भारत में नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन क्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि होने की उम्मीद है जिसे देखते हुए सरकार राष्ट्रीय पावर ग्रिड में 1,150 किलो वोल्ट (केवी) अल्ट्रा हाई वोल्टेज (यूएचवी) पारेषण प्रणाली को एकीकृत करने रही है। यह व्यावसायिक रूप से संचालित पारेषण वोल्टेज में सबसे ऊंची श्रेणी है।
इसका उद्देश्य देश के बिजली क्षेत्र को अगले और उच्च विकास चरण के लिए तैयार करना है जिसमें बड़ी मात्रा में बिजली की थोक निकासी और लंबी दूरी तक पारेषण, तकनीकी लाइन हानियों को कम करने और राइट ऑफ वे के मुद्दे (कानूनी और वित्तीय मसले) से निपटना है। इस तरह की चुनौतियां प्रगति में देर करती हैं और निवेश को हतोत्साहित करती हैं।
पारेषण प्रणाली के एकीकरण के बाद भारत कजाखस्तान के बाद दुनिया का दूसरा ऐसा देश बन जाएगा जो 1,150 केवी ट्रांसमिशन नेटवर्क का संचालन करेगा। चीन मुख्य रूप से 1,000 केवी एसी और 1,100 केवी तक के डीसी नेटवर्क का उपयोग करता है वहीं भारत के ग्रिड में वर्तमान में ज्यादातर 220 केवी, 400 केवी और 765 केवी एसी नेटवर्क शामिल हैं।
यह अहम प्रस्ताव केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण द्वारा प्रस्तावित एक बड़ी योजना का हिस्सा है। इस योजना में डेटा सेंटर जैसे जरूरी लोड के लिए विश्वसनीयता से जुड़े सख्त प्रावधान, नवीकरणीय ऊर्जा को जोड़ने के लिए संशोधित नियम और वोल्टेज की स्थिरता व रिएक्टिव पावर से जुड़ी अतिरिक्त जरूरतें भी शामिल हैं।
बिजली मंत्रालय द्वारा बनाए गए 2023 के ट्रांसमिशन प्लानिंग मानदंड मैनुअल के प्रावधानों में बदलाव की आवश्यकता होगी। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण ने टिप्पणियां मांगने के लिए जारी अधिसूचना में कहा, ‘1,150 केवी उच्च वोल्टेज एसी ट्रांसमिशन सिस्टम के लिए प्रावधान शामिल करने के लिए मैनुअल में संशोधन प्रस्तावित है।’
विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में बड़े पैमाने पर और लंबी दूरी तक बिजली के थोक पारेषण को सक्षम करने के अलावा ग्रिड में 1,150 केवी पारेषण लाइनों का एकीकरण पारेषण उपयोगिताओं, बहुराष्ट्रीय बिजली कंपनियों और मूल उपकरण विनिर्माताओं के लिए ऐतिहासिक व्यावसायिक अवसर भी खोलेगा।
सेंटर फॉर सोशल ऐंड इकनॉमिक प्रोग्रेस के एसोसिएट फेलो रोहित विजय के अनुसार राष्ट्रीय विद्युत योजना के तहत वर्ष 2032 तक 9.15 लाख करोड़ रुपये के पारेषण निवेश की योजना बनाई गई है और यूएचवी-श्रेणी के ट्रांसफार्मर, रिएक्टर और स्विचगियर ईएचवी उपकरणों की तुलना में प्रति यूनिट कई गुना अधिक महंगे होते हैं इसलिए इस वोल्टेज पर कुछ परियोजनाएं भी ऑर्डर मिश्रण को बदल देती हैं।
रोहित विजय ने कहा, ‘इसके साथ ही नए मसौदा में डेटा सेंटर में अतिरेक का जो नियम है, उसे भी जोड़ लें तो यह नियम मुंबई और हैदराबाद जैसे शहरी संकुलों में 220 और 400 केवी के समर्पित निकासी पैकेज लेकर आएगा। यह इंजीनियरिंग, खरीद और निर्माण (ईपीसी) कंपनियों और गैस इंसुलेटेड स्विचगियर आपूर्तिकर्ताओं के लिए मुनाफे वाला सौदा हो सकता है।’
हरटेक पावर के मुख्य कार्याधिकारी सिमरप्रीत सिंह के अनुसार यह संशोधन भारत की पारेषण आपूर्ति श्रृंखला में एक नया निवेश चक्र खोल सकता है, बशर्ते कि उसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाए। अवसर केवल ईपीसी में नहीं है। यह उच्च-वोल्टेज उपकरण, ग्रिड स्वचालन, परीक्षण, प्रमाणन, इंजीनियरिंग डिजाइन और सिस्टम एकीकरण में एक व्यापक औद्योगिक अवसर है।
सिंह ने कहा कि इससे बड़े व्यावसायिक अवसर हासिल हो सकते हैं और पारेषण ईपीसी कंपनियों को मुख्य रूप से लाभ होगा क्योंकि 1,150 केवी लाइन उच्च-मूल्य वाली, तकनीकी रूप से जटिल परियोजनाएं होंगी जिनमें अनुबंध बड़े आकार होंगे।
सिंह ने कहा, ‘टावर निर्माताओं, लाइन हार्डवेयर आपूर्तिकर्ताओं, लॉन्ग-रॉड इंसुलेटर बनाने वालों, कंडक्टर आपूर्तिकर्ताओं और सिविल ठेकेदारों के लिए भी खूब अवसर पैदा होंगे लेकिन सबसे बड़ा लाभ मूल उपकरण विनिर्माताओं और विशेष ग्रिड-प्रौद्योगिकी कंपनियों को मिलेगा।’
विशेषज्ञों का मानना है कि 1,150 केवी यूएचवी एसी पारेषण की ओर प्रस्तावित कदम महत्त्वपूर्ण है। यह वृद्धिशील ग्रिड विस्तार से उच्च-क्षमता वाले राष्ट्रीय बिजली-पारेषण ढांचे में बदलाव का प्रतीक है। इसका मुख्य लाभ कंडक्टर की तीव्रता या राइट-ऑफ-वे दबाव को आनुपातिक रूप से बढ़ाए बिना एक गलियारे के माध्यम से काफी बड़ी मात्रा में बिजली का पारेषण करना संभव होगा।
सिंह ने कहा, ‘हालांकि असली परीक्षा इसके क्रियान्वयन में होगी। गलियारे की चौड़ाई, टावर की ऊंचाई, इंसुलेशन डिजाइन, लॉन्ग-रॉड इंसुलेटर, हार्डवेयर फिटिंग्स, ब्रेकर, ट्रांसफार्मर, प्रतिक्रियाशील मुआवजा प्रणाली इन सभी को तकनीकी सत्यापन, घरेलू विनिर्माण तत्परता और नियामक अनुमोदन की आवश्यकता होगी।’
एक 1,150 केवी यूएचवी एसी लाइन, कंडक्टर की क्षमता, स्थिरता सीमा और सिस्टम की स्थितियों के आधार पर लगभग 6 से 8 गीगावाॅट बिजली पारेषित कर सकती है। यह विशिष्ट 765 केवी और 400 केवी पारेषण क्षमता से काफी अधिक है।
विजय ने कहा, ‘एक ऐसे देश में जहां राइट-ऑफ-वे की बाधाएं ग्रिड विस्तार के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बनती जा रही हैं वहां यूएचवी पारेषण बड़े पैमाने पर लंबी दूरी के बिजली पारेषण का महत्त्वपूर्ण समाधान प्रदान करता है। भारत का अपने योजना ढांचे में 1,150 केवी को शामिल करना दर्शाता है कि वह भविष्य में इस बदलाव के लिए तैयारी कर रहा है।’