सिंगापुर मुख्यालय वाले एड-टेक प्लेटफॉर्म एरुडाइटस को उम्मीद है कि अगले 5 वर्षों में भारत उसके कुल राजस्व में आधे से ज्यादा का योगदान देगा। कंपनी देश में विदेशी विश्वविद्यालयों से साझेदारी पर जोर दे रही है। अभी, भारत कंपनी के राजस्व में करीब 25 फीसदी का योगदान देता है।
बिज़नेस स्टैंडर्ड से बात करते हुए कंपनी के सह-संस्थापक और सीईओ अश्विन दामेरा ने कहा कि कंपनी ने सात विदेशी विश्वविद्यालयों के साथ साझेदारी की है और उन दोनों का संयुक्त उद्यम भारत में उनका मार्केट एंट्री पार्टनर होगा। इनमें यूएनएसडब्ल्यू सिडनी, यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिस्टल. यूनिवर्सिटी ऑफ लिवरपूल, यूनिवर्सिटी ऑफ यॉर्क, यूनिवर्सिटी ऑफ अबरदीन, इलिनॉय टेक और विक्टोरिया यूनिवर्सिटी शामिल हैं।
संयुक्त उद्यम के ढांचे के तहत विदेशी विश्वविद्यालयों के पास आम तौर पर 51 फीसदी हिस्सेदारी होगी जबकि एरुडाइटस के पास 49 फीसदी हिस्सेदारी होगी। दामेरा के अनुसार ये विश्वविद्यालय जहां अकादमिक देखेंगी (इसमें पाठ्यक्रम, शिक्षण पद्धति, फैकल्टी की भर्ती, दाखिले और शोध शामिल हैं), वहीं एरुडाइटस परिचालन, छात्रों के अनुभव, आवास, टेक्नॉलजी इंटीग्रेशन और कंपनी कामकाज का प्रबंधन करेगा।
उन्होंने कहा, हमने भारत में एक कंपनी के तौर पर शुरुआत की थी, लेकिन अब भारतीय स्कूलों पर ज्यादा ध्यान देने और साथ ही विदेशी कैंपस होने से मुझे लगता है कि भारत फिर से हमारे काम का बड़ा हिस्सा बन जाएगा। उन्होंने कहा, अभी भारत हमारी कमाई में लगभग 25 फीसदी का योगदान देता है। मुझे लगता है कि अगर आप 5 साल बाद यही सवाल पूछेंगे तो शायद यह आधा से भी ज्यादा होगा।
2010 में स्थापित एरुडाइटस ने शुरू में विश्वविद्यालयों को अपने साथ जोड़ने पर ध्यान केंद्रित किया ताकि वह ऑनलाइन माध्यम से कार्यक्रम पेश कर सके और अपने कैंपस से बाहर के बाजारों तक पहुंच बना सके। कंपनी की शुरुआती साझेदारियों में इनसीड, व्हार्टन स्कूल और मेसाचुसेट्स इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी जैसे संस्थान शामिल थे।