पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने गुरुवार को कहा कि तेल विपणन कंपनियां (ओएमसी) जल्द ही राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) और मुंबई-पुणे-नागपुर कॉरिडोर में 50 से 100 पेट्रोल पंपों पर फ्लेक्स-फ्यूल की बिक्री शुरू करेंगी। इसके बाद इस ईंधन की बिक्री का दायरा बढ़ाकर 2027 के अंत तक देश के प्रमुख शहरों में 5,000 पेट्रोल पंपों तक पहुंचाया जाएगा।
देशभर में खुदरा पेट्रोल पंपों पर फ्लेक्स-फ्यूल की उपलब्धता नहीं होना भारत में फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों (एफएफवी) को बाजार में उतारने में सबसे बड़ी बाधाओं में से एक रहा है। फ्लेक्स-फ्यूल ऐसे ईंधन को कहा जाता है जिसमें पेट्रोल के साथ कम से कम 85 प्रतिशत एथनॉल मिला होता है। ऐसे ईंधन पर चलने के लिए विशेष रूप से तैयार किए गए वाहनों को फ्लेक्स-फ्यूल वाहन कहा जाता है।
पुरी ने मारुति सुजूकी इंडिया लिमिटेड द्वारा भारत की पहली फ्लेक्स-फ्यूल कार वैगनआर के फ्लेक्स-फ्यूल संस्करण के लॉन्च के बाद अपने संबोधन में कहा कि भारत में विभिन्न वाहन श्रेणियों में एफएफवी को चरणबद्ध तरीके से लागू किए जाने के साथ ही भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) ने ई85 (85 प्रतिशत एथनॉल मिश्रित ईंधन) को एफएफवी के लिए मानक एकल ईंधन (मोनो फ्यूल) के रूप में अधिसूचित कर दिया है। ऐसे में मुझे लगता है कि इस पहल की सफलता सुनिश्चित है। उन्होंने कहा, ‘शुरुआत में दिल्ली-एनसीआर और मुंबई-पुणे-नागपुर कॉरिडोर में लगभग
50-100 फ्लेक्स-फ्यूल डिस्पेंसिंग आउटलेट होंगे। इस वर्ष दिसंबर तक यह संख्या 500 तक बढ़ जाएगी और अगले वर्ष के अंत तक ईश्वर की इच्छा से प्रमुख शहरों में लगभग 5,000 आउटलेट तक विस्तार होगा।’ पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के डेटा विभाग, पेट्रोलियम प्लानिंग और एनालिसिस सेल (पीपीएसी) के अनुसार भारत में सार्वजनिक और निजी ओएमसी द्वारा संचालित एक लाख से अधिक ईंधन खुदरा आउटलेट हैं।
पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद (जिसकी शुरुआत 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर सैन्य हमले किए जाने से हुई थी) केंद्र सरकार वाहन निर्माताओं को भारत में फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को बाजार में उतारने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। सरकार का मानना है कि एथनॉल गन्ने जैसे घरेलू स्रोतों से देश में ही तैयार किया जाता है। जबकि भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का 85 प्रतिशत से अधिक आयात करता है।