केंद्र सरकार ने इस्पात और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों समेत तमाम औद्योगिक जरूरतों को पूरा करने के लिए राज्यों को वाणिज्यिक एलपीजी आवंटन में 20 प्रतिशत की और वृद्धि कर दी है। इससे अब यह कोटा युद्ध से पहले की मांग का 70 प्रतिशत हो गया है।
पेट्रोलियम सचिव नीरज मित्तल ने राज्य के मुख्य सचिवों को लिखे पत्र में कहा कि अतिरिक्त आपूर्ति इस्पात, ऑटोमोबाइल, कपड़ा, डाई, रसायन और प्लास्टिक जैसे श्रम वाले उद्योगों को प्राथमिकता दी जाएगी, क्योंकि इनसे ही अन्य कई आवश्यक क्षेत्र जुड़े हुए हैं।
उन्होंने कहा, ‘मौजूदा 50 प्रतिशत आवंटन के अतिरिक्त अब 20 प्रतिशत और गैस दी जाएगी, जिससे कुल वाणिज्यिक एलपीजी आवंटन गैर-घरेलू एलपीजी के युद्ध से पहले की मांग का 70 प्रतिशत हो जाएगा।’ तेल मंत्रालय ने इस महीने की शुरुआत में तीन अलग-अलग निर्देशों के माध्यम से राज्यों को युद्ध-पूर्व वाणिज्यिक एलपीजी कोटे का 40 प्रतिशत आवंटित किया था। मंत्रालय ने पीएनजी को बढ़ावा देने के लिए कुछ सुधारों के आधार पर राज्यों को 10 प्रतिशत अतिरिक्त एलपीजी आवंटित की थी।
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अब ताजा फैसले के तहत दी जाने वाली अतिरिक्त 20 प्रतिशत एलपीजी प्राथमिकता वाले उद्योगों को दी जाएगी। मित्तल ने कहा, ‘इनमें, प्रक्रिया उद्योगों या उन उद्योगों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिन्हें विशेष ताप उद्देश्यों के लिए एलपीजी की आवश्यकता होती है, क्योंकि इसके विकल्प के तौर पर कोई और गैस इस्तेमाल नहीं की जा सकती।’