पश्चिम एशिया संकट और इनपुट लागत में वृद्धि के बावजूद वित्त वर्ष 2025-26 की जनवरी-मार्च तिमाही के दौरान भारत का विनिर्माण क्षेत्र लचीला बना रहा। भारतीय उद्योग परिसंघ (फिक्की) के नवीनतम तिमाही सर्वे के अनुसार 93 प्रतिशत विनिर्माताओं ने पिछली तिमाही के 91 प्रतिशत की तुलना में उत्पादन स्तर में वृद्धि या स्थिरता दर्ज की है।
सर्वे में 8 प्रमुख विनिर्माण क्षेत्रों को शामिल किया गया। इसमें 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक कारोबार करने वाली बड़ी कंपनियों और एमएसएमई दोनों इकाइयों से प्रतिक्रियाएं ली गईं। इन्होंने कहा कि घरेलू मांग भी स्थिर रही है। सर्वे में शामिल 64 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही के दौरान पिछली तिमाही की तुलना में ऑर्डर बुक की संख्या में वृद्धि हुई है।
सर्वे के मुताबिक 80 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने पिछले वर्ष की इसी तिमाही की तुलना में निर्यात में वृद्धि या इसमें कोई बदलाव न होने की उम्मीद जताई है, जो पिछली तिमाही के 74 प्रतिशत से ऊपर है। भर्ती की मंशा में भी मामूली वृद्धि हुई। सर्वे के अनुसार अगले 3 महीनों में 41 प्रतिशत फर्मों ने अतिरिक्त श्रमिकों की भर्ती की योजना बनाई, जबकि पिछली तिमाही में यह संख्या 38 प्रतिशत थी। बहरहाल विनिर्माताओं में लागत के दबाव में तेज वृद्धि की बात कही है।
प्रतिक्रिया देने वाले करीब 70 प्रतिशत लोगों ने कहा कि इस तिमाही में बिक्री के प्रतिशत के हिसाब से उत्पादन लागत बढ़ी है। पिछली तिमाही में 57 प्रतिशत लोगों ने लागत बढ़ने की बात कही थी। सर्वे के मुताबिक प्रतिक्रिया देने वाले सभी लोगों ने कहा कि कच्चे माल की कीमत और बिजली की लागत बढ़ने से उत्पादन की लागत बढ़ी है।