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₹25,000 करोड़ की मेगा परियोजना! भारत की पहली कोयला गैसीकरण डील

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ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम, आयात पर निर्भरता घटेगी

Last Updated- April 03, 2026 | 9:19 AM IST
Coal

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव व वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में उतार-चढ़ाव के दौर में भारत में ऊर्जा सुरक्षा के लिए पहली स्वदेशी गैसीकरण परियोजना के जमीन पट्टे पर समझौता हुआ। भारत कोल गैसिफिकेशन ऐंड कैमिकल लिमिटेड (बीसीजीसीएल) और महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड (एमसीएल) ने समझौता किया। इसके तहत ओडिशा के झारसुगुड़ा जिले के लखनपुर में कोयले से अमोनियम नाइट्रेट बनाने की पहली स्वदेशी परियोजना के लिए समझौता हुआ। इससे आयात पर निर्भरता भी घटेगी।

सूत्रों के अनुसार इस परियोजना की क्षमता 2,000 टन प्रतिदिन (टीपीडी) है। परियोजना के लिए अनुमानित निवेश करीब 25,000 करोड़ रुपये है। यह समझौता महत्त्वपूर्ण मील का पत्थर है । इसमें भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (बीएचईएल) की स्वदेशी रूप से विकसित कोयला गैसीकरण तकनीक का उपयोग किया जाएगा। कोयला गैसीकरण तकनीक कोयले को सिंथेसिस गैस (सिनगैस) में बदलती है। फिर सिनगैस से अमोनिया, मेथनॉल, यूरिया, हाइड्रोजन, सिंथेटिक प्राकृतिक गैस (एसएनजी), पेट्रोकेमिकल्स और तरल ईंधन सहित विभिन्न मूल्यवर्धित उत्पाद बनाए जा सकते हैं। इस क्रम में लखनपुर परियोजना विशेष रूप से अमोनियम नाइट्रेट के उत्पादन पर ध्यान केंद्रित करेगी। यह प्रमुख औद्योगिक रसायन है और इसका उपयोग उर्वरकों और खनन में व्यापक रूप से होता है।

दरअसल, कोयला मंत्रालय ने ऊर्जा उत्पादों के आयात को कम करने के लिए सात कोयला परियोजनाओं के लिए 64,000 रुपये मंजूर किए हैं। इन सात परियोजनाओं में से एक लखनपुर परियोजना है। इस क्रम में सात परियोजनाओं में से चार महाराष्ट्र, दो ओडिशा और एक पश्चिम बंगाल में होगी।

लखनपुर परियोजना एमसीएल की 350 एकड़ से अधिक भूमि पर स्थापित की जाएगी। दरअसल, कोयलना मंत्रालय ने हाल ही में नीति में बदलाव किए हैं। इसके तहत कोयला युक्त क्षेत्र में गैसीकरण परियोजना की अनुमति दी गई है। इस नीतिगत बदलाव से लखनपुर परियोजना को प्रोत्साहन मिला। इस कदम से भारत के विशाल कोयला भंडार के नए अवसर खुलने की उम्मीद है। भारत में कोयले का दुनिया में पांचवां (करीब 400 अरब टन) का भंडार है। यह भंडार कम से कम 70 वर्षों तक रहेगा।

केंद्र सरकार ने अपनी समर्पित कोयला गैसीकरण प्रोत्साहन योजना के तहत इस परियोजना के लिए पहले ही 1,350 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता बढ़ा दी है। प्रमुख इंजीनियरिंग और निर्माण अनुबंध पहले ही दिए जा चुके हैं। इसमें बीएचईएल ने बड़े लंप सम टर्नकी (एलएसटीके) पैकेज – एलएसटीके-1 और एलएसटीके-2 हासिल किए गए हैं। हालांकि एलएसटीके-3 और एलएसटीके-4 लार्सन ऐंड टुब्रो को दिए गए हैं। समयसीमा का पालन तय करने के लिए बाउंड्री वॉल निर्माण और वृक्ष गणना सहित समानांतर साइट विकास गतिविधियां जारी हैं।

इस समझौते पर नई दिल्ली में बुधवार को केंद्रीय कोयला और खान मंत्री जी किशन रेड्डी की उपस्थिति में हस्ताक्षर हुए। इस मौके पर रेड्डी ने परियोजना के रणनीतिक महत्त्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कोयला गैसीकरण को बढ़ावा देने के लिए 8,500 करोड़ रुपये के व्यय को पहले ही मंजूरी दे दी है। इसमें अब तक सात परियोजनाओं को अंतिम रूप दिया गया है, जिनमें से तीन की नींव रखी जा चुकी है। सरकार आत्मनिर्भर भारत की दृष्टि के अनुरूप कोयला क्षेत्र को बदलने के लिए केंद्रित पहल चला रही है।

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First Published - April 3, 2026 | 9:19 AM IST

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