facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

Medical Devices: भारत में पुराने मेडिकल उपकरणों के आयात पर बनेगा नया नियम, सरकार ने शुरू की चर्चा

Advertisement

केंद्र सरकार की उच्च स्तरीय समिति ने रिफर्बिश्ड मेडिकल उपकरणों के आयात के लिए नियम बनाने की प्रक्रिया शुरू की।

Last Updated- August 21, 2025 | 9:13 AM IST
National Medical Devices Policy 2023 gets Centre’s green light

केंद्र सरकार की अंतरविभागीय उच्च अधिकार प्राप्त समिति ने रिफर्बिश्ड या पुराने मेडिकल उपकरणों के भारत में आयात के लिए नए नियम तैयार करने पर चर्चा शुरू कर दी है। उद्योग के अधिकारियों के अनुसार पहले इस्तेमाल किए गए मेडिकल उपकरणों का 1,500 करोड़ रुपये बाजार इस समय देश के समग्र मेडिकल उपकरण उद्योग का करीब 10 प्रतिशत है।

इस मामले से जुड़े लोगों ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया कि अब तक दो ही बैठकें हुई हैं, लेकिन समिति ने रिफर्बिश्ड उपकरण बाजार के आंकड़े की समीक्षा शुरू कर दी है। अधिकारियों ने पुष्टि की कि इस समिति में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (एमओएचएफडब्ल्यू), स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस), केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ), फार्मास्यूटिकल्स विभाग के प्रतिनिधि और उद्योग के प्रतिनिधि शामिल हैं।

सीडीएससीओ ने सीमा शुल्क के प्रधान आयुक्त को 10 जनवरी को एक पत्र लिखा था, जिसमें नियामक ने संज्ञान में लिया कि मेडिकल उपकरण नियम (एमडीआर), 2017 में रिफर्बिश्ड उपकरणों के बारे में कोई नियम नहीं है। उसके बाद बदलाव की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। एक अधिकारी ने कहा, ‘जिन प्रमुख मसलों पर समिति चर्चा कर सकती है, उनमें सेकंड हैंड उपकरण की सेवा की अवधि का निर्धारण या सिर्फ महंगे उपकरणों को अनुमति, महंगे क्रिटिकल केयर उपकरण जैसे विषय शामिल हैं।’

सूत्र ने आगे कहा, ‘स्वास्थ्य मंत्रालय एमडीआर के प्रावधानों में संशोधन कर रहा है, हम नीति निर्माण में सीधे तौर पर शामिल नहीं हैं। हालांकि, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने टिप्पणियों के लिए पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के साथ एक मसौदा या प्रस्ताव साझा किया है।’

पुराने चिकित्सा उपकरणों में रोबोटिक असिस्टेड सर्जरी (आरएएस) सिस्टम, लीनियर एक्सेलरेटर (लिनैक) और सीटी स्कैनर शामिल हैं। उद्योग के एक अधिकारी ने कहा, ‘ये छोटे और मझोले शहरों के साथ-साथ ग्रामीण और वंचित क्षेत्रों में बढ़ती मांग को पूरा करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।’

Advertisement
First Published - August 21, 2025 | 9:13 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement