केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) के अनुमानों के अनुसार भारत साल 2036 तक अपनी वर्तमान 520 गीगावॉट की स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता को दोगुना करके 1,121 गीगावॉट तक कर सकता है। इसमें लगभग 70 फीसदी क्षमता गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से होगी
इस अनुमान में 315 गीगावॉट कोयला आधारित क्षमता, 20 गीगावॉट गैस क्षमता, 22 गीगावॉट परमाणु, 78 गीगावॉट बड़ी जलविद्युत, 509 गीगावॉट सौर, 155 गीगावॉट पवन ऊर्जा, 16 गीगावॉट बायोमास और 6 गीगावॉट लघु जलविद्युत क्षमता शामिल है।
प्राधिकरण ने आज जारी अपने विद्युत उत्पादन पर्याप्तता योजना दस्तावेज में कहा, ‘इसके अतिरिक्त 2035-36 तक 174 गीगावॉट की ऊर्जा भंडारण स्थापित क्षमता तैयार करने की भी योजना है।’ यह दस्तावेज भविष्य में उपलब्ध संसाधनों में से बिजली उत्पादन के लिए सबसे किफायती उपाय तैयार करने के सरकार के प्रयास को दर्शाता है। इसमें कहा गया है कि 2035-36 तक जोड़ी जाने वाली क्षमता का पूरा ब्योरा है।
वर्तमान में 41 गीगावॉट की कोयला आधारित क्षमता निर्माणाधीन है और 22.4 गीगावॉट कोयला आधारित क्षमता जल्द पूरी हो जाएगा। इसी तरह 6.6 गीगावॉट परमाणु परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं, और 7 गीगावॉट परमाणु परियोजनाएं अनुमोदन के विभिन्न चरण में हैं। 155 गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता निर्माणाधीन है, जिनमें सौर, पवन और हाइब्रिड शामिल हैं।
सीईए ने कहा कि यह रिपोर्ट एक दूरंदेशी, रणनीतिक ढांचा प्रदान करती है जो जीवाश्म और नवीकरणीय स्रोतों में क्षमता वृद्धि को संतुलित करता है। अनुमान के अनुसार 2024-25 से 2035-36 के दौरान अधिकतम बिजली की मांग सालाना 5.58 फीसदी की चक्रवृद्धि दर से बढ़ सकती है जबकि इसी अवधि के दौरान बिजली की आवश्यकता में 6.41 फीसदी की सालाना चक्रवृद्धि दर से बढ़ने का अनुमान है।