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दुनिया भर में बढ़ रही भारतीय दवाओं की मांग, नाइजीरिया और ब्राजील बने नए बड़े ठिकाने

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ताजा आंकड़ों के मुताबिक, इस वित्त वर्ष के पहले आठ महीनों (अप्रैल से नवंबर 2025-26) में भारत का फार्मा निर्यात 6.5 प्रतिशत बढ़कर 20.48 अरब डॉलर तक पहुंच गया है

Last Updated- January 18, 2026 | 3:32 PM IST
Pharma Sector
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

भारतीय फार्मास्युटिकल कंपनियों के लिए दुनिया भर से अच्छी खबरें आ रही हैं। वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बावजूद, भारत ने दवाओं के निर्यात में अपनी बादशाहत कायम रखी है। वाणिज्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, इस वित्त वर्ष के पहले आठ महीनों (अप्रैल से नवंबर 2025-26) में भारत का फार्मा निर्यात 6.5 प्रतिशत बढ़कर 20.48 अरब डॉलर तक पहुंच गया है।

इस बार की सबसे खास बात यह है कि नाइजीरिया और ब्राजील जैसे देश भारतीय दवाओं के लिए बड़े और प्रमुख बाजार बनकर उभरे हैं।

नाइजीरिया और ब्राजील में बढ़ी भारतीय दवाओं की मांग

भारत की फार्मा एक्सपोर्ट ग्रोथ में नाइजीरिया ने सबको चौंकाया है। यह सबसे तेजी से बढ़ते निर्यात केंद्रों में से एक बनकर उभरा है। इस वित्त वर्ष के पहले आठ महीनों में नाइजीरिया को होने वाले निर्यात में 17.9 करोड़ डॉलर की बढ़ोतरी देखी गई है। कुल निर्यात वृद्धि में अकेले नाइजीरिया का योगदान 14 प्रतिशत से ज्यादा रहा है।

Also Read: बजट से उम्मीदें: हेल्थकेयर, मेडिकल डिवाइस और फार्मा कंपनियों ने टैक्स राहत और R&D निवेश बढ़ाने की मांग की

वहीं, ब्राजील के बाजार में भी भारतीय कंपनियों ने अपनी पकड़ मजबूत की है। आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल से नवंबर के दौरान ब्राजील को किए जाने वाले निर्यात में करीब 10 करोड़ डॉलर का इजाफा हुआ है। जानकारों का मानना है कि इन देशों में स्वास्थ्य सेवाओं तक बढ़ती पहुंच और भारतीय जेनेरिक दवाओं पर बढ़ते भरोसे की वजह से यह मांग बढ़ी है।

अमेरिका अब भी सबसे बड़ा बाजार

हालांकि नाइजीरिया और ब्राजील तेजी से उभर रहे हैं, लेकिन भारतीय दवाओं के लिए अमेरिका अब भी सबसे बड़ा खरीदार बना हुआ है। अप्रैल-नवंबर 2025 के दौरान कुल फार्मा निर्यात में अकेले अमेरिका की हिस्सेदारी 31 प्रतिशत से अधिक रही है।

इसके अलावा, फ्रांस, नीदरलैंड, कनाडा, जर्मनी और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों में भी भारतीय दवाओं की मांग में लगातार स्थिरता और बढ़त देखी गई है। नीदरलैंड के बाजार में 5.8 करोड़ डॉलर से ज्यादा का निर्यात बढ़ा है, जो दिखाता है कि भारतीय दवाएं अब यूरोपीय वितरण नेटवर्क में गहराई से अपनी जगह बना रही हैं।

(PTI के इनपुट के साथ)

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First Published - January 18, 2026 | 3:19 PM IST

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