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विकसित भारत के लिए चाहिए ‘पावरफुल बैंक’, FM सीतारमण का बड़ा बयान

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विकसित भारत के लक्ष्य को पूरा करने के लिए सरकार बैंकिंग सेक्टर को मजबूत बनाने हेतु जल्द ही एक उच्चस्तरीय समिति गठित करेगी।

Last Updated- February 08, 2026 | 3:37 PM IST
FM Nirmala Sitharaman
FM Nirmala Sitharaman

केंद्र सरकार जल्द ही बैंकिंग सेक्टर पर एक उच्चस्तरीय समिति का गठन करने जा रही है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (FM Nirmala Sitharaman) ने कहा है कि यह समिति ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए बैंकिंग प्रणाली को मजबूत और सक्षम बनाने के लिए एक व्यापक रोडमैप तैयार करेगी, ताकि भविष्य की बड़ी वित्तीय जरूरतों को पूरा किया जा सके।

पीटीआई वीडियो को दिए एक इंटरव्यू में वित्त मंत्री ने बताया कि सरकार चाहती है कि यह समिति सुझाव दे कि बैंकिंग व्यवस्था में किन-किन सुधारों की जरूरत है, जिससे विकसित भारत के लिए जरूरी फंडिंग, क्रेडिट और वित्तीय सेवाएं आम लोगों तक पहुंच सकें। उन्होंने साफ किया कि इस पहल को केवल सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के विलय तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए।

निर्मला सीतारमण ने कहा कि विकसित भारत का सपना साकार करने के लिए बड़े पैमाने पर निवेश, ऋण और मजबूत बैंकिंग नेटवर्क जरूरी है। बैंकिंग सेक्टर को इस तरह तैयार करना होगा कि वह देश की बढ़ती अर्थव्यवस्था की जरूरतों को संभाल सके।

समिति के गठन के समय को लेकर पूछे गए सवाल पर वित्त मंत्री ने कहा कि इसे जल्द से जल्द गठित किया जाएगा। गौरतलब है कि 1 फरवरी को पेश किए गए बजट में उन्होंने ‘विकसित भारत के लिए बैंकिंग पर हाई-लेवल कमेटी’ बनाने का प्रस्ताव रखा था, जिसका उद्देश्य वित्तीय स्थिरता, समावेशन और उपभोक्ता संरक्षण को ध्यान में रखते हुए बैंकिंग सेक्टर की समग्र समीक्षा करना है।

बजट में सार्वजनिक क्षेत्र की एनबीएफसी की क्षमता और दक्षता बढ़ाने के लिए पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (PFC) और रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉरपोरेशन (REC) के पुनर्गठन का भी प्रस्ताव रखा गया है। इस पर टिप्पणी करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि संबंधित मंत्रालय में इस दिशा में काफी काम हो चुका है और अब यह देखा जाएगा कि आगे इसे कैसे अमल में लाया जाता है।

REC, पावर सेक्टर की प्रमुख फाइनेंस कंपनी PFC की सहायक इकाई है। दोनों संस्थान देश में बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन और वितरण परियोजनाओं के लिए अहम भूमिका निभाते हैं। मार्च 2019 में PFC ने सरकार से 14,500 करोड़ रुपये में REC में बहुलांश हिस्सेदारी हासिल की थी, जिससे उसे प्रबंधन नियंत्रण भी मिला था।

PFC और REC दोनों ही ‘नवरत्न’ सार्वजनिक उपक्रम हैं और यह कदम समान क्षेत्र में काम कर रही कंपनियों के एकीकरण की दिशा में उठाया गया था। हाल ही में PFC के बोर्ड ने REC लिमिटेड को अपने साथ मर्ज करने के प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दी है। यह फैसला बजट में किए गए ऐलान के बाद सामने आया है।

सरकार का मानना है कि इस तरह के सुधारों और पुनर्गठन से बैंकिंग और वित्तीय संस्थान अधिक सक्षम बनेंगे और विकसित भारत के लक्ष्य की ओर देश को तेजी से आगे ले जाने में मदद मिलेगी।

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First Published - February 8, 2026 | 3:37 PM IST

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