केंद्र सरकार ने ‘कोल एक्सचेंज नियम, 2026’ अधिसूचित कर दिेए हैं। इससे भारत में विनियमित कोयला एक्सचेंज की स्थापना और कोयले की इलेक्ट्रॉनिक खरीदारी के औपचारिक मार्केट के ढांचे का मार्ग प्रशस्त हो गया है। ये नियम कोयला मंत्रालय ने मंगलवार को अधिसूचित किए। ये नियम कोल एक्सचेंज के रजिस्ट्रेशन, स्वामित्व, गवर्नेंस, कारोबार, निपटान और मार्केट की निगरानी के लिए ढांचा तय करते हैं। इनसे पारदर्शी तरीके से कीमत तय होने और कोयले के लेन-देन में दक्षता बढ़ने की उम्मीद है।
इन नियमों में अहम प्रावधान यह है कि सभी मौजूदा इलेक्ट्रॉनिक कोल ट्रेडिंग प्लेटफार्म को नए ढांचे के तहत कोल एक्सचेंज के तौर पर पंजीकृत कराना होगा। इस क्रम में प्रथम पंजीकृत कोल एक्सचेंज का कामकाज शुरू होने के छह महीने में पंजीकरण नहीं कराने वाले प्लेटफॉर्म को अपना कामकाज जारी रखने की अनुमति नहीं होगी।
यह कदम कोयले के कारोबार के लिए मार्केट-आधारित प्रणाली बनाने की सरकार की कोशिश में अहम कदम है। ऐसी प्रणाली जिंस आधारित कई दूसरी कमोडिटी मार्केट में देखी गई है। नियमों के तहत कोल एक्सचेंज शुरू करने वाली कंपनी की कम से कम नेट वर्थ 50 करोड़ रुपये होनी चाहिए और उसे हर समय यह सीमा बनाए रखनी होगी। यह पंजीकरण 25 साल के लिए मान्य होगा और इसे अगले 25 साल के लिए रिन्यू कराया जा सकेगा। सरकार ने नियंत्रण एक ही जगह केंद्रित होने से रोकने के लिए स्वामित्व से जुड़ी पाबंदियां भी लगाई हैं।
एक्सचेंज का कोई भी सदस्य या ग्राहक कोल एक्सचेंज में 5 प्रतिशत से ज्यादा इक्विटी नहीं रख सकता है, जबकि सदस्य और ग्राहक की कुल होल्डिंग 49 प्रतिशत से ज्यादा नहीं हो सकती। पंजीकरण के पांच साल बाद दूसरे निवेशकों पर 25 प्रतिशत स्वामित्व की सीमा लागू होगी। इस ढांचे में गवर्नेंस और मार्केट की ईमानदारी बनाए रखने के लिए व्यापक सुरक्षा उपाय किए गए हैं।
कोल एक्सचेंज के बोर्ड में कम-से-कम आधे सदस्य स्वतंत्र निदेशक होने चाहिए और ये निदेशक एक्सचेंज के सदस्य या ग्राहक के तौर पर काम नहीं कर सकेंगे। नियमों में कार्टेलाइजेशन, सर्कुलर ट्रेडिंग, मार्केट में हेरफेर और इनसाइडर ट्रेडिंग जैसी गतिविधियों को परिभाषित किया गया है और उन पर रोक लगाई गई है। ये नियम नियामक को नए कॉन्ट्रैक्ट मंजूर करने, कॉन्ट्रैक्ट में ट्रेडिंग रोकने या जरूरत पड़ने पर कॉन्ट्रैक्ट वापस लेने का अधिकार भी देते हैं।
निपटान से जुड़े जोखिम को कम करने के लिए हर कोल एक्सचेंज को ‘निपटान गारंटी कोष’ बनाना होगा और ट्रेड की क्लियरिंग और सेटलमेंट के लिए जोखिम प्रबंधन प्रणाली लागू करनी होगी। नियमों में ऑडिट ट्रेल, एल्गोरिदम-बेस्ड प्राइस डिस्कवरी सिस्टम और क्वालिटी की जांच के लिए थर्ड-पार्टी कोल सैंपलिंग एजेंसियों वाले इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग सिस्टम की परिकल्पना की गई है।