घरेलू बाजार में मांग कमजोर रहने और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के धीमे एग्जीक्यूशन के चलते वित्त वर्ष 2026 में भारतीय कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट इंडस्ट्री की कुल बिक्री में हल्की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, निर्यात में रिकॉर्ड तेजी ने इंडस्ट्री को मजबूती दी। इंडियन कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ICEMA) के अनुसार, FY26 में कुल इक्विपमेंट बिक्री करीब 2 फीसदी घटकर 1,36,995 यूनिट रह गई, जबकि FY25 में यह 1,40,191 यूनिट थी।
हालांकि, इस दौरान निर्यात में 31.5 फीसदी से ज्यादा की दमदार ग्रोथ दर्ज की गई, जिसने यह साबित किया कि भारत में बने कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट की वैश्विक मांग लगातार बढ़ रही है। भारत फिलहाल दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट बाजार बना हुआ है और इंडस्ट्री का साइज FY25 में लगभग 10 अरब डॉलर आंका गया था। अनुमान है कि 2030 तक यह बाजार 14.76 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।
ICEMA के प्रेसिडेंट और जेसीबी इंडिया के CEO एवं MD दीपक शेट्टी ने कहा कि इंडस्ट्री में आई मामूली गिरावट को किसी स्ट्रक्चरल कमजोरी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। सरकार का कैपेक्स खर्च अभी भी ऊंचे स्तर पर है, लेकिन जमीन अधिग्रहण में देरी, प्रोजेक्ट मंजूरी की धीमी गति और फंड रिलीज में देरी के कारण इक्विपमेंट की मांग प्रभावित हुई।
घरेलू मांग पर कई अन्य कारणों का भी असर पड़ा। नेशनल हाईवे निर्माण गतिविधियां सात साल के निचले स्तर तक पहुंच गईं। जल जीवन मिशन जैसी बड़ी योजनाओं में फंड डिस्बर्समेंट धीमा रहा। कॉन्ट्रैक्टर पेमेंट में देरी से इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में नकदी संकट बढ़ा। इसके अलावा जनवरी 2025 से लागू हुए CEV Stage- V उत्सर्जन मानकों के कारण मशीनों की लागत बढ़ गई, जिससे खरीदारी प्रभावित हुई।
FY26 में अर्थमूविंग इक्विपमेंट सबसे बड़ा सेगमेंट बना रहा। इसकी बिक्री 97,236 यूनिट रही और इसका कुल बाजार में लगभग 71 प्रतिशत हिस्सा रहा। हालांकि इसमें 2 प्रतिशत की गिरावट आई।
मटेरियल हैंडलिंग इक्विपमेंट की बिक्री 15,290 यूनिट रही, जो सालाना आधार पर 10 प्रतिशत कम रही। कंक्रीट इक्विपमेंट लगभग स्थिर रहा और इसकी बिक्री 14,486 यूनिट रही। दूसरी ओर रोड कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट ने 6.3 प्रतिशत की सकारात्मक वृद्धि दर्ज की।
घरेलू सुस्ती के बावजूद निर्यात इंडस्ट्री के लिए सबसे बड़ा ग्रोथ ड्राइवर बनकर उभरा। ज्यादातर इक्विपमेंट कैटेगरी में एक्सपोर्ट में करीब 32 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। बेहतर क्वालिटी स्टैंडर्ड, प्रतिस्पर्धी कीमत और भारत की बढ़ती मैन्युफैक्चरिंग क्षमता ने भारतीय मशीनों को वैश्विक बाजार में मजबूत पहचान दिलाई। CEV Stage-V नॉर्म्स लागू होने से भारतीय कंपनियां वैश्विक मानकों के और करीब पहुंच गई हैं, जिससे विकसित देशों में भी भारतीय मशीनों की मांग बढ़ सकती है।
लार्सन एंड टुब्रो लिमिटेड के एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट विवेक हजेला के मुताबिक, वित्त वर्ष 26 में निर्यात में दर्ज हुई मजबूत बढ़ोतरी इस बात का संकेत है कि भारतीय कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट की वैश्विक बाजार में पहुंच लगातार बढ़ रही है। इंडस्ट्री की बुनियादी स्थिति अब भी मजबूत है और मौजूदा सुस्ती मांग में कमजोरी की वजह से नहीं, बल्कि मुख्य रूप से प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन से जुड़ी चुनौतियों के कारण है।
यूनियन बजट 2026-27 को इंडस्ट्री के लिए बड़ा गेमचेंजर माना जा रहा है। सरकार ने कंस्ट्रक्शन एंड इंफ्रास्ट्रक्चर इक्विपमेंट सेक्टर के लिए विशेष इंसेंटिव स्कीम की घोषणा की है। इससे हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग, ऑटोमेशन और प्रिसिजन इंजीनियरिंग को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही हाइड्रॉलिक्स, इंजन, ट्रांसमिशन सिस्टम और अन्य महत्वपूर्ण पुर्जों का घरेलू निर्माण बढ़ेगा।
सरकार ने FY27 में पब्लिक कैपेक्स बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये कर दिया है। इसके अलावा डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, हाई-स्पीड रेल नेटवर्क, नए नेशनल वॉटरवेज और कोस्टल कार्गो प्रोजेक्ट्स से आने वाले वर्षों में कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट सेक्टर को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।