोडक्ट आयात करने वाली कंपनियों पर लागत का दबाव है और उनकी लागत बढ़ गई है। साथ ही भारतीय मुद्रा कमजोर होने से भी लागत बढ़ रही है।  उद्योग को इन लागतों का दबाव उपभोक्ताओं पर डालना होगा। अब तक मांग पर कोई स्पष्ट असर नहीं दिख रहा है, लेकिन हमें देखना होगा कि अप्रैल, मई और जून के आंकड़े कैसे सामने आते हैं। जब तक यह संकट हल नहीं हो जाता, और शायद उसके कुछ महीनों बाद तक, मांग पर अल्पकालिक प्रभाव पड़ सकता है।

रुपया नए निचले स्तर पर है। सरकार को क्या करना चाहिए?

आगे चलकर भारत को जिन प्रमुख क्षेत्रों में कदम उठाना है, उनमें से एक चालू खाते के घाटे को काबू में रखना शामिल है। हमें तेजी से विनिर्माण क्षमता  बनाने का रास्ता खोजना होगा। मुझे लगता है कि अगर प्रोत्साहन  देने या न उद्योगों को कुछ स्तर की सुरक्षा देने की जरूरत है तो इसे दिया जाना चाहिए।  हमें ऊर्जा में बदलाव की दिशा में बढ़ने की जरूरत है, जिसमें सौर ऊर्जा, परमाणु ऊर्जा, कोयले से गैस बनाने की क्षमता बढ़ाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ना होगा। लेकिन इसमें समय लगता है।

हमें वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं को अधिक एकीकृत करने के तरीके भी खोजने होंगे।  वैश्विक मूल्य श्रृंखला के कुछ बड़े खिलाड़ियों को भारत में लाना होगा, जिससे वे भारत में अधिक से अधिक विनिर्माण शुरू कर सकें। साथ ही हमें प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) अधिक से अधिक आकर्षित करने के तरीके पर रचनात्मक रूप से काम करने की जरूरत है।

क्या भारत को राजकोषीय समेकन के पथ पर बने रहना चाहिए या उद्योग और लोगों का समर्थन करने के लिए अपने खर्च को बढ़ाना चाहिए?

राजकोष पर अधिक दबाव रहेगा क्योंकि वृद्धि के आंकड़े अनुमान से थोड़े कम हो सकते हैं। हमें यह देखने के लिए पहली तिमाही  के अंत तक इंतजार करना चाहिए। ऐसी व्यवस्था है, जिससे सरकार अधिक राजस्व जुटा सकती है। निजीकरण, विनिवेश या विवाद समाधान इसका समाधान हो सकता है।  लेकिन भारत के दीर्घकालिक रणनीतिक हित को देखते हुए हमें विनिर्माण में अधिक रणनीतिक स्वायत्तता के मामले में आत्मनिर्भर बनना है, ऊर्जा दृष्टिकोण से अधिक लचीलापन प्राप्त करना है। सरकार को उद्योग का समर्थन करना होगा ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि हम इन कुछ महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों में निवेश शुरू करें।  

मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन ने शनिवार को कहा कि शीर्ष 500 कंपनियों के मुनाफे में 30.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि निजी क्षेत्र में समग्र पूंजी निर्माण दर  निराशाजनक रही है। इस पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है?

इस पर मेरा थोड़ा अलग दृष्टिकोण है। यदि मैं सभी गैर वित्तीय सेवा क्षेत्र की सूचीबद्ध कंपनियों के वास्तविक आंकड़े देखूं, जिसके लिए हमारे पास मार्च 25 तक के आंकड़े उपलब्ध है, तो वित्त वर्ष 2025 में सकल संपत्ति  में 20 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है। वित्त वर्ष 2026 में घोषित नई परियोजनाओं में से 70 प्रतिशत से अधिक निजी क्षेत्र में थीं। पिछले 3-4 महीनों में जो हुआ है, उसके कारण निश्चित रूप से कुछ गति धीमी हो जाएगी। इसमें कोई शक नहीं है। लेकिन इसके बावजूद निवेश की बेहतर गति  देखी गई है।  जैसे ही चीजें सामान्य होंगी, वह निवेश गति जारी रहेगी।

अभी घोषित विधानसभा चुनावों के नतीजों का उद्योग जगत के लिए क्या मतलब है?

जब भी कोई नई सरकार आती है, यह एक बहुत ही सकारात्मक बदलाव होता है। मुझे यकीन है कि कुछ राज्यों में वे नए विचार, नई ऊर्जा लेकर आएंगे। कुछ राज्यों में, कुछ अटकी हुए सार्वजनिक परियोजनाएं पूरी होंगी।

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First Published - May 6, 2026 | 1:31 AM IST

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