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इंस्टाग्राम और स्क्रीन टाइम का असर! युवा तेजी से खरीद रहे ये दवाएं

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मोटापा, स्किन और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी दवाओं की मांग तेजी से बढ़ी

Last Updated- May 21, 2026 | 9:33 AM IST
Medicine

Gen Z Health Trends: देश के औषधि बाजार में वेलनेस, रूप-रंग और जीवनशैली से जुड़ी थेरेपी तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं क्योंकि देश की इंटरनेट कुशल पीढ़ी यानी ‘जेनजी’ अपने स्वास्थ्य की देखभाल के लिए कहीं अधिक सक्रिय और अक्सर स्वप्रेरित नजरिया अपना रही है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार 15 से 30 वर्ष की आयु वाली यह पीढ़ी अब देश की कुल आबादी का करीब 26 फीसदी है और यह अपनी फिटनेस, सौंदर्य, मानसिक स्वास्थ्य और जीवनशैली संबंधी विकारों से जुड़ी थेरेपी की मांग के पैटर्न को तेजी से आकार दे रही है।

उद्योग जगत के लोगों के मुताबिक यह समूह मोटापारोधी, नेत्र चिकित्सा, त्वचा संबंधी चिकित्सा और मौखिक देखभाल की दवाओं की मांग बढ़ाने वाला है। उनके मुताबिक इसकी वजह है स्क्रीन पर अधिक देर तक काम करना, सोशल मीडिया से प्रभावित सौंदर्य मानक और बदलती हुई खाद्य आदतें।

फार्मारैक की वाणिज्यिक उपाध्यक्ष शीतल सापले ने कहा, ‘अधिक स्क्रीन समय के कारण जेनजी नेत्र-चिकित्सा पर काफी खर्च कर रहे हैं जबकि त्वरित रूप-रंग सुधार की प्रवृत्ति ने इस समूह के कई लोगों को पतला दिखने के लिए मोटापा-रोधी दवाओं की ओर आकर्षित किया है।’

उन्होंने आगे कहा कि उच्च प्रदूषण स्तर और इंस्टाग्राम द्वारा प्रचारित सौंदर्य संस्कृति ने इस पीढ़ी को त्वचा-चिकित्सा और श्वसन संबंधी दवाओं की खपत में 25 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी दिलाई है। इसी तरह, फूड-डिलिवरी से प्रेरित जठरांत्र संक्रमण और जंक-फूड आहार से जुड़ी गैर-मादक यानी नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर रोग की बढ़ती घटनाएं संक्रमण-रोधी और लीवर की दवाओं की मांग बढ़ा रही हैं। उनके मुताबिक जनरेशन जी धीरे-धीरे औषधि बाजार को को प्रिस्क्रिप्शन-आधारित से मांग-आधारित बाजार में बदल रही है।

तेजी से विकसित होते क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन फार्मेसी के चलते डॉक्टरों का कहना है कि यह समूह पारंपरिक चिकित्सा परामर्श का इंतजार करने के बजाय त्वरित समाधान तलाश रहा है। शीतल सापले ने कहा, ‘इससे ब्रांड पर सवाल उठाने और विकल्प तलाशने की प्रवृत्ति बढ़ी है, जिसमें जनरेशन जी के मरीज पुराने पीढ़ियों की तुलना में उपचार निर्णयों में सक्रिय भागीदार बन रहे हैं।’

दिल्ली स्थित सीके बिड़ला अस्पताल की आंतरिक चिकित्सा निदेशक मनीषा अरोड़ा ने कहा, ‘हमें समझना होगा कि जनरेशन जी बेहद तकनीक कुशल है और इंटरनेट के साथ पूरी तरह सहज है। वे ऑनलाइन दवाओं की आसान उपलब्धता के कारण स्व-चिकित्सा में विश्वास करते हैं।’ उन्होंने आगे कहा कि सुविधा इस समूह के स्वास्थ्य व्यवहार का केंद्रीय पहलू है। ‘नियमित चेकअप पर जाने के बजाय वे वर्चुअल परामर्श और ई-प्रिस्क्रिप्शन को प्राथमिकता देंगे।’

हालांकि विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि काम का तनाव, निष्क्रिय जीवनशैली और खराब आहार आदतें समय के साथ इस पीढ़ी को दीर्घकालिक रोगों के प्रति संवेदनशील बना सकती हैं। सापले ने कहा, ‘कुछ थेरेपी जैसे हृदय रोग और मधुमेह-रोधी दवाओं में जनरेशन जी का योगदान कम है, क्योंकि शरीर अभी भी लचीला है और कम उम्र में कुछ लापरवाही को संभाल सकता है।’

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First Published - May 21, 2026 | 9:23 AM IST

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