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डीजल की कीमतों से खतरे में CV इंडस्ट्री की रफ्तार, रिकवरी पर लग सकता है ब्रेक

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कम लागत और मांग से उबर रही वाणिज्यिक वाहन इंडस्ट्री के सामने अब डीजल कीमतों में बढ़ोतरी सबसे बड़ा जोखिम बनकर उभर रही है।

Last Updated- May 15, 2026 | 9:43 AM IST
Commercial Vehicle industry
Representative image

भारत के वाणिज्यिक वाहन (सीवी) उद्योग ने आखिरकार वित्त वर्ष 2019 से पहले के अपने थोक बिक्री के उच्चतम स्तर को पार कर लिया है। इसकी मुख्य वजहें हैं – वाहनों की बेहतर किफायत, जीएसटी के कारण लागत में कमी और इन्फ्रास्ट्रक्चर पर होने वाला खर्च। लेकिन, जहां एक ओर टाटा मोटर्स ने इस रिकवरी का फायदा उठाते हुए रिकॉर्ड राजस्व और 15 साल का सबसे सर्वाधिक एबिटा मार्जिन हासिल किया, वहीं दूसरी ओर कंपनी के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी गिरीश वाघ ने इस पूरे चक्र के लिए सबसे बड़े खतरे की ओर इशारा किया। यह खतरा है डीजल की कीमत।
किसी ट्रक ऑपरेटर के लिए सेगमेंट और ड्यूटी साइकल  के आधार पर डीजल कुल स्वामित्व लागत (टीसीओ) का 25 से 50 प्रतिशत हिस्सा होता है।
खुदरा डीजल की कीमत में लगभग 1 रुपये की बढ़ोतरी से टीसीओ में भी उसी अनुपात में बढ़ोतरी होती है। जिन सेगमेंट में डीजल की हिस्सेदारी इस सीमा के ऊपरी स्तर पर होती है, वहां इसका असर काफी ज्यादा होता है।
बाघ ने कहा, ‘यह बहुत ही महत्त्वपूर्ण निगरानी योग्य पहलू है। हम सक्रिय रूप से इस पर नजर रख रहे हैं कि खुदरा कीमतें किस दिशा में बढ़ सकती हैं और वाहन मालिकों के लिए परिचालन किफायत के लिहाज से इसका क्या मतलब होगा।’
इसकी टाइमिंग इसे खास तौर पर संवेदनशील बनाती है। पश्चिम एशिया में 28 फरवरी को शुरू हुए युद्ध ने कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों को तेजी से बढ़ा दिया है। भारत में अब तक खुदरा उपभोक्ता इसके पूरे असर से बचे हुए हैं, क्योंकि सरकारी तेल विपणन कंपनियां घाटा खुद उठा रही हैं। लेकिन यह सुरक्षा कवच सीमित है।
टाटा मोटर्स ने वित्त वर्ष 2026 में सीवी बाजार में जो तेजी देखी, उसकी मुख्य वजह वाहन ऑपरेटरों की आर्थिक स्थिति में आया सुधार था। वाघ ने वित्त वर्ष 2026 को ‘सीवी उद्योग लिए एक अहम मोड़’ बताया, जिसमें जीएसटी सुधारों और इन्फ्रास्ट्रक्चर पर लगातार हो रहे खर्च की बदौलत बिक्री का आंकड़ा वित्त वर्ष 2019 से पहले के अपने सबसे ऊंचे स्तर को पार कर गया।
सितंबर 2025 में जीएसटी दरों में कटौती से गाड़ियों की शुरुआती कीमतें कम हुईं और रुकी हुई मांग फिर से शुरू हो गई, जबकि माल ढुलाई की दरें स्थिर हो गईं और ऑपरेटरों का नकदी प्रवाह बेहतर हुआ। डीजल की कीमतों में किसी भी बड़ी बढ़ोतरी का असर इसके ठीक उल्टा होगा।  इससे उन ऑपरेटरों की परिचालन लागत बढ़ जाएगी, जो अभी-अभी बाजार में लौटे हैं।

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First Published - May 15, 2026 | 9:43 AM IST

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