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कोल इंडिया का मेगा प्लान: अगले 5 साल में बुनियादी ढांचे और विविधीकरण पर खर्च होंगे ₹1 लाख करोड़

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कंपनी अन्वेषण के काम में एआई और मशीन लर्निंग टूल का भी इस्तेमाल कर रही है और खनन के कामों को आधुनिक बनाने के लिए हाइड्रोलिक ड्रिलिंग सिस्टम को अपना रही है

Last Updated- May 10, 2026 | 10:37 PM IST
Coal India
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी कोल इंडिया अपनी खनन और विविधीकरण रणनीति में महत्त्वाकांक्षी पूंजीगत व्यय आधारित बदलाव की तैयारी कर रही है। कंपनी वित्त वर्ष 2031 तक अगले 5 वर्षों में खनन बुनियादी ढांचे, निकासी प्रणालियों, कोयले से गैस निकालना (कोल गैसीफिकेशन), ताप ऊर्जा और स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं में 1 लाख करोड़ रुपये खर्च करने की योजना बना रही है। यह जानकारी कोल इंडिया के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक बी साईराम ने बिज़नेस स्टैंडर्ड के साथ खास बातचीत में दी।

साईराम ने बताया, ‘वार्षिक पूंजीगत व्यय 18,000 करोड़ रुपये से 25,000 करोड़ रुपये के बीच रह सकता है। इसका दायरा इसलिए बड़ा है क्योंकि विविधीकरण परियोजनाएं गतिशील हैं और प्रौद्योगिकी एवं बाजार के विकास पर निर्भर करती हैं।’

उन्होंने कहा कि कंपनी ने पिछले साल लगभग 16,500 करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय किया था। साईराम ने कहा कि वित्त वर्ष 2027 को कोल इंडिया में ‘सुधारों के वर्ष’ के तौर पर देखा जा रहा है जिसमें खनन, मार्केटिंग, मानव संसाधन और खदानों से कोयले की निकासी के लिए बुनियादी ढांचा क्षेत्रों में लगभग 60 सुधार उपायों की पहचान की गई है।

उन्होंने कहा कि कंपनी बिक्री से पहले लंबे समय तक स्टॉक जमा करने के बजाय मांग के हिसाब से ‘उत्पादन और बिक्री’ की रणनीति की ओर बढ़ रही है।

कंपनी अन्वेषण के काम में आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) और मशीन लर्निंग टूल का भी इस्तेमाल कर रही है और खनन के कामों को आधुनिक बनाने के लिए हाइड्रोलिक ड्रिलिंग सिस्टम को अपना रही है। उन्होंने कहा कि मशीनीकरण, डिजिटलीकरण और फर्स्ट-माइल कनेक्टिविटी सिस्टम कंपनी में श्रमबल की जरूरतों को कम करने में मदद कर रही हैं वहीं मानव संसाधन सुधारों में तेजी से प्रमोशन और कर्मचारियों की मानसिक सेहत से जुड़ी एक नीति प्रस्तावित है। संपत्ति मुद्रीकरण के लिए कंपनी की योजना साल के आखिर तक अपनी दो सहायक कंपनियों को सूचीबद्ध कराने की भी है।

एक बड़े रणनीतिक बदलाव के तहत कोल इंडिया अपने इतिहास में पहली बार 70:30 के ऋण-इक्विटी ढांचे के तहत कोयला गैसीकरण जैसी परियोजनाओं में निवेश के लिए ऋण बाजार का भी रुख कर सकती है। पूंजीगत खर्च का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा खदानों से कोयला निकासी प्रणालियों के आधुनिकीकरण और पिटहेड स्टॉक यानी बिक्री से पहले खदान के समीप स्टॉक को कम करने के लिए पर खर्च होगा। हाल के वर्षों में उम्मीद से कम कोयले की मांग के कारण पिटहेड स्टॉक में वृद्धि देखी गई है।

साईराम ने कहा, ‘हम बाजार में ताजा कोयला लाने और बिक्री से पहले लंबे समय तक स्टॉक करने के बजाय, मांग-आधारित उत्पादन और बिक्री के दृष्टिकोण को अपनाने का प्रयास कर रहे हैं। इससे परिचालन दक्षता और ग्राहक संतुष्टि में सुधार होने की उम्मीद है।’ उन्होंने इसे कोल इंडिया की परिचालन रणनीति में बड़ा बदलाव बताया।

