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सीमेंट ढुलाई बढ़ाने के लिए रेलवे की नई टर्मिनल नीति लागू, पांच साल में हिस्सेदारी 50% तक लाने का लक्ष्य

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नई नीति का उद्देश्य सीमेंट की परिवहन लागत को कम करना, ट्रकों की तुलना में कम कार्बन फुटप्रिंट बनाना और सड़क पर भीड़भाड़ को कम करना है

Last Updated- November 18, 2025 | 10:49 PM IST
Indian Railway
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

भारतीय रेलवे ने सीमेंट के लिए माल भाड़ा दरों को सुव्यवस्थित करने और रेलवे की भूमि पर समर्पित सुविधाएं स्थापित करने के लिए नई थोक टर्मिनल नीति शुरू करने की आज घोषणा की। उम्मीद है कि इन उपायों से सीमेंट माल ढुलाई की मात्रा तीन गुना हो जाएगी।

नई नीति का उद्देश्य सीमेंट की परिवहन लागत को कम करना, ट्रकों की तुलना में कम कार्बन फुटप्रिंट बनाना और सड़क पर भीड़भाड़ को कम करना है। दरअसल इस जिंस की ज्यादातर आवाजाही सड़क मार्ग के जरिये होती है। रेलवे से सीमेंट की ढुलाई होने की स्थिति में एक ही खेप में बड़ी मात्रा में सीमेंट की आवाजाही संभव हो सकेगी। इससे पैकेजिंग की जरूरतें कम होंगी और इसकी आवाजाही में कम नुकसान होगा।

भारत ने पिछले वित्तीय वर्ष (2024-25) में 45 करोड़ टन सीमेंट का उत्पादन किया थी। यह आंकड़ा 2030 में बढ़कर 600 टन होने की उम्मीद है। अभी देश के सीमेंट परिवहन में रेलवे की हिस्सेदारी 17 प्रतिशत है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि सरकार का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में रेलवे की हिस्सेदारी को 50 प्रतिशत तक लाना है, लेकिन उन्होंने इससे होने वाले अतिरिक्त राजस्व पर कोई टिप्पणी नहीं की।

मंत्री ने यह भी कहा कि पहले की स्लैब दर प्रणाली भी सीमेंट संयंत्रों के स्थान को प्रभावित कर रही थी। रेलवे ने अब दरों को 90 पैसे प्रति ग्रॉस टन किलोमीटर पर सुव्यवस्थित किया है। रेलवे को हालिया 17 प्रतिशत परिवहन हिस्सेदारी के साथ चालू वित्त वर्ष में 12,800 करोड़ रुपये की कमाई होने की उम्मीद है। इस हिस्सेदारी व परिणामी मात्रा में तीन गुना वृद्धि से 20,000 करोड़ रुपये से अधिक के अतिरिक्त राजस्व का अवसर मिलेगा। मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल को आमतौर पर बुलेट ट्रेन के रूप में जाना जाता है। अब इस गलियारे को 2027 में सूरत और वापी के बीच 100 किमी खोला जाएगा।

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First Published - November 18, 2025 | 10:49 PM IST

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