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2027 से बदल सकता है आपकी कार का फ्यूल, सरकार की बड़ी तैयारी

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CAFE-3 नियमों में फिर बदलाव की तैयारी, अब E20 नहीं बल्कि E25 फ्यूल को बनाया जा सकता है आधार

Last Updated- May 14, 2026 | 7:39 AM IST
CAFE 3 norms

सरकार गाड़ियों के लिए बनने वाले नए CAFE-3 नियमों में एक और बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। अब इन नियमों में E20 की जगह E25 फ्यूल को आधार बनाया जा सकता है। आसान भाषा में समझें तो सरकार अब मानकर चल रही है कि आने वाले कुछ सालों में देश की ज्यादातर गाड़ियां E25 पेट्रोल पर चलेंगी, इसलिए नए नियम भी उसी हिसाब से बनाए जाएं।

CAFE यानी Corporate Average Fuel Efficiency नियम यह तय करते हैं कि किसी ऑटो कंपनी की गाड़ियों से कितना कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन हो सकता है। ये नियम अप्रैल 2027 से लागू होने वाले हैं और अगले पांच साल तक प्रभावी रहेंगे।

E20 और E25 में फर्क क्या है?

अभी देश में E20 पेट्रोल इस्तेमाल हो रहा है। यानी पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाया जाता है। अब सरकार E25 की तरफ बढ़ना चाहती है, जिसमें एथेनॉल की मात्रा 25 प्रतिशत होगी। एथेनॉल गन्ने और अनाज से भारत में ही बनाया जाता है। सरकार का मानना है कि अगर पेट्रोल में ज्यादा एथेनॉल मिलाया जाएगा तो कच्चे तेल के आयात पर खर्च कम होगा और विदेशी तेल पर निर्भरता भी घटेगी।

पश्चिम एशिया संकट के बाद बढ़ी चिंता

फरवरी 2026 में अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर हमला किया था। इसके बाद पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ गया और कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित हुई। इसका असर पूरी दुनिया में तेल की कीमतों पर पड़ा। इसके बाद भारत सरकार के अलग-अलग विभागों ने ऑटो कंपनियों के साथ बातचीत शुरू की कि E20 से आगे बढ़कर जल्दी E25 पर कैसे जाया जाए। सरकार को लगता है कि ज्यादा एथेनॉल इस्तेमाल करने से तेल आयात का बोझ कम किया जा सकता है।

CAFE-3 का फॉर्मूला बदल सकता है

सूत्रों के मुताबिक ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी यानी BEE अब CAFE-3 के ड्राफ्ट में बदलाव कर सकता है। अभी तक जो टेस्ट और गणना E20 फ्यूल के आधार पर हो रही थी, उसे अब E25 के हिसाब से तैयार किया जा सकता है। एक अधिकारी ने कहा कि जब आने वाले सालों में गाड़ियां E25 पर चलेंगी, तो फिर पुराने E20 फॉर्मूले पर नियम बनाने का कोई मतलब नहीं है।

ऑटो कंपनियां लंबे समय से इंतजार में

ऑटो कंपनियां काफी समय से सरकार से कह रही हैं कि CAFE-3 नियमों को जल्द अंतिम रूप दिया जाए। कंपनियों का कहना है कि नए नियम साफ होने के बाद ही वे नई गाड़ियों, इंजन तकनीक और निवेश की योजना बना पाएंगी। सरकार अब तक इन नियमों के कई ड्राफ्ट जारी कर चुकी है। पहला ड्राफ्ट जून 2024 में आया था। इसके बाद सितंबर 2025 में संशोधित ड्राफ्ट जारी किया गया। फिर फरवरी और अप्रैल 2026 में भी नए ड्राफ्ट ऑटो कंपनियों के साथ साझा किए गए।

फ्यूल बदलने से उत्सर्जन पर क्या असर पड़ता है?

गाड़ियों की टेस्टिंग में इस्तेमाल होने वाला फ्यूल बहुत अहम होता है क्योंकि उसी के आधार पर कार्बन उत्सर्जन मापा जाता है। एथेनॉल में सामान्य पेट्रोल के मुकाबले कार्बन कम होता है। इसलिए अगर पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा बढ़ती है, तो गाड़ियों से निकलने वाला कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन भी बदल जाता है। यही वजह है कि सरकार अब नए CAFE-3 नियमों में E25 फ्यूल को आधार बनाने पर गंभीरता से विचार कर रही है।

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First Published - May 14, 2026 | 7:39 AM IST

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