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यूरोप ने घटाई भारत से तेल खरीद, निर्यात में रिकॉर्ड गिरावट; कंपनियों की बढ़ी चिंता

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यूरोप में युद्ध और EU नियमों के चलते भारत के ईंधन निर्यात में भारी गिरावट आई है, जिससे सप्लाई और राजस्व दोनों प्रभावित हुए हैं।

Last Updated- April 01, 2026 | 9:18 AM IST
India's fuel exports drop amid European Union sanctions, West Asia war
Representative image

पश्चिम एशिया और यूरोप में अलग-अलग मोर्चों पर चल रहे युद्ध तथा यूरोपीय संघ (ईयू) के नियमों में बदलाव के कारण 10 अरब डॉलर मूल्य के साथ देश के पांचवें सबसे बड़े ईंधन निर्यात केंद्र यूरोप के लिए तेल निर्यात में मार्च महीने के दौरान भारी गिरावट आई है।

शिपिंग डेटा और उद्योग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, सबसे बड़े तेल उत्पाद निर्यातक रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) सहित भारतीय रिफाइनरियों ने इस महीने यूरोप को अब तक की सबसे कम 18,000 बैरल प्रति दिन ईंधन की आपूर्ति की है। यह मासिक हिसाब से 80 प्रतिशत और सालाना 94 प्रतिशत गिरावट दर्शाता है। समुद्री डेटा प्रदाता केप्लर के अनुसार, भारत ने इस साल फरवरी में यूरोप को 89,000 बैरल प्रति दिन और मार्च 2025 में 286,000 बैरल प्रति दिन निर्यात किया था। जून 2020 को छोड़ दें, जब यूरोप को निर्यात लगभग शून्य था, तो इस साल मार्च में यह सबसे कम स्तर रहा।

यूरोप के कारण भारत के समग्र निर्यात में मार्च में 12 प्रतिशत (मासिक) आई है जो 140,000 बैरल प्रति दिन की गिरावट के साथ 10 लाख बैरल प्रति दिन रहा। केप्लर डेटा से पता चलता है कि यूरोप को शिपमेंट रुकने से 2026 की पहली तिमाही में भारत की विदेशी बिक्री 200,000 बैरल प्रति दिन तक कम हो गई, जो पिछले साल 12.9 लाख बैरल प्रति दिन की तुलना में 10.9 लाख बैरल प्रति दिन पर आ टिकी। इसका सीधा असर राजस्व पर भी पड़ेगा जो सरकार डीजल और जेट ईंधन पर निर्यात कर के रूप में वसूलती है। उद्योग सूत्रों ने कहा है कि यूरोप के लिए निर्यात में सुधार होगा या नहीं, इस बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता, क्योंकि यूरोपीय संघ ने जनवरी से रूसी कच्चे तेल से बने ईंधन के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया था। इस फैसले ने भारत को झटका दिया है। एक वरिष्ठ रिफाइनिंग अधिकारी ने कहा कि यह प्रतिबंध सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के लिए कोई मायने नहीं रखता, क्योंकि यूरोप को रिलायंस द्वारा आपूर्ति की जा रही थी। रिलायंस ने बाजार संबंधी मामलों पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है।

रेटिंग एजेंसी इक्रा के वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रशांत वशिष्ठ ने कहा, ‘पश्चिम एशिया से बड़ी मात्रा में ईंधन निर्यात बाधित हुआ है। इसे सामान्य होने में अभी समय लगेगा। इसलिए, मुझे लगता है कि यूरोप फिर भारत की तरफ आएगा।’ उन्होंने कहा कि यूरोप को रिलायंस की आवश्यकता होगी, क्योंकि 2025 में यूरोप को कुल डीजल और जेट ईंधन आयात में इस रिफाइनर की हिस्सेदारी 15 प्रतिशत तक थी। वैकल्पिक तौर पर यूरोपीय संघ अमेरिका से ईंधन पर और भी अधिक निर्भर हो जाएगा।

पिछले सप्ताह यूक्रेन द्वारा रूसी बाल्टिक सागर बंदरगाहों और रिफाइनरियों पर किए गए ड्रोन हमलों के बाद ईंधन बाजारों में और परेशानी खड़ी हो गई है। इससे रूस से ईंधन निर्यात प्रभावित हुआ है। इस बीच, रूस बुधवार (1 अप्रैल) से गैसोलीन निर्यात पर प्रतिबंध लगाने की योजना बना रहा है।

यूरोपीय संघ ने कड़े प्रतिबंध लगाए हैं, जिनमें इसी जनवरी से रूसी तेल से बने डीजल और जेट ईंधन के आयात पर रोक भी शामिल है। यूरोपीय संघ का तर्क है कि ये प्रतिबंध तब तक जारी रहेंगे जब तक निर्यातक कंपनियां रूसी तेल से तैयार ईंधन और अन्य देशों से मिलने वाले कच्चे तेल से तैयार ईंधन की लाइनों को अलग-अलग न कर लें।

यूके के उद्योग प्रकाशन अर्गस के अनुसार, एक तथाकथित ‘टी2’ नियम के तहत सीमा शुल्क को मंजूरी मिलने के बाद ईंधन यूरोपीय संघ के भीतर स्वतंत्र रूप से बेचा जा सकता है। मतलब यह कि यदि नीदरलैंड में सीमा शुल्क मंजूर हो चुका है तो शिपमेंट फ्रांस या जर्मनी में वितरित किया जा सकता है। लेकिन अन्य खरीदारों को अतिरिक्त कागजी कार्रवाई पूरी करने पर ही यह मिलेगा।

अर्गस ने कहा कि यह कागजी कार्रवाई एनर्जी लीप क्लॉज है, जिसके तहत रिफाइनरी को यह बताना होगा कि उसने लोडिंग से 60 दिन पहले तक रूसी कच्चे तेल का उपयोग नहीं किया है। लेकिन भारतीय रिफाइनिंग से जुड़े दो वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि यूरोप में कुछ बड़े व्यापारी और तेल कंपनियां यूरोपीय संघ के प्रतिबंधों की गलत व्याख्या कर रहे थे, क्योंकि जामनगर रिफाइनरी कॉम्प्लेक्स में रिलायंस की दोनों सुविधाओं का स्वामित्व अलग-अलग संस्थाओं के पास है। केप्लर डेटा और सूत्रों के अनुसार, इस साल रिलायंस द्वारा यूरोप में फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड और तुर्की को कार्गो भेजे गए हैं।

अधिकारियों ने कहा कि रिलायंस की रिफाइनरियां पाइपलाइन और उपकरण आदि अलग-अलग क्रूड लोडिंग प्लेटफॉर्म का उपयोग करती हैं।

रिलायंस के एक अधिकारी ने बताया कि कंपनी ने नवंबर 2025 से ही अपनी एसईजेड में स्थित रिफाइनरी में 704,000 बैरल प्रति दिन रूसी तेल का प्रसंस्करण बंद कर दिया है। यानी इस रोक को 30 मार्च, 2026 तक 150 दिन का समय हो चुका है।  शिपिंग डेटा से पता चला कि डोमेस्टिक टैरिफ एरिया प्लांट 6,60,000 बैरल प्रति दिन रूसी तेल का उपयोग कर रहा है। रिलायंस ने इस महीने 3,82,000 बैरल प्रति दिन रूसी तेल आयात किया, जो देश के लगभग 20 लाख बैरल प्रति दिन आयात का 19 प्रतिशत होता है।

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First Published - April 1, 2026 | 9:18 AM IST

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