केंद्र सरकार ने भारत में मिनरल एक्सचेंज शुरू करने के लिए बनाए गए मसौदा नियमों में नियामक को खनिज बाजारों में कीमतों की सीमा तय करने और ट्रेडिंग रोकने के लिए व्यापक अधिकार देने का प्रस्ताव रखा है।
मिनरल एक्सचेंज रूल्स, 2026 के मसौदे में इंडियन ब्यूरो ऑफ़ माइंस (आईबीएम) को कीमतों की निचली या ऊपरी सीमा तय करने, कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव के समय ट्रेडिंग निलंबित करने और कुछ खास कॉन्ट्रैक्ट वापस लेने का अधिकार दिया गया है। इससे इस सेक्टर में हस्तक्षेप का महत्त्वपूर्ण प्रावधान किया गया है, जहां कीमतें अब तक ज्यादातर अस्पष्ट रही हैं।
खनन व खनिज अधिनियम, 1957 में संशोधन किया गया है, जिसके माध्यम से केंद्र सरकार ने मिनरल एक्सचेंज स्थापित करने का प्रावधान पेश किया है। इसके बाद सरकार ने यह मसौदा पेश किया है। इस संशोधन में ढांचा मुहैया कराया गया है, लेकिन इसमें परिचालन संबंधी विस्तृत ब्योरा नहीं है।
मिनरल एक्सचेंज रूल्स, 2026 का मसौदा 19 मार्च को जारी किया गया है, जिससे पंजीकरण, प्रशासन, ट्रेडिंग और ऐसे एक्सचेंजों के बारे में एक ब्योरा मिल सकेगा। खनन मंत्रालय ने इस मसौदे पर सभी हिस्सेदारों से 18 अप्रैल तक राय मांगी है। नियमों का मकसद मौजूदा खनिज ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म को एक औपचारिक दायरे में लाना है। इसके तहत उन्हें पहले एक्सचेंज के चालू होने या बंद होने के छह महीने के भीतर एक्सचेंज के तौर पर रजिस्टर करना जरूरी होगा। इस कदम का मकसद बिखरे हुए इकोसिस्टम को डिलिवरी पर आधारित खनिज कॉन्ट्रैक्ट के लिए नियमन के दायरे वाले इलेक्ट्रॉनिक बाजार में बदलना है।