नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के सचिव संतोष कुमार सारंगी ने सीआईआई के वार्षिक व्यापार सम्मेलन 2026 में कहा कि 2050 तक 1,800 गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के नीति आयोग के अनुमान को हासिल करने के लिए भारत को चीन जैसी सुपर ग्रिड योजना बनाने की जरूरत है।
उद्योग प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए सारंगी ने नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के कुछ इलाके में केंद्रीकरण पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, ‘भारत ने 2030 तक लगभग 574 अरब डॉलर खर्च करने की योजना बनाई है, ताकि एक ‘सुपर ग्रिड’ बनाया जा सके। इसके तहत नवीकरणीय ऊर्जा से समृद्ध क्षेत्रों से बिजली को ‘लोड सेक्टर’ तक पहुंचाने के लिए हाई-वोल्टेज डीसी और एचवीएसी लाइनें बिछाई जा रही हैं।’
नवाचार और शोध पर प्रगतिशील निवेश पर जोर देते हुए सारंगी ने कहा, ‘पेरोवस्काइट सोलर सेल एक ऐसा रास्ता दिखा रहे हैं, जिसके माध्यम से सोलर एनर्जी की दरें घटकर लगभग 1 रुपया प्रति यूनिट तक आ सकती हैं।
इसी तरह एनर्जी स्टोरेज के क्षेत्र में हो रहे शोध से यह संभावना भी बनती है कि भारत ऐसे समाधान खोज ले, जो लीथियम आयरन फॉस्फेट बैटरी से भी ज़्यादा सस्ते हों।’ सारंगी ने कहा कि देश में निवेशकों, डेवलपरों और निर्माताओं को नीतिगत स्थिरता का भरोसा दिलाने के लिए नीति-निर्माण के प्रति एक लचीला और फुर्तीला दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है। उन्होंने आगे कहा कि इस दिशा में केंद्र और राज्य सरकारों को मिलकर काम करना होगा।