IBC Amendment Bill: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को लोक सभा में बताया कि दिवाला और ऋण शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) के संशोधित विधेयक में एक अतिरिक्त प्रावधान किया गया है, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि लेनदारों की समिति (सीओसी) द्वारा आवेदक को सफल समाधान आवेदक के रूप में चुनने के कारणों का रिकॉर्ड रखा जाए।
वित्त मंत्री ने कहा, ‘इससे आईबीसी प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता आएगी।’ वित्त मंत्री ने कहा कि आईबीसी से अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों की गैर निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) की वसूली हो सकी है और इसने भारत के बैंकिंग क्षेत्र को बेहतर बनाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
आईबीसी के तहत सीओसी में वित्तीय लेनदार शामिल होते हैं और इसमें सीमित भागीदारी व मतदान अधिकारों वाले परिचालन लेनदार भी शामिल हो सकते हैं। उच्चतम न्यायालय ने जेट एयरवेज परिसमापन और भूषण स्टील-जेएसडब्ल्यू जैसे मामलों में सीओसी के आचरण और उसकी वाणिज्यिक समझ के क्रियान्वयन को लेकर चिंता जताई थी।
भारतीय दिवाला और ऋण शोधन अक्षमता बोर्ड ने दिवाला समाधान प्रक्रिया में सीओसी की जवाबदेही बढ़ाने के लिए महत्त्वपूर्ण कदम उठाए हैं, साथ ही बैठकों में गहन विचार विमर्श का प्रस्ताव भी दिया है।
आईबीसी विधेयक लोक सभा में पारित कर दिया गया, जिसे सोमवार को संसद में पेश किया गया था। इसमें संसद की प्रवर समिति की सभी प्रमुख 11 सिफारिशें स्वीकार कर ली गई हैं। विधेयक में शामिल कुछ प्रमुख बदलावों में राष्ट्रीय कंपनी कानून अपील पंचाट (एनसीएलएटी) के लिए अपील के निपटान हेतु 3 महीने की समय-सीमा तय किया जाना शामिल है। सरकार ने कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया में हो रही देरी की समस्या से निपटने के लिए समाधान योजना की मंजूरी या अस्वीकार करने के लिए 30 दिन की समय सीमा का प्रस्ताव किया है।
सीतारमण ने कहा, ‘आईबीसी विधेयक का मकसद मौजूदा दिवाला ढांचे को मजबूत करना है। आईबीसी ने मूल्यांकन में सुधार, कंपनियों को चालू व्यवसाय के रूप में जारी रखने में सक्षम बनाने के साथ-साथ बैंकिंग क्षेत्र के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में बहुत मदद की है।’
वित्त मंत्री ने कहा कि स्वीकार किए जाने के स्तर से पहले ही निपटाए जा रहे मामलों की संख्या 32,179 तक पहुंच गई है, जिनमें 14.62 लाख करोड़ रुपये की चूक का मामला शामिल था।