कोल इंडिया की मार्च 2026 की ई- नीलामी में कोयले की कीमत फरवरी 2026 के अधिसूचित मूल्य से करीब 35 प्रतिशत अधिक रही है। एमजंक्शन सर्विसेज के बयान के अनुसार पश्चिम एशिया में संकट से जुड़ी बाधाओं के कारण औद्योगिक उपभोक्ताओं को गैस की कमी का सामना करना पड़ रहा है। इसलिए वे कोयले का इस्तेमाल कर रहे हैं और हाजिर बाजार में कीमतें बढ़ी हैं।
इसमें कहा गया है कि इस समय नीलामी की मात्रा का केवल 47 प्रतिशत कोयला ही बिक रहा है। कोयले की मात्रा और कीमतें में जल्द ही वृद्धि की संभावना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 मार्च को पश्चिम एशिया की स्थिति चिंताजनक बताते हुए कहा था कि इससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और दैनिक जीवन पर प्रतिकूल स्तर पड़ रहा है।
एमजंक्शन ने एक बयान में कहा है कि देश भर के औद्योगिक क्लस्टरों में सीएनजी और एलपीजी आपूर्ति की कमी और व्यवधान की स्थिति है। ऐसे में फर्मों को कोयले जैसे वैकल्पिक ईंधन के इस्तेमाल की ओर बढ़ना पड़ रहा है, जिससे कामकाज जारी रखा जा सके।
भारत अपने कुल प्राकृतिक गैस की जरूरतों का 45 से 50 प्रतिशत आयात करता है। ऐसे में वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और शिपिंग मार्ग में व्यवधान के असर को लेकर औद्योगिक उपभोक्ता बहुत संवेदनशील हैं। खासकर होर्मुज स्ट्रेट में व्यवधान का बहुत असर पड़ता है, जो इस समय युद्ध के कारण बाधित है।
कोयला बाजार के शुरुआती संकेतों से पता चलता है कि मांग आपूर्ति की गणित थोड़ी बिगड़ी है। नीलामी बाजारों में कोयले के खरीदार बढ़े हैं।
मांग में तेजी की कई वजहें हैं। इनमें एलएनजी की कमी के कारण गैस की जगह कोयले का इस्तेमाल, बिजली की मांग में मौसमी वृद्धि और आयात घटने के कारण घरेलू कोयले पर अधिक निर्भरता प्रमुख है।
एमजंक्शन के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी विनय वर्मा ने कहा, ‘हम जो देख रहे हैं वह ईंधन के इस्तेमाल के तरीके में एक शुरुआती, लेकिन स्पष्ट व्यावहारिक बदलाव है। जैसे-जैसे एलएनजी की उपलब्धता कम हो रही है और कई औद्योगिक समूहों में सीएनजी/एलपीजी की आपूर्ति में व्यवधान आ रहा है, कामकाज जारी रखने के लिए खरीदार तेजी से कोयले का रुख कर रहे हैं।’
बयान में कहा गया है कि इस साल अब तक नीलामी की मात्रा का केवल 47 प्रतिशत कोयला ही बेचा गया है। साथ ही वर्तमान प्रीमियम ऐतिहासिक उच्च स्तर से नीचे हैं। इससे नियंत्रित मांग की स्थिति के संकेत मिल रहे हैं।
इसमें कहा गया है कि बिजली संयंत्रों में कोयले के स्टॉक का स्तर 18-20 दिनों की खपत के लिए पर्याप्त बना हुआ है। इसकी वजह से हाजिर मांग की तेजी के बावजूद घबराहट में खरीदारी नहीं हो रही है।