सरकारी कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2027 की शुरुआत कमजोर उत्पादन से की है। अप्रैल में कोयला उत्पादन में तेज गिरावट दर्ज की गई, जबकि इस अवधि में कोयले की उठान में भी मामूली कमी आई।
शुक्रवार को शेयर बाजार की दी गई जानकारी के मुताबिक अप्रैल 2026 में कोल इंडिया का अस्थायी उत्पादन 561 लाख टन रहा, जो पिछले साल इसी महीने के 621 लाख टन की तुलना में 9.7 प्रतिशत कम है। इस अवधि में कोयले का उठान मामूली 2 प्रतिशत घटकर 645 लाख टन से घटकर 632 लाख टन रह गया।
उत्पादन और उठान के बीच अंतर 71 लाख टन रहा। इससे यह संकेत मिलता है कि कंपनी ने मांग पूरी करने के लिए अपने भंडार का सहारा लिया। कोल इंडिया की सहायक कंपनियों में, साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) सबसे मजबूत प्रदर्शनकर्ता के रूप में उभरी, जिसा उत्पादन 9.3 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 153 लाख टन रहा।
सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (सीसीएल) 60 लाख टन पर लगभग स्थिर रही, जबकि ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) के उत्पादन में 9.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। उत्पादन में सबसे ज्यादा गिरावट भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) में दर्ज की गई, जहां उत्पादन 41.3 प्रतिशत गिरकर 20 लाख टन रह गया।
बिजली संयंत्रों को कोयले की आपूर्ति करने वाली एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एनसीएल) में उत्पादन 23.6 प्रतिशत घटकर 93 लाख रह गया। कोल इंडिया की सबसे बड़ी सहायक कंपनियों में से एक महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड (एमसीएल) में 13.9 प्रतिशत की गिरावट के साथ 138 लाख टन उत्पादन हुआ।
उठान की स्थिति देखें तो महानदी कोलफील्ड्स ने 7.2 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 181 लाख टन आपूर्ति की। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स ने 4.1 प्रतिशत वृद्धि के साथ 159 लाख टन आपूर्ति की। ईस्टर्न कोलफील्ड्स ने भी 4.6 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की।
हालांकि भारत कोकिंग कोल की उठान 26.7 प्रतिशत घट गई और नॉर्दर्न कोलफील्ड्स ने 12.5 प्रतिशत गिरावट दर्ज की। भारत के घरेलू कोयला उत्पादन में 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा कोल इंडिया का है और देश के बिजली क्षेत्र को ईंधन की आपूर्ति करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है। अप्रैल में उत्पादन में आई यह सुस्ती चिंता का विषय है, क्योंकि गर्मियों के महीनों में बिजली की मांग आमतौर पर बढ़ जाती है।