वित्त वर्ष 2027 की शुरुआत में कोल इंडिया का पिटहेड स्टॉक 13 करोड़ टन से अधिक था। अब कंपनी इसे धीरे-धीरे कम करके लगभग 5 करोड़ टन तक करने की योजना बना रही है, साथ ही ग्राहकों को सीधी आपूर्ति बढ़ाएगी। साईराम ने कहा कि प्रदर्शन का मूल्यांकन अब केवल उत्पादन के बजाय आपूर्ति के संदर्भ में भी किया जाएगा।

कोल इंडिया अब पिटहेड स्टॉक को कम करने की योजना बना रही है। इस बदलाव का प्रमुख स्तंभ फर्स्ट-माइल कनेक्टिविटी (एफएमसी) यानी खदान से मुख्य परिवहन स्थल तक बुनियादी ढांचे का विस्तार है। इस योजना के तहत कोल इंडिया कोयला निकासी और हैंडलिंग दक्षता में सुधार के लिए अगले 4 साल में कन्वेयर सिस्टम, साइलो और मशीनीकृत रेल-लोडिंग सुविधाओं पर लगभग 25,000 करोड़ रुपये का निवेश करने की योजना बना रही है। कंपनी वर्तमान में 43.2 करोड़ टन की हैंडलिंग क्षमता वाली 46 एफएमसी परियोजनाओं का संचालन कर रही है।

इस साल 13.3 करोड़ टन क्षमता वाली 13 और परियोजनाएं जोड़ी जा रही हैं। वित्त वर्ष 2030 तक कोल इंडिया का लक्ष्य एफएमसी परियोजनाओं की संख्या को बढ़ाकर 94 करना है, जिससे कुल हैंडलिंग क्षमता लगभग 99.5 करोड़ टन तक बढ़ जाएगी। पूंजीगत खर्च को बढ़ावा देने से कोल इंडिया को कोयला गैसीकरण, थर्मल पावर और महत्त्वपूर्ण खनिजों में विविधीकरण रणनीति का समर्थन करने में भी मदद मिलेगी।

कंपनी भारत हेवी इलेक्ट्रिकल लिमिटेड (बीएचईएल) की साझेदारी में ओडिशा के लखनपुर में 25,000 करोड़ रुपये की कोयला गैसीकरण परियोजना विकसित कर रही है।

कोल इंडिया और दामोदर वैली कॉर्पोरेशन (डीवीसी) संयुक्त रूप से चंद्रपुरा में 1,600 मेगावाट की अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल थर्मल पावर परियोजना विकसित कर रही हैं, जिसमें लगभग 20,000 करोड़ रुपये का निवेश होने का अनुमान है। इस परियोजना के वित्त वर्ष 2031 तक चालू होने की उम्मीद है। साईराम ने कहा कि कोल इंडिया अपने इतिहास में पहली बार विविधीकरण परियोजनाओं के लिए पूंजी जुटाने की खातिर ऋण बाजार का रुख कर सकती है। उन्होंने कहा, ‘कोल इंडिया पारंपरिक रूप से कर्ज मुक्त कंपनी रही है। ऐतिहासिक रूप से हमने ऋण बाजारों का रुख नहीं किया है।’

उन्होंने कहा कि गैसीकरण परियोजना के लिए बैंकरों की पहचान पहले ही कर ली गई है। कंपनी चालू वित्त वर्ष के दौरान दो अतिरिक्त सहायक कंपनियों को सूचीबद्ध करने की भी योजना बना रही है। इन कंपनियों में साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड और महानदी कोलफील्ड्स शामिल हैं। 

वित्त वर्ष 2026 में कोल इंडिया का समेकित शुद्ध लाभ 11 फीसदी घटकर 31,071 करोड़ रुपये रहा जबकि परिचालन आय लगभग 1.68 लाख करोड़ रुपये पर सपाट रही। कोल इंडिया देश के कुल कोयला उत्पादन में 80 फीसदी से अधिक का योगदान करती है। 

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First Published - May 10, 2026 | 10:37 PM IST

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