दिल्ली में इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर बड़ा कदम, 2027 से थ्री-व्हीलर नियम में बदलाव की तैयारी
ड्राफ्ट नीति के अनुसार 1 जनवरी 2027 से दिल्ली में केवल इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर ही नए रजिस्ट्रेशन के लिए मान्य होंगे। इसका सीधा असर ऑटो-रिक्शा और छोटे कमर्शियल वाहनों पर पड़ेगा, जो शहर में आखिरी छोर तक लोगों को जोड़ने का अहम काम करते हैं।
इसके साथ ही नीति में दोपहिया वाहनों को भी धीरे-धीरे इलेक्ट्रिक मॉडल की ओर ले जाने का संकेत दिया गया है। हालांकि, सरकार ने यह साफ किया है कि मौजूदा पेट्रोल-डीजल वाहनों पर तुरंत कोई प्रतिबंध नहीं लगाया जाएगा। इसका उद्देश्य बदलाव को धीरे-धीरे और व्यवस्थित तरीके से लागू करना है ताकि लोगों और कारोबार दोनों पर अचानक दबाव न पड़े।
ईवी इकोसिस्टम और इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा
नीति के तहत शहर में सार्वजनिक और निजी चार्जिंग नेटवर्क को तेजी से बढ़ाने पर जोर दिया गया है, ताकि ईवी उपयोगकर्ताओं को चार्जिंग को लेकर किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
इसके साथ ही एक मजबूत ईवी सप्लाई चेन विकसित करने की योजना भी शामिल है। इसमें बैटरी रिपेयर, रीसाइक्लिंग और पुराने कंपोनेंट्स की रिकवरी जैसी व्यवस्थाओं को व्यवस्थित तरीके से विकसित करने पर फोकस किया गया है। सरकार का उद्देश्य है कि ईवी सेक्टर केवल वाहनों तक सीमित न रहे, बल्कि एक पूरा सपोर्टिंग इकोसिस्टम तैयार हो।
नीति में सर्कुलर इकोनॉमी पर भी खास ध्यान दिया गया है। खासकर बैटरी के डिस्पोजल और दोबारा इस्तेमाल की व्यवस्था को प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि भविष्य में ईवी बैटरियों से होने वाले पर्यावरणीय जोखिम को कम किया जा सके।
हवा की गुणवत्ता में सुधार को केंद्र में रखा गया है
यह नीति राजधानी और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में वायु गुणवत्ता सुधारने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।
नीति के मसौदे में आयोग फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) के निष्कर्षों का हवाला दिया गया है, जिसमें साफ कहा गया है कि दिल्ली के प्रदूषण में सबसे बड़ी भूमिका वाहनों से निकलने वाले धुएं की है। खासतौर पर दोपहिया वाहन और कमर्शियल वाहनों को प्रमुख प्रदूषण स्रोतों में शामिल किया गया है।
सरकार का मानना है कि अगर इन अधिक उपयोग वाले वाहनों को तेजी से इलेक्ट्रिक वाहनों में बदला जाए, तो हवा की गुणवत्ता में लंबे समय तक सुधार संभव है। इसी कारण इलेक्ट्रिफिकेशन को नीति का मुख्य आधार बनाया गया है।
यह नीति संविधान के अनुच्छेद 21 से भी जुड़ी है, जिसमें नागरिकों को साफ और प्रदूषण रहित वातावरण में जीने का अधिकार दिया गया है। साथ ही यह पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 और मोटर वाहन अधिनियम 1988 जैसे मौजूदा कानूनों के अनुरूप भी है।
सरकार ने जनता से सुझाव मांगे
इस प्रस्ताव पर लोग अगले 30 दिनों तक अपने सुझाव और आपत्तियां भेज सकते हैं। इसके बाद सरकार सभी फीडबैक पर विचार करके अंतिम नीति को लागू करेगी।
यह नई ईवी नीति, साल 2020 में शुरू हुई दिल्ली इलेक्ट्रिक वाहन नीति का ही आगे का विस्तार है। पुरानी नीति की अवधि अगस्त 2023 में समाप्त हो गई थी, लेकिन इसे कई बार बढ़ाया गया। अब नया ढांचा तैयार किया जा रहा है, जो लागू होने के बाद साल 2030 तक प्रभावी रहेगा।
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, इस नीति का मकसद राजधानी में इलेक्ट्रिक वाहनों को और तेजी से अपनाना और प्रदूषण को कम करना है। ड्राफ्ट में कई नई सुविधाओं और प्रोत्साहनों को शामिल किए जाने की संभावना है, हालांकि अंतिम रूप सुझावों के बाद तय होगा।