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दार्जिलिंग चाय बागानों में संकट गहराया, गैस की कमी से उत्पादन और निर्यात पर असर

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चाय बोर्ड के उप चेयरमैन को 10 मार्च को लिखे पत्र में दार्जिलिंग चाय संगठन ने कहा था कि इस आदेश के कारण चाय बागानों की फैक्टरियों के लिए औद्योगिक एलपीजी की कमी हो सकती है।

Last Updated- March 18, 2026 | 10:46 PM IST

दार्जिलिंग के चाय बागान मालिकों को चिंता सता रही है कि वाणिज्यिक एलपीजी की कमी के कारण ‘फर्स्ट फ्लश’ या सीजन की पहली फसल के समय प्रोसेसिंग में रुकावट आ सकती है। उद्योग निकायों- दार्जिलिंग चाय संगठन और भारतीय चार संगठन केउद्योग निकायों ने भारतीय चाय बोर्ड को पत्र लिखकर ईंधन पर लगी बंदिशों को लेकर चिंता व्यक्त की है।

चाय बोर्ड के सूत्रों ने बताया कि वाणिज्य मंत्रालय ने संबंधित पक्षों से परामर्श करने के बाद रिपोर्ट मांगी थी। उन्होंने आगे कहा, ‘तदनुसार, उनसे परामर्श करने के बाद हमने अपने सुझावों के साथ रिपोर्ट सौंप दी है।’

पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 5 मार्च और 9 मार्च को आदेश जारी किए थे, जिनमें रिफाइनरियों और पेट्रोकेमिकल परिसरों को एलपीजी उत्पादन को अधिकतम करने और घरों तथा अस्पतालों व शैक्षणिक संस्थानों जैसी आवश्यक सेवाओं को आपूर्ति में प्राथमिकता देने का निर्देश दिया गया, जबकि वाणिज्यिक और औद्योगिक उपयोगकर्ताओं को आपूर्ति क्रम में निचले स्थान पर रखा गया है।

चाय बोर्ड के उप चेयरमैन को 10 मार्च को लिखे पत्र में दार्जिलिंग चाय संगठन ने कहा था कि इस आदेश के कारण चाय बागानों की फैक्टरियों के लिए औद्योगिक एलपीजी की कमी हो सकती है। इसका सीधा असर दार्जिलिंग चाय के उत्पादन पर पड़ेगा, जिससे 55,000 स्थायी कर्मचारियों और उनके परिवारों का गुजारा चलता है। चाय का निर्यात भी प्रभावित हो सकता है क्योंकि पहली फसल आम तौर पर निर्यात की जाती है।

दार्जिलिंग चाय संगठन के मुख्य सलाहकार संदीप मुखर्जी ने बताया कि पिछले एक दशक में, दार्जिलिंग की ज्यादातर चाय बागान फैक्टरियों ने कोयले से चलने वाले सिस्टम से हटकर औद्योगिक एलपीजी का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। ऐसा इसलिए किया गया कि चाय के निर्यात वाली खेप में एंथ्राक्विनोन पाया गया था, जिससे व्यापार में दिक्कतें आ रही थीं।

यह उद्योग अब लगभग पूरी तरह से वाणिज्यिक एलपीजी पर निर्भर है। चाय बागान से जुड़े एलपीजी इस्तेमाल करने वालों में से ज्यादातर लोग एचपीसीएल पर निर्भर हैं मगर कंपनी चाय बागानों को गैस की आपूर्ति नहीं कर पा रही है। इससे भविष्य अनिश्चित हो गया है और बागान बंद होने का खतरा है।

दार्जिलिंग चाय का लगभग 41 फीसदी हिस्सा निर्यात किया जाता है। भारतीय चाय संगठन ने भी चाय बोर्ड को पत्र लिखा है। संगठन के महासचिव अरिजित राहा ने बताया, ‘ ऊपरी असम में अधिकांश एस्टेट फैक्टरियां पाइपलाइन गैस से जुड़ी हुई हैं और चाय को प्राथमिकता सूची में शामिल किया गया है। लेकिन दार्जिलिंग में चाय बागान मुख्य रूप से वाणिज्यिक एलपीजी सिलिंडरों पर निर्भर हैं। हमने चाय बोर्ड और इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन से अनुरोध किया है कि ‘फर्स्ट फ्लश’ अवधि के दौरान सिलिंडरों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। साथ ही आपूर्ति बनाए रखने के लिए हमारे दार्जिलिंग शाखा कार्यालय द्वारा स्थिति पर नियमित रूप से नजर रखी जा रही है।’

भारतीय चाय निर्यातक संगठन के चेयरमैन अंशुमान कनोरिया ने बताया कि दार्जिलिंग के चाय बागानों में 47.5 किलोग्राम वाले एलपीजी सिलिंडरों का स्टॉक सीमित मात्रा में रखा जाता है, जिनकी कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। उन्होंने कहा, ‘इसके अलावा सरकारी अधिसूचना के बाद इनकी आपूर्ति भी रोक दी गई है।’

उन्होंने कहा, ‘अगर एलपीजी की आपूर्ति तुरंत बहाल नहीं की गई तो बागानों को अपना काम बंद करने पर मजबूर होना पड़ सकता है। इससे दार्जिलिंग चाय के निर्यात के साथ-साथ बागानों और वहां काम करने वालों के भविष्य पर भी असर पड़ेगा।’

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First Published - March 18, 2026 | 10:40 PM IST

